New
Civil Services Day Offer - Valid Till : 28th April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 6:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 1st May 2026, 8:30PM Civil Services Day Offer - Valid Till : 28th April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 6:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 1st May 2026, 8:30PM

अंतरिक्ष रॉकेट दाब प्रणाली में हीलियम का उपयोग

  • हाल ही में, दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से वापस लाने के लिए भेजे गए बोइंग स्टारलाइनर विमान को प्रणोदन प्रणाली में हीलियम रिसाव के कारण वापस धरती में उतरना पड़ा है।
  • अंतरिक्ष रॉकेट में हीलियम का उपयोग ईंधन टैंकों में पर्याप्त दबाव बनाए रखने, रॉकेट के इंजनों में बिना किसी रुकावट के ईंधन प्रवाह सुनिश्चित करने और शीतलन प्रणालियों के लिए किया जाता है।
  • हीलियम की निम्नलिखित विशेषताओं के कारण इसका उपयोग रॉकेट प्रणाली में किया जाता है :- 
    • निष्क्रिय गैस : हीलियम एक निष्क्रिय गैस है जो अन्य पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करती। 
    • कम भार : यह हाइड्रोजन के बाद दूसरी सबसे हल्की गैस है। रॉकेट को अंतरिक्ष कक्षा तक पहुँचाने और उसे बनाए रखने के लिए अत्यधिक मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती है। हीलियम का कम भार इस आवश्यकता की पूर्ति करता है।
    • कम  क्वथनांक : हीलियम का क्वथनांक भी बहुत कम (-268.9 डिग्री सेल्सियस या -452 डिग्री फ़ारेनहाइट) होने के कारण यह अत्यधिक ठंडे वातावरण में भी गैसीय रूप में बनी रह सकती है।
  • अन्य वैकल्पिक प्रणाली : कुछ रॉकेटों में ईंधन टैंक दबाव बनाए रखने के लिए आर्गन और नाइट्रोजन जैसी गैसों के प्रयोग किया गया है। 
    • आर्गन और नाइट्रोजन जै निष्क्रिय होने के साथ ही किफायती भी है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR