New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

भारत में रोगी सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।) 

संदर्भ 

प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस का आयोजन किया जाता है। 

रोगी सुरक्षा की स्थिति 

वैश्विक स्थिति

वैश्विक स्तर पर, अनुमान बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान देखभाल प्राप्त करते समय 10 में से एक मरीज को नुकसान का अनुभव होता है। 

  • बाह्य रोगी देखभाल में यह संख्या बढ़कर 10 में से चार हो जाती है।

भारत में स्थिति 

  • भारत के लिए, जहाँ रोगों का बोझ तेज़ी से कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य विकारों जैसी दीर्घकालिक बीमारियों की ओर बढ़ रहा है, यह चुनौती विशेष रूप से गंभीर है। 
    • इन स्थितियों में दीर्घकालिक और लगातार उपचार की आवश्यकता होती है, जिससे सुरक्षा संबंधी चूक के और भी ज़्यादा मामले सामने आते हैं। 
  • गहन देखभाल में, जहाँ उपचार की जटिलता के लिए कई विशेषज्ञों का एक साथ आना आवश्यक होता है, अपर्याप्त समन्वय के कारण चिकित्सीय क्षति होती है।
  • यद्यपि भारत ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री- जन आरोग्य जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार किया है, लेकिन रोगी सुरक्षा सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक उपेक्षित पहलू बना हुआ है। 

भारत में रोगी सुरक्षा चुनौतियाँ

  • उच्च चिकित्सा त्रुटियाँ: अस्पताल में होने वाले संक्रमण, रक्त के थक्के, असुरक्षित इंजेक्शन या रक्त आधान, अपर्याप्त प्रोटोकॉल, खराब रिपोर्टिंग प्रणाली आदि। 
  • संक्रमण: अस्पतालों, विशेष रूप से ग्रामीण/माध्यमिक देखभाल सेवा केंद्रों में कमज़ोर संक्रमण नियंत्रण ।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: भीड़भाड़, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी, पुराने उपकरण डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी पर अत्यधिक दबाव,लंबी शिफ्ट ।
  • जवाबदेही का अभाव: राष्ट्रव्यापी रोगी सुरक्षा मानकों का अभाव।

समाधान के प्रयास 

हाल के वर्षों में, भारत ने इस पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

संस्थागत प्रयास 

  • राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा कार्यान्वयन ढाँचा (2018-25) प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग से लेकर नैदानिक ​​कार्यक्रमों में सुरक्षा को शामिल करने तक का रोडमैप तैयार करता है। 
  • सोसाइटी ऑफ फार्माकोविजिलेंस, इंडिया जैसे पेशेवर नेटवर्क देश भर में प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की निगरानी और रिपोर्ट करते हैं। 
  • अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) ने संक्रमण नियंत्रण, रोगी अधिकारों तथा दवा प्रबंधन के लिए व्यवहारों का ऑडिट शामिल करके रोगी सुरक्षा के मानक में वृद्धि की है। 

नागरिक समाज की भूमिका 

  • इंडिया फाउंडेशन की रोगी सुरक्षा और पहुँच पहल चिकित्सा उपकरणों की नियामक स्पष्टता को मज़बूत करने के लिए काम करता है। 
  • एक अन्य गैर-लाभकारी संस्था, पेशेंट्स फॉर पेशेंट सेफ्टी फाउंडेशन, सुरक्षित स्वास्थ्य प्रथाओं के बारे में जागरूकता प्रसार के लिए हर हफ्ते 14 लाख घरों को कवर करती है।
    • यह 1,100 से ज़्यादा अस्पतालों और 52,000 पेशेवरों को प्रशिक्षित भी करती है।

नीति परिदृश्य

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017): सुरक्षित, प्रभावी, किफ़ायती स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता।
  • डिजिटल स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन: गुणवत्ता निगरानी के अवसर।

वैश्विक मानकों से सीख  

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक रोगी सुरक्षा कार्य योजना, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सभी स्तरों में सुरक्षा को एकीकृत करने का एक खाका प्रस्तुत करती है। 
  • एक प्रभावी तंत्र के रूप में रोगी सलाहकार परिषदों (PAC) की स्थापना जो अस्पतालों में निर्णय लेने में रोगियों की आवाज़ को शामिल करती है। 
    • उच्च आय वाले देशों के केस स्टडीज़ से पता चलता है कि PAC सुरक्षा, संचार और विश्वास में सुधार कर रहे हैं। 
    • भारत इस मॉडल का परीक्षण और विस्तार कर सकता है, और इसे स्थानीय वास्तविकताओं के अनुकूल बना सकता है।
  • अस्पतालों को भी, मान्यता मानकों को पूरा करने के साथ ही PAC को अपनाकर और त्रुटियों को जल्दी पकड़ने के लिए तकनीकी समाधानों का सह-विकास करके इस चुनौती का सामना करना होगा।

आगे की राह

  • सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल स्थापित करना।
  • गहन देखभाल में प्रशिक्षण और स्टाफिंग मानदंडों को मज़बूत करने पर बल।
  • मान्यता और लेखापरीक्षा (एनएबीएच, राज्य निकाय) का विस्तार।
  • प्रतिकूल चिकित्सा घटनाओं के लिए एक मज़बूत रिपोर्टिंग प्रणाली का निर्माण किया जाना चाहिए।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रोगी सुरक्षा जागरूकता को एकीकृत करने पर बल।
  • मीडिया रोगी सुरक्षा के असफल और सफल मॉडलों, दोनों को उजागर करके जनता की समझ को आकार दे सकती है। 
  • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से कॉर्पोरेट कार्यस्थल कार्यक्रमों का विस्तार करने के साथ ही सुरक्षा अभियानों को वित्तपोषित कर सकते हैं। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X