हाल ही में, भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की वर्ष 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए देश की दावेदारी का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस राजनयिक अभियान के केंद्र में शांति विज़न है, जो अंतरराष्ट्रीय विधि के मानदंडों, पारस्परिक विश्वास और वैश्विक व्यवस्था के सशक्त प्रतिनिधित्व पर आधारित है।
इस विज़न का उद्देश्य वैश्विक शासन (Global Governance) के उस विरोधाभास का समाधान प्रस्तुत करना है, जिसमें एक ओर आर्थिक एवं तकनीकी परस्पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर विश्व में संघर्ष, हिंसा तथा अस्थिरता भी बढ़ती जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 5 स्थायी (P5) और 10 निर्वाचित अस्थायी सदस्य शामिल होते हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा दो-तिहाई बहुमत के आधार पर दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
वैश्विक सुरक्षा मामलों में भारत की भूमिका निरंतर और प्रभावशाली रही है। भारत अब तक कुल आठ बार (1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और 2021–22) सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुका है।
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों (UN Peacekeeping Missions) में विश्व के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है। अब तक भारत लगभग 3 लाख सैन्य एवं पुलिस कर्मियों को लगभग 50 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भेज चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित होती है।
भारत का मानना है कि वर्ष 1945 की वैश्विक शक्ति संरचना पर आधारित वर्तमान सुरक्षा परिषद आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं तथा वैश्विक दक्षिण के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसलिए भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणियों की सदस्यता के विस्तार का समर्थन करता है, ताकि इसे अधिक प्रतिनिधिक, समावेशी एवं लोकतांत्रिक बनाया जा सके।
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