New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

आतंकवाद में डिजिटल ट्रेडक्राफ्ट का बढ़ता खतरा

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका)

संदर्भ

दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके से स्पष्ट है कि वर्तमान में आतंकवादी न केवल जमीन पर बल्कि डिजिटल दुनिया में भी खतरनाक तरीके से सक्रिय हैं। एन्क्रिप्टेड ऐप्स, निजी सर्वर एवं गुप्त ऑनलाइन तरीकों का इस्तेमाल कर आतंकवादी एजेंसियों की निगरानी से बच रहे हैं।

डिजिटल ट्रेडक्राफ्ट : आतंकवाद का नया रूप

  • आतंकवादी अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, निजी सर्वर और गुप्त डिजिटल तरीकों से योजना बनाते हैं।
  • कई मॉड्यूल VPN और विदेशी प्रॉक्सी का इस्तेमाल कर बैन किए गए ऐप भी चला लेते हैं।
  • ‘डेड-ड्रॉप ईमेल’ जैसे पुराने जासूसी तरीकों का आधुनिक संस्करण डिजिटल रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
  • तकनीकी ज्ञान रखने वाले शिक्षित लोग, जैसे- डॉक्टर व प्रोफेशनल, अब इन नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।

मुख्य विशेषताएँ

  • एन्क्रिप्टेड संचार: थ्रीमा (Threema), सेशन (Session), डिस्कोर्ड (Discord), प्रोटोनमेल (ProtonMail) जैसे ऐप व सुविधा का उपयोग, जिसमें न फोन नंबर चाहिए, न ईमेल। 
  • निजी सर्वर: आतंकवादी अपने निजी सर्वर बनाकर एक क्लोज्ड नेटवर्क में बात करते हैं।
  • डेड-ड्रॉप तकनीक : ईमेल भेजने की बजाय ड्राफ्ट सेव करना, जिसे अन्य सदस्य पढ़कर डिलीट कर देते हैं।
  • न्यूनतम डिजिटल फुटप्रिंट : फोन बंद रखना, सीमित ऑनलाइन गतिविधि, VPN का उपयोग।
  • फिजिकल रेकी + डिजिटल योजना : जमीन पर रेकी और ऑनलाइन गुप्त प्लानिंग का मिश्रित मॉडल।

पारंपरिक जमीन-आधारित खतरे से अंतर

  • पहले आतंकवादी फोन कॉल, मीटिंग और ओपन नेटवर्क का उपयोग करते थे। अब संचार पूरी तरह एन्क्रिप्टेड, विकेंद्रीकृत व ट्रैस करना मुश्किल होता है।
  • भौतिक सबूत सीमित होते हैं और कई बार डिजिटल सबूत भी अपने आप मिट जाते हैं। पारंपरिक निगरानी फोन टैपिंग, ईमेल इंटरसेप्ट अब लगभग बेअसर हो गए हैं। 
  • गुप्त सर्वर व ड्राफ्ट ईमेल पारंपरिक सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच से बाहर।

मुख्य चुनौतियाँ

  • एन्क्रिप्टेड ऐप्स और निजी सर्वर को ट्रैक करना बेहद कठिन
  • डिजिटल सबूत जल्दी मिट जाते हैं जिससे फॉरेंसिक जांच मुश्किल
  • बैन किए गए ऐप भी VPN से आसानी से चलाए जा सकते हैं।
  • शिक्षित व तकनीकी रूप से सक्षम आतंकवादी मॉड्यूल का बढ़ना
  • विदेशी नेटवर्क और ट्रांसनेशनल कनेक्शन की बढ़ती भूमिका
  • संस्थानों में छिपी कट्टरपंथी गतिविधियों का जल्दी पता लगाना कठिन

आगे की राह

  • उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक टीमें : एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, निजी सर्वर और मेमोरी फॉरेंसिक्स में विशेषज्ञ टीमें
  • निजी सर्वर पर नियम : ऐसी डिजिटल प्रणालियों के लिए स्पष्ट कानूनी और निगरानी ढांचा
  • कानूनों में संशोधन : डिजिटल डेड-ड्रॉप, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन जैसे खतरे को कानून में शामिल करना 
  • संस्थागत जागरूकता : विश्वविद्यालयों और प्रोफेशनल संस्थाओं में कट्टरपंथ पहचान कार्यक्रम
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग : विदेशी एजेंसियों, टेक कंपनियों और ऐप के मूल देशों से समन्वय
  • जन-जागरूकता : आधुनिक आतंकवाद के डिजिटल स्वरूप को समझने और रिपोर्ट करने की क्षमता बढ़ाना
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR