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न्यू स्टार्ट संधि का अवसान

संदर्भ

5 फरवरी, 2026 को ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि की औपचारिक समाप्ति वैश्विक सुरक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विगत पांच दशकों से अमेरिका एवं रूस के बीच परमाणु हथियारों की सीमा तय करने वाली कानूनी बाध्यताओं का अंत होने से दुनिया में एक नई परमाणु होड़ शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है।

शीत युद्ध एवं शस्त्र नियंत्रण की शुरुआती पहल (1960-1970) 

  • 1960 के दशक के उत्तरार्ध में जब सोवियत संघ ने अपनी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) शक्ति को अमेरिका के बराबर पहुँचा दिया तब वैश्विक अस्थिरता का डर पैदा हुआ। इसी तनाव को कम करने के लिए सामरिक शस्त्र सीमा वार्ता (SALT) की शुरुआत हुई। 
  • SALT I (1969-1972): इसके तहत ‘एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) संधि’ हुई जिसने मिसाइल रक्षा प्रणालियों को सीमित कर दिया ताकि कोई भी देश ‘पहले-हमला’ (First-strike) की क्षमता हासिल न कर सके।
  • SALT II (1979): इस संधि ने परमाणु वितरण वाहनों (बमवर्षक एवं मिसाइलें) की संख्या 2,250 निर्धारित की। हालांकि, अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण के कारण अमेरिका ने इसे कभी अनुमोदित नहीं किया। 

शीत युद्ध के बाद का युग: कटौती एवं कमी (1991-2009) 

  • सोवियत संघ के पतन के साथ ही हथियारों की संख्या को केवल सीमित करने के बजाय उन्हें ‘घटाने’ पर जोर दिया गया।
  • START I (1991): यह एक ऐतिहासिक संधि थी जिसने परमाणु युद्धक हथियारों को 6,000 और मिसाइलों को 1,600 तक सीमित करने का आदेश दिया। इसमें ऑन-साइट निरीक्षण की कड़ी व्यवस्था थी। यह 2009 में समाप्त हुई।
  • START II (1993): इसका लक्ष्य हथियारों को 3,500 तक लाना था किंतु 2002 में अमेरिका के ABM संधि से बाहर निकलने के बाद रूस ने भी इससे हाथ खींच लिए।
  • SORT (2002): इसे एक ‘अस्थायी पुल’ के रूप में देखा गया, जिसने तैनात हथियारों को 1,700-2,200 के बीच रखने का लक्ष्य रखा।

न्यू स्टार्ट (New START): परमाणु स्थिरता का अंतिम स्तंभ (2011-2026) 

वर्ष 2010 में राष्ट्रपति ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री अनातोलियेविच मेदवेदेव (रूस) ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए जो 2011 में प्रभावी हुई।

संधि की मुख्य शर्तें

  • हथियारों की सीमा: सामरिक परमाणु हथियारों को 1,550 और वितरण प्रणालियों को 800 तक सीमित किया गया।
  • कड़ी निगरानी: अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवर्ष 18 बार जमीनी निरीक्षण और निरंतर डेटा साझा करने का प्रावधान किया गया।
  • विस्तार: वर्ष 2021 में राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसे 5 वर्ष के लिए बढ़ाकर 5 फरवरी, 2026 तक वैध कर दिया था।  

संधि की समाप्ति: भविष्य की चुनौतियाँ एवं जोखिम 

  • आज जब यह संधि समाप्त हो चुकी है तो वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य निम्नलिखित खतरों से घिरा है: 
    • अनियंत्रित शस्त्रागार: अब अमेरिका (लगभग 5,277 हथियार) और रूस (लगभग 5,449 हथियार) पर अपनी परमाणु शक्ति बढ़ाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।
    • पारदर्शिता का अभाव: नियमित निरीक्षण और डेटा साझाकरण बंद होने से दोनों देशों के बीच संदेह बढ़ेगा, जिससे छोटे विवाद भी बड़े परमाणु संघर्ष में बदल सकते हैं।
    • परमाणु अप्रसार को झटका: वर्ष 2026 की परमाणु अप्रसार संधि (NPT) समीक्षा से ठीक पहले इस संधि का टूटना अन्य देशों को भी संयम छोड़ने के लिए उकसा सकता है। 
    • रणनीतिक प्रतिस्पर्धा: रूस, अमेरिका एवं चीन के बीच अब एक खुली व अनियंत्रित रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता शुरू होने का संकेत मिल रहा है। 

निष्कर्ष

विशेषज्ञों की चेतावनी स्पष्ट है कि शस्त्र नियंत्रण के बिना दुनिया पहले से कहीं अधिक असुरक्षित है। यद्यपि भविष्य में नए समझौतों की संभावना बनी हुई है किंतु वर्तमान में आपसी विश्वास की कमी और कानूनी सीमाओं का अभाव एक अनिश्चित परमाणु युग की ओर संकेत करता है। 

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