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भारत की ऊर्जा सुरक्षा और संपीड़ित बायोगैस

संदर्भ  

  • पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से प्राप्त होता है। इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष ने तेल आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव डाला है। यद्यपि भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए हैं, फिर भी देश के लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते होते हैं। ऐसे में इस सामरिक समुद्री मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न कर सकता है।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में भारत ने हाल के वर्षों में आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने, कृषि अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) जैसे वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक नीतिगत पहलें शुरू की हैं। हालांकि, महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए जाने और सरकारी समर्थन मिलने के बावजूद इस क्षेत्र में अपेक्षित गति से प्रगति नहीं हो सकी है।

संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) क्या है ?

  • बायोगैस का उत्पादन कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, गन्ने का प्रेसमड, नगर ठोस अपशिष्ट, सीवेज शोधन संयंत्रों के अपशिष्ट तथा अन्य जैविक पदार्थों के अवायवीय अपघटन (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाली जैविक प्रक्रिया) से प्राकृतिक रूप से होता है।
  • इस बायोगैस को शुद्ध करने के बाद संपीड़ित किया जाता है, जिसे संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) कहा जाता है। इसमें मीथेन की मात्रा अधिक होती है। संरचना और ऊर्जा क्षमता की दृष्टि से सीबीजी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध प्राकृतिक गैस के समान है।
  • इसका ऊष्मीय मान (कैलोरिफिक वैल्यू) तथा अन्य गुण संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) के समान होते हैं, इसलिए इसे एक वैकल्पिक एवं नवीकरणीय वाहन ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। 

संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) के लाभ :

  • अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं उत्तरदायी प्रबंधन, साथ ही कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी।
  • किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत।
  • उद्यमिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा रोजगार को बढ़ावा।
  • जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग।
  • प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी।
  • कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के विरुद्ध सुरक्षा।

भारत और संपीड़ित बायोगैस   

  • भारत पिछले एक दशक से अपनी प्राकृतिक गैस व्यवस्था में बायोगैस को सम्मिलित करने का प्रयास कर रहा है। इस दिशा में वर्ष 2018 में SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल की शुरुआत हुई, जिसके अंतर्गत वर्ष 2023 तक 5,000 संपीडित बायोगैस संयंत्रों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, 3 जून 2026 तक केवल 132 संयंत्र ही स्थापित हो सके, जिससे स्पष्ट है कि निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच उल्लेखनीय अंतर बना हुआ है। 

किफायती परिवहन की दिशा में सतत वैकल्पिक व्यवस्था ( SATAT) योजना के बारे में: 

  • किफायती परिवहन की दिशा में सतत वैकल्पिक व्यवस्था ( SATAT ) योजना 1 अक्टूबर 2018 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoP&NG) द्वारा शुरू की गई थी।
  • इसका उद्देश्य विभिन्न अपशिष्ट/बायोमास स्रोतों से संपीड़ित बायो गैस (CBG) के उत्पादन के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना और प्राकृतिक गैस के साथ इसके उपयोग को बढ़ावा देना है। 
  • इसका लक्ष्य पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों के विकल्प के रूप में सीबीजी के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है।

नीतिगत पहल और क्रियान्वयन की चुनौतियाँ 

  • सीबीजी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने गोबरधन (GOBARdhan) योजना प्रारंभ की। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक जिले में सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए 50 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान करने की व्यवस्था की गई। 
  • इसके अतिरिक्त 564 करोड़ रुपये बायोमास संग्रहण मशीनों की खरीद तथा 994 करोड़ रुपये बायोगैस संयंत्रों को गैस ग्रिड से जोड़ने हेतु पाइपलाइन अवसंरचना विकसित करने के लिए आवंटित किए गए। 
  • इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ सके हैं। अपर्याप्त आधारभूत संरचना, सीमित निजी निवेश, औपचारिक ऋण तक कठिन पहुँच तथा अत्यधिक प्रारंभिक पूंजीगत लागत जैसे कारकों ने इस क्षेत्र के विस्तार को बाधित किया है। 
  • यदि सरकार वित्तीय सहायता को और प्रभावी बनाए तथा त्वरित मूल्यह्रास, कर अवकाश एवं अन्य निवेश प्रोत्साहन उपलब्ध कराए, तो निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार संभव है।  

सरकार की वर्तमान रणनीति

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 2 फरवरी 2024 को बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (बीएएम) की खरीद के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। इस योजना के अंतर्गत सीबीजी उत्पादकों को ऐसी मशीनों की खरीद हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • सीबीजी के निर्बाध विपणन के लिए मंत्रालय ने सीबीजी–सिटी गैस वितरण समन्वयन योजना (सीबीजी–सीजीडी सिंक्रोनाइज़ेशन योजना) शुरू की है। इसके तहत गेल को घरेलू गैस के साथ सीबीजी का मिश्रण कर एकसमान आधार मूल्य (यूनिफॉर्म बेस प्राइस) पर सभी सिटी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों को आपूर्ति करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि इसका उपयोग सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों में हो सके।
  • देश में सीबीजी के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) ने सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) में चरणबद्ध रूप से सीबीजी मिश्रण अनिवार्य करने की मंजूरी दी है। 
  • यह दायित्व वित्त वर्ष 2025–26 से लागू हुआ। इसके अनुसार मिश्रण लक्ष्य क्रमशः वित्त वर्ष 2025–26 में 1%, 2026–27 में 3%, 2027–28 में 4% तथा 2028–29 से 5% निर्धारित किया गया है। इससे गैस आधारित एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी तथा शुद्ध शून्य उत्सर्जन (नेट ज़ीरो एमिशन) के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।
  • भारत सरकार के प्रयासों के अलावा, व्यक्तिगत राज्यों ने भी सीबीजी पहलों को बढ़ावा देने के लिए आगे कदम बढ़ाया है, इस दिशा में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों ने एसएटीएटी योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है।

निष्कर्ष 

  • मुख्य प्रश्न यह है कि क्या भारत सीबीजी क्षेत्र में भी एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम जैसी सफलता दोहरा सकेगा। वर्ष 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 1.5 प्रतिशत था, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया और यह लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया गया। 
  • हालाँकि सीबीजी ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का बड़ा अवसर है, लेकिन इसकी सफलता केवल महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर निर्भर नहीं होगी। इसके लिए मजबूत अवसंरचना, पर्याप्त निवेश, प्रभावी नीतिगत समर्थन तथा ऐसी कृषि रणनीति आवश्यक होगी, जो ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रख सके।   

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