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केरल में शहरीकरण प्रबंधन

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।)

संदर्भ

वर्तमान में केरल, तेज़ी से बढ़ते शहरी विकास की चुनौतियों से निपटने के लिए केरल शहरी नीति आयोग (Kerala Urban Policy Commission : KUPC) और एक योजना मॉडल के माध्यम से इस समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा है।

केरल का शहरीकरण मॉडल

  • विस्तारित शहरीकरण: अन्य महानगर-केंद्रित विकास के विपरीत, केरल में राज्य भर में फैले छोटे और मध्यम शहरों का एक नेटवर्क है।
  • विकेंद्रीकृत शासन: जन योजना अभियान के तहत नियोजन, स्वच्छता और आवास में स्थानीय निकायों की सशक्त भूमिका।
  • सामुदायिक भागीदारी: कुदुम्बश्री (महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क) अपशिष्ट प्रबंधन, आजीविका और गरीबी उन्मूलन में संलग्न है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा संबंध: सामाजिक बुनियादी ढाँचे में निवेश से झुग्गी-झोपड़ियों का प्रसार कम होने के साथ ही जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

चुनौतियाँ

  • अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि और अपर्याप्त वैज्ञानिक निपटान।
  • यातायात भीड़भाड़ और एकीकृत शहरी परिवहन का अभाव।
  • तटीय कटाव और जलवायु परिवर्तन से शहरी बस्तियाँ प्रतिकूल रूप से प्रभावित।
  • नियोजित विस्तार के लिए सीमित भूमि उपलब्धता।

केरल शहरी नीति आयोग का गठन 

  • दिसंबर 2023 में गठित केरल शहरी नीति आयोग को 25 साल का एक शहरी रोडमैप तैयार करने का काम सौंपा गया था। 
    • के.यू.पी.सी. ने मार्च 2025 में राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। 
  • के.यू.पी.सी. पहला राज्य-स्तरीय आयोग है जिसकी रिपोर्ट में, जलवायु लचीलापन अंतर्निहित है। 
  • यह शहरों को ठोस समस्याओं के रूप में नहीं, बल्कि जैविक, जलवायु-जागरूक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में संदर्भित करता है। 
  • के.यू.पी.सी. की रिपोर्ट में डाटा क्रांति, शासन में बदलाव, पहचान के पुनरुद्धार और वित्तीय सशक्तीकरण के संदर्भ में सिफारिशें की गई थी।

आवश्यकता 

  • वर्ष 2023 के अंत तक, केरल राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा तेज़ी से शहरीकरण कर रहा था। 
  • अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2050 तक केरल की शहरी आबादी 80% से ज़्यादा हो जाएगी। 
  • विगत कुछ वर्षों में  केरल में जलवायु संबंधी खतरे भी तेज़ हो रहे थे। बाढ़, भूस्खलन तटीय क्षेत्र समुद्र-स्तर के दबाव ने इसे आपदा के प्रति सुभेद्य बना दिया।
  • दिसंबर 2023 में कैबिनेट द्वारा के.यू.पी.सी. के गठन का प्रस्ताव भारत के केंद्रीकृत, परियोजना-आधारित शहरी मॉडल से एक सोचा-समझा बदलाव था। 
  • यह एक राजनीतिक स्वीकृति थी कि केरल को अपने स्थान, इतिहास और जलवायु संदर्भ के अनुरूप अपनी दिशा की आवश्यकता है। 
  • के.यू.पी.सी. भारत का पहला राज्य-स्तरीय शहरी आयोग बन गया, जिसने एक आदर्श बदलाव का संकेत दिया।

आयोग की प्रमुख सिफारिशें 

30 मार्च, 2025 को मुख्यमंत्री को सौंपी गई के.यू.पी.सी. रिपोर्ट की कुछ सबसे महत्वपूर्ण सिफारिशों में शामिल हैं:

  • जलवायु और जोखिम-सचेत ज़ोनिंग: किसी भी प्रकार की शहरी योजना को भूस्खलन, तटीय जलप्लावन, बाढ़ क्षेत्रों आदि के खतरे के मानचित्रण को प्रतिबिंबित करना चाहिए। 
  • एक डिजिटल डाटा वेधशाला की स्थापना: केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान में, एक रीयल-टाइम डाटा तंत्रिका केंद्र; उच्च-रिज़ॉल्यूशन लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार, ज्वार/जल गेज, उपग्रह और रीयल-टाइम मौसम डाटा एकत्र कर सकता है। 
  • हरित शुल्क और जलवायु बीमा: पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनाओं पर पर्यावरणीय शुल्क (हरित शुल्क) लगाया जा सकता है जो शहरी लचीलेपन को वित्तपोषित करेगा। 
  • उपयुक्त बीमा मॉडल : एक पैरामीट्रिक बीमा मॉडल आपदा-प्रवण क्षेत्रों के लिए पूर्व-अनुमोदित भुगतान सुनिश्चित करता है।
  • नगरपालिका और पूल्ड बॉन्ड: तिरुवनंतपुरम, कोच्चि और कोझिकोड, बड़े शहर होने के कारण, नगरपालिका बॉन्ड जारी कर सकते हैं, जबकि छोटे शहर पूल्ड उपकरणों का उपयोग करेंगे। 
    • बॉन्ड सब्सक्रिप्शन को वर्ष 2024 के अंतरिम बजट में भी शामिल किया गया था।
  • शासन में व्यापक बदलाव: महापौरों के नेतृत्व में नगर मंत्रिमंडल नौकरशाही की जड़ता को दूर कर सकते हैं। समर्पित नगरपालिका संवर्गों के साथ विशेषज्ञ प्रकोष्ठ (जलवायु, अपशिष्ट, गतिशीलता, कानून) का गठन किया जाना चाहिए। 
    • एक "ज्ञानश्री" कार्यक्रम युवा तकनीकी प्रतिभाओं की भर्ती और तैनाती करेगा।
  • स्थान-आधारित आर्थिक पुनरुद्धार: त्रिशूर-कोच्चि को फिनटेक केंद्र के रूप में, तिरुवनंतपुरम-कोल्लम को ज्ञान गलियारा, कोझिकोड को साहित्य के शहर के रूप में जाना जाता है जबकि पलक्कड़ और कासरगोड को स्मार्ट-औद्योगिक क्षेत्रों में उन्नत किया गया है।
  • सामान्य, संस्कृति और देखभाल: रिपोर्ट में आर्द्रभूमि को पुनर्जीवित करने, जलमार्गों को पुनः सक्रिय करने और विरासत क्षेत्रों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। 
    • इसने नगर स्वास्थ्य परिषदों  के माध्यम से प्रवासियों, छात्रों और गिग श्रमिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने की भी सिफारिश की है।

अन्य राज्यों के लिए सबक

  • शहरी नियोजन और सेवा वितरण के लिए स्थानीय सरकारों को मज़बूत बनाने की आवश्यकता है।
  • सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • शहरी नीतियों में जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन शामिल किया जाना चाहिए।
  • प्रवासन तनाव को कम करने के लिए महानगरों से परे संतुलित शहरी विकास को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • तकनीकी आंकड़ों को जीवंत अनुभवों के साथ जोड़ना और संवादात्मक प्रणालियाँ बनाना जहाँ नागरिकों के इनपुट को डाटा वेधशालाओं में मैप किया जाए। 
  • स्थानीय निकायों को हरित शुल्क, बांड व जोखिम प्रीमियम से सशक्त बनाना और शासन में युवाओं और विशेषज्ञों को शामिल करना।
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