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मैग्नेटोरियोलॉजिकल (Magnetorheological-MR) द्रव

संदर्भ 

हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना के शोधकर्ताओं ने हाइब्रिड मैग्नेटो-रियामीटर (Hybrid Magneto-Rheometer) नामक एक उन्नत उपकरण विकसित किया है। यह नवाचार मैग्नेटोरियोलॉजिकल (Magnetorheological-MR) द्रवों के व्यवहार का अधिक सटीक अध्ययन करने में मदद करेगा तथा इनके औद्योगिक, ऑटोमोबाइल और वैज्ञानिक उपयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।    

मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रव क्या है? 

  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रव एक विशेष प्रकार का द्रव है, जिसकी विशेषता यह है कि यह चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में अपनी यांत्रिक और प्रवाह संबंधी विशेषताओं को तत्काल परिवर्तित कर सकता है।  
  • सामान्य स्थिति में यह एक साधारण द्रव की तरह व्यवहार करता है, लेकिन जैसे ही इस पर चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाता है, इसकी श्यानता तेजी से बढ़ जाती है और यह ठोस-जैसी अवस्था ग्रहण कर लेता है।

प्रमुख विशेषताएँ: 

  • चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते ही इसकी श्यानता (Viscosity) में तीव्र वृद्धि हो जाती है।
  • मजबूत चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में यह श्यान-प्रत्यास्थ (Viscoelastic) ठोस के समान व्यवहार करने लगता है।
  • चुंबकीय क्षेत्र हटने पर यह पुनः अपनी मूल तरल अवस्था में लौट आता है।
  • यह द्रव विद्युत-चुंबक (Electromagnet) के माध्यम से उत्पन्न बल को नियंत्रित करने में सक्षम होता है, जिससे इसे विभिन्न स्वचालित एवं नियंत्रण-आधारित प्रणालियों में प्रयोग किया जाता है। 

संरचना: 

मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव तीन प्रमुख घटकों से मिलकर तैयार किया जाता है - 

  • सूक्ष्म आकार के चुंबकीय लौह (Iron) कण,
  • एक गैर-चुंबकीय आधार द्रव (Base Fluid), तथा विशेष योजक (Additives), जो कणों के नीचे बैठने (Sedimentation) और आपस में चिपकने (Agglomeration) की प्रवृत्ति को कम करते हैं।  

वाहक द्रव (Carrier Fluids):

  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव के निर्माण में विभिन्न प्रकार के आधार या वाहक द्रवों का उपयोग किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं - 
    • खनिज तेल (Mineral Oil)
    • सिलिकॉन तेल (Silicone Oil)
    • अरंडी का तेल (Castor Oil)
    • सोयाबीन तेल (Soybean Oil)
    • मिट्टी का तेल (Kerosene)
    • सिंथेटिक तेल (Synthetic Oil)
    • जैविक तेल (Organic Oil)
    • जल-आधारित तेल (Water-based Fluid)
  • इन सभी विकल्पों में सिलिकॉन तेल को सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें उच्च श्यानता सूचकांक, कम घर्षण, अधिक फ्लैश प्वाइंट तथा बेहतर कतरनी (Shear) क्षमता होती है। यही कारण है कि कंपन नियंत्रण (Vibration Control) संबंधी प्रणालियों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।  

प्रमुख उपयोग:

  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव उन प्रणालियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहां वास्तविक समय में नियंत्रण और परिस्थितियों के अनुसार स्वतः अनुकूलन (Adaptive Control) आवश्यक होता है। इसके प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं - 
    • ऑटोमोबाइल ब्रेक प्रणाली
    • क्लच प्रणाली
    • शॉक एब्जॉर्बर
    • कंपन नियंत्रण एवं डैम्पिंग प्रणाली
    • डैम्पर
    • एक्ट्यूएटर
    • चिकित्सा एवं जैव-चिकित्सकीय उपकरण 
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