संदर्भ
हाल ही में, गूगल के सी.ई.ओ. सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit 2026) में ‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ पहल की घोषणा की।
अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ पहल के बारे में
- इसका उद्देश्य एआई तक पहुंच को सभी तक पहुँचाना और डिजिटल खाई को एआई खाई में बदलने से रोकना है।
- इस परियोजना के तहत भारत को अमेरिका और दक्षिणी गोलार्ध से जोड़ने के लिए अत्याधुनिक सब-सी केबल्स (Subsea Cables) का उपयोग किया जाएगा।
- यह एक विशाल सहयोगात्मक डिजिटल अवसंरचना परियोजना है और गूगल के भारत में पांच वर्षों और अरबों डॉलर के निवेश का हिस्सा है।
- इसमें कई अंतरराष्ट्रीय सब-सी केबल का निर्माण और भारत के पूर्वी तट पर नया सब-सी गेटवे शामिल है।
- यह एआई व क्लाउड कार्यभार के लिए तेज़, भरोसेमंद एवं लचीली कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
उद्देश्य
- एआई तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना और डिजिटल खाई को एआई खाई में बदलने से रोकना
- चार महाद्वीपों में डिजिटल कनेक्टिविटी की पहुंच, विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाना
- भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करना, जिसके लिए अग्रणी एआई मॉडलों के लिए निम्न विलंबता वाली अवसंरचना आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
- नया सबसी गेटवे: भारत का पहला प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सबसी गेटवे विशाखापत्तनम (विज़ाग) में स्थापित किया जाएगा। यह मुंबई और चेन्नई के मौजूदा लैंडिंग प्वाइंट्स से भौगोलिक विविधता सुनिश्चित करेगा।
- तीन नए सब-सी मार्ग: भारत को सीधे सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाले मार्ग।
- चार रणनीतिक फाइबर मार्ग: अमेरिका के पूर्वी एवं पश्चिमी तट से भारत को अफ्रीका और दक्षिणी प्रशांत महासागर के माध्यम से जोड़ने वाले नए मार्ग।
- पश्चिमी तट कनेक्टिविटी: मुंबई और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच सीधा फाइबर-ऑप्टिक मार्ग।
- AIIMS साझेदारी: मरीजों को लक्षण दर्ज करने और प्रारंभिक रिपोर्ट बनाने में मदद करने वाले एआई टूल्स के विकास के लिए एम्स (AIIMS) के साथ सहयोग।
- कौशल विकास समेकन: कर्मयोगी भारत के सहयोग से 800+ जिलों में 2 करोड़ सरकारी कर्मचारियों को एआई-सक्षम प्रशिक्षण प्रदान करना।
महत्व
- 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए विज़ाग को गेटवे के रूप में जोड़ना सुनिश्चित करता है कि भारत की डिजिटल रीढ़ पारंपरिक मार्गों में किसी रुकावट के बावजूद काम करती रहे।
- प्राचीन समुद्री व्यापार मार्गों को आधुनिक डिजिटल व्यापार मार्गों में बदलकर यह पहल अमेरिका एवं भारत के बीच आर्थिक व तकनीकी बंधन को अधिक मजबूत करती है।