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वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक

संदर्भ

हाल ही में, भारत सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से यह घोषणा की है कि वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle: V2V) संचार तकनीक को 2026 के अंत तक देशभर में लागू किया जाएगा।

वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक के बारे में

  • V2V एक वायरलेस संचार व्यवस्था है जिसके माध्यम से वाहन किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट पर निर्भर हुए बिना अपने आस-पास चल रहे अन्य वाहनों के साथ सीधे सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
  • इसके तकनीक के माध्यम से वाहन वास्तविक समय में एक-दूसरे से कनेक्ट कर पाते हैं। 

उद्देश्य 

  • अचानक ब्रेक लगने, गति में तेज़ बदलाव या यातायात की स्थिति में परिवर्तन की जानकारी पहले से देकर टक्करों और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना।
  • ब्लाइंड स्पॉट और कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में सुरक्षा बढ़ाना, ताकि चालक उन वाहनों के प्रति सतर्क हो सकें जो दृष्टि से ओझल हों, रुके हुए हों या कोहरे में ढके हों। 

तकनीक की कार्य प्रणाली

  • प्रत्येक वाहन में एक छोटा उपकरण लगाया जाएगा, जो सिम कार्ड जैसा होता है।
  • यह उपकरण वाहन को आसपास के अन्य वाहनों से संकेत भेजने और प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
  • वाहन चलते समय लगातार अपनी स्थिति, गति, दिशा तथा ब्रेक लगाने या तेज़ी बढ़ाने जैसी जानकारियाँ साझा करता रहता है और साथ-साथ आसपास के वाहनों से भी यही सूचनाएँ प्राप्त करता है। 
  • यह संपूर्ण संचार प्रक्रिया दूरसंचार विभाग द्वारा स्वीकृत विशेष रेडियो फ़्रीक्वेंसी बैंड (5.875–5.905 GHz) पर आधारित होती है, इसलिए इसे मोबाइल इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती है।
  • यदि प्रणाली यह पहचानती है कि कोई अन्य वाहन बहुत पास आ रहा है, अचानक ब्रेक लगा रहा है या किसी ब्लाइंड स्पॉट से उभर रहा है तो चालक को तुरंत चेतावनी भेजी जाती है।
  • उन्नत चालक सहायता प्रणालियाँ (Advanced Driver Assistance Systems: ADAS) से युक्त वाहनों में ये चेतावनियाँ वाहन को स्वतः धीमा करने या संभावित खतरे से बचने में भी सहायता कर सकती हैं। 

प्रमुख विशेषताएँ 

  • 360-डिग्री संचार क्षमता: आगे, पीछे और दोनों ओर से आने वाले जोखिमों के बारे में अलर्ट प्राप्त होते हैं।
  • रीयल-टाइम सुरक्षा चेतावनियाँ: यह चल रहे, धीमी गति वाले या स्थिर वाहनों के बारे में जानकारी देता है, यहाँ तक कि उन वाहनों के बारे में भी जो चालक की सीधी दृष्टि में नहीं होते हैं।
  • कम दृश्यता में प्रभावी: घने कोहरे, धूल भरी आंधी या खराब मौसम में राजमार्ग दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक।
  • नेटवर्क-स्वतंत्र प्रणाली: मोबाइल इंटरनेट पर निर्भर नहीं है बल्कि कम दूरी के रेडियो संकेतों से कार्य करती है।
  • ADAS के साथ एकीकरण: उन्नत चालक सहायता प्रणालियों के साथ मिलकर बेहतर ब्रेकिंग और दुर्घटना-निवारण संभव बनाती है। 

सीमाएँ

  • व्यापक रूप से अपनाने की आवश्यकता: इस तकनीक का पूरा लाभ तभी मिलता है जब बड़ी संख्या में वाहन इससे सुसज्जित हों।
  • लागत संबंधी चुनौती: उपकरणों की लागत उपभोक्ताओं पर डाली जाएगी, जिससे वाहनों की कीमत बढ़ सकती है।
  • सीमित दायरा: यह प्रणाली कुछ सौ मीटर की दूरी तक ही प्रभावी रूप से काम करती है; दूरस्थ खतरों के लिए अन्य तकनीकों की आवश्यकता बनी रहती है।
  • पूर्ण स्वायत्तता का अभाव: प्रारंभिक चरण में यह मुख्यतः चेतावनी देने तक सीमित रहेगी, न कि पूर्ण स्वचालित वाहन नियंत्रण पर आधारित होगी।
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