चर्चा में क्यों?
अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लाव झील (Glaw Lake) को रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत भारत की 101वीं अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर भूमि (Ramsar Site) का दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही यह झील अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट बन गई है। यह उपलब्धि भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जैव विविधता को सुरक्षित रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ग्लाव झील (Glaw Lake) के बारे में
- ग्लाव झील अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित है।
- यह राज्य की पहली ऐसी आर्द्रभूमि है जिसे रामसर साइट का दर्जा मिला है।
- यह झील पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में स्थित एक प्राकृतिक मीठे पानी का जलाशय है और कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आती है।
- ग्लाव झील लगभग 1,168 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों से निकलने वाली सदानीरा जलधाराएं इस झील को जल प्रदान करती हैं। घने वन क्षेत्र से घिरी होने के कारण यहां विविध प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं।
जैव विविधता का केंद्र:
- ग्लाव झील और इसके आसपास का क्षेत्र वनस्पति एवं जीव-जंतुओं की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।
- यहां के जलग्रहण क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियों और 49 ऑर्किड प्रजातियों की पहचान की गई है।
- यह क्षेत्र कई दुर्लभ जलीय एवं स्थलीय प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है।
- झील के पारिस्थितिकी तंत्र में व्हाइट-बेलिड हेरॉन (White-bellied Heron) और क्लाउडेड लेपर्ड (Clouded Leopard) जैसी संकटग्रस्त प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
रामसर कन्वेंशन से संबंधित प्रमुख बिंदु
- रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- इसका उद्देश्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों और उनसे जुड़े संसाधनों की रक्षा करना है।
- इस संधि को वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में स्वीकार किया गया था। यह संधि वर्ष 1975 में लागू हुई।
- यह दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय समझौता था जो विशेष रूप से किसी एक पारिस्थितिकी तंत्र यानी आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर केंद्रित था।
रामसर कन्वेंशन के तीन मुख्य आधार
- अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना।
- किसी देश की सभी आर्द्रभूमियों के समझदारीपूर्ण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना।
- साझा आर्द्रभूमि क्षेत्रों और प्रवासी जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करना।