New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

शांति विजन (The SHANTI Vision)

संदर्भ 

  • हाल ही में, भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की वर्ष 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए देश की दावेदारी का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस राजनयिक अभियान के केंद्र में शांति विज़न है, जो अंतरराष्ट्रीय विधि के मानदंडों, पारस्परिक विश्वास और वैश्विक व्यवस्था के सशक्त प्रतिनिधित्व पर आधारित है।   

SHANTI विज़न क्या है ? 

  • SHANTI एक रणनीतिक संक्षिप्त नाम (Acronym) है, जिसका पूर्ण रूप Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity (मानदंडों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) है।  
  • यह दृष्टिकोण इस मूलभूत सिद्धांत को रेखांकित करता है कि वैश्विक शांति और समृद्धि को खंडित (Fragmented) या चयनात्मक रूप से प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अनिवार्य है। 

उद्देश्य:

  • इस विज़न का उद्देश्य वैश्विक शासन (Global Governance) के उस विरोधाभास का समाधान प्रस्तुत करना है, जिसमें एक ओर आर्थिक एवं तकनीकी परस्पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर विश्व में संघर्ष, हिंसा तथा अस्थिरता भी बढ़ती जा रही है।

SHANTI विज़न की प्रमुख विशेषताएँ: 

  • ग्लोबल साउथ का सशक्तिकरण : यह विज़न ऐसी न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण पर बल देता है, जिसमें वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़, उनकी वित्तीय चिंताएँ तथा विकास संबंधी चुनौतियाँ वैश्विक निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में प्रभावी रूप से सम्मिलित हों। 
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं यथार्थवादी शांति स्थापना : यह संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों (UN Peacekeeping Operations) को अधिक संसाधन-संपन्न, प्रौद्योगिकी आधारित तथा यथार्थवादी जनादेश (Mandate) से सुसज्जित करने का समर्थन करता है। साथ ही, यह महिला, शांति एवं सुरक्षा (Women, Peace and Security) वैश्विक एजेंडा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से समन्वित मुकाबला : SHANTI विज़न आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों तथा वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसी सीमा-पार चुनौतियों से निपटने के लिए सुदृढ़ एवं समन्वित अंतरराष्ट्रीय विधिक ढाँचे (International Legal Framework) की आवश्यकता पर बल देता है। 
  • उत्तरदायी प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक मानदंड : यह उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) के सुरक्षित, पारदर्शी एवं उत्तरदायी उपयोग हेतु वैश्विक मानकों के निर्माण का समर्थन करता है, ताकि राज्य तथा गैर-राज्य दोनों प्रकार के तत्वों द्वारा उनके दुरुपयोग को रोका जा सके। 
  • विकास साझेदारी का प्रभावी उपयोग : SHANTI विज़न भारत की विश्वसनीय विकास साझेदार (Trusted Development Partner) की भूमिका को रेखांकित करता है। वर्तमान में भारत के सहयोग से 79 देशों में अवसंरचना विकास की अनेक परियोजनाएँ संचालित हो रही हैं। इन विकासात्मक साझेदारियों के माध्यम से भारत संघर्ष के स्थान पर संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा देने की वकालत करता है।  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और भारत 

अस्थायी सदस्यता का ढांचा:

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 5 स्थायी (P5) और 10 निर्वाचित अस्थायी सदस्य शामिल होते हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा दो-तिहाई बहुमत के आधार पर दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। 

भारत का ऐतिहासिक सेवा रिकॉर्ड:

  • वैश्विक सुरक्षा मामलों में भारत की भूमिका निरंतर और प्रभावशाली रही है। भारत अब तक कुल आठ बार (1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और 2021–22) सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुका है। 

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भारत का योगदान:

  • भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों (UN Peacekeeping Missions) में विश्व के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है। अब तक भारत लगभग 3 लाख सैन्य एवं पुलिस कर्मियों को लगभग 50 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भेज चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित होती है। 

सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की मांग: 

  • भारत का मानना है कि वर्ष 1945 की वैश्विक शक्ति संरचना पर आधारित वर्तमान सुरक्षा परिषद आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं तथा वैश्विक दक्षिण के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसलिए भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणियों की सदस्यता के विस्तार का समर्थन करता है, ताकि इसे अधिक प्रतिनिधिक, समावेशी एवं लोकतांत्रिक बनाया जा सके।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR