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ज़ेहनपोरा के विशाल बौद्ध स्तूप

चर्चा में क्यों ?

उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले का छोटा सा गाँव ज़ेहनपोरा हाल ही में वैश्विक पुरातात्विक मानचित्र पर उभरा है। लंबे समय तक जिन मिट्टी के टीलों को स्थानीय लोग प्राकृतिक भू-आकृति मानते रहे, वे वास्तव में कुषाण काल से संबंधित एक विशाल और महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल सिद्ध हुए हैं।

ज़ेहनपोरा की खोज:  

कई दशकों तक स्थानीय निवासियों के लिए ज़ेहनपोरा के ये 10 एकड़ में फैले टीले केवल भू-दृश्य का हिस्सा थे। लेकिन हालिया शोध ने चौंकाने वाला खुलासा किया है:

  • मानव निर्मित संरचना: ये टीले प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित हैं।
  • प्राचीनता: विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये 2,000 वर्ष से अधिक पुराने हैं।
  • प्रधानमंत्री का उल्लेख: पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस स्थल का विशेष जिक्र कर इसकी सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया।

पुरातात्विक खुदाई और प्रारंभिक निष्कर्ष

कश्मीर विश्वविद्यालय के 'मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र' और जम्मू-कश्मीर पुरातत्व विभाग की टीम ज़ेहनपोरा में काम कर रही है। खुदाई के निदेशक डॉ. मोहम्मद अजमल शाह के अनुसार:

  • प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि ये संरचनाएं कुषाण साम्राज्य के समय की हैं।
  • 1970 के दशक में एक नहर निर्माण के कारण यह स्थल दो भागों में बँट गया था।
  • शोधकर्ताओं ने स्थल के मानचित्रण के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है।
  •  टीलों के ऊपर लकड़ी की प्राचीन संरचनाओं के अवशेष भी मिले हैं।
  • इस स्थल के विशाल आकार को देखते हुए पूर्ण अध्ययन में कम से कम 3 साल लगेंगे। 
  • यह कश्मीर के प्राचीन व्यापार मार्गों और बौद्ध प्रभाव को समझने में मील का पत्थर साबित होगा।

फ्रांस के अभिलेखागार से जुड़ा रहस्य

इस खोज को एक महत्वपूर्ण आयाम तब प्राप्त हुआ, जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसके वैश्विक संबंधों की आधिकारिक पुष्टि की 

  • तस्वीरों से मिलान: फ्रांस के एक संग्रहालय के पुराने फोटो संग्रह में तीन बुद्ध स्तूपों की तस्वीरें मिलीं, जो हूबहू ज़ेहनपोरा की इन संरचनाओं जैसी दिखती हैं।
  • ब्रिटिश काल का लिंक: माना जाता है कि ब्रिटिश यात्री लाहौर और तक्षशिला से कश्मीर की यात्रा के दौरान इन स्थलों की तस्वीरें खींचकर ले गए थे।

कश्मीर: बौद्ध शिक्षा और दर्शन का प्राचीन केंद्र

  • माना जाता है कि मौर्य सम्राट अशोक के काल में बौद्ध धर्म यहाँ आया, हालांकि 'राजतरंगिणी' इसे उससे भी प्राचीन बताती है।
  • बौद्ध धर्म के 'महायान' संप्रदाय की जड़ें कश्मीर में ही मानी जाती हैं, जो बाद में चीन और मध्य एशिया तक फैला।
  • प्रसिद्ध भारतीय-ग्रीक शासक मेनंदर और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच प्रसिद्ध दार्शनिक संवाद भी इसी क्षेत्र में हुआ था।

प्रश्न. ज़ेहनपोरा की संरचनाओं को किस काल से संबंधित माना जा रहा है ?

(a) मौर्य काल

(b) गुप्त काल

(c) कुषाण काल

(d) शुंग काल

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