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वासेनार व्यवस्था: निर्यात नियंत्रण में सुधार की आवश्यकता

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

संदर्भ

वासेनार व्यवस्था (Wassenaar Arrangement) एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है, जो पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग (सैन्य और असैन्य) वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के निर्यात को नियंत्रित करती है। हाल के वर्षों में, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल निगरानी प्रौद्योगिकियों, जैसे ‘इंट्रूजन सॉफ्टवेयर’ (Intrusion software), के दुरुपयोग ने इस व्यवस्था की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। 

वासेनार व्यवस्था के बारे में

  • वासेनार व्यवस्था वर्ष 1996 में स्थापित एक स्वैच्छिक बहुपक्षीय समझौता है, जिसका उद्देश्य सामूहिक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के प्रसार को रोकना है। 
  • यह पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों, जैसे चिप्स, हार्डवेयर, और सॉफ्टवेयर, के निर्यात को नियंत्रित करता है। 
  • इसमें भाग लेने वाले देश नियंत्रण सूचियों पर सहमति बनाते हैं और सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं, लेकिन लाइसेंसिंग और कार्यान्वयन राष्ट्रीय सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है।

पृष्ठभूमि

  • स्थापना: वर्ष 1996 में, शीत युद्ध के बाद COCOM (Coordinating Committee for Multilateral Export Controls) के स्थान पर वासेनार व्यवस्था की स्थापना हुई।
  • विस्तार: वर्ष 2013 में, इसमें "इंट्रूजन सॉफ्टवेयर" (नेटवर्क सुरक्षा को भेदने वाले सॉफ्टवेयर) को शामिल किया गया।
  • भारत की भागीदारी: भारत वर्ष 2017 में इस व्यवस्था का 42वां सदस्य बना और इसकी नियंत्रण सूचियों को SCOMET (Special Chemicals, Organisms, Materials, Equipment, and Technologies) ढांचे में शामिल किया।

मुख्य प्रावधान

  • नियंत्रण सूचियां: दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों और हथियारों की सूचियां, जिनके निर्यात पर नियंत्रण।
  • सूचना आदान-प्रदान: सदस्य देश संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर जानकारी साझा करते हैं।
  • स्वैच्छिक प्रकृति: कोई बाध्यकारी नियम नहीं; प्रत्येक देश अपनी राष्ट्रीय नीतियों के आधार पर नियंत्रण लागू करता है।
  • लाइसेंसिंग: निर्यात लाइसेंस राष्ट्रीय कानूनों के आधार पर जारी किए जाते हैं।
  • इंट्रूजन सॉफ्टवेयर: वर्ष 2013 से, निगरानी और साइबर-निगरानी प्रणालियों पर नियंत्रण शामिल।

सदस्य देश

  • वासेनार व्यवस्था में 42 देश शामिल हैं, प्रमुख देश: अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, यूके, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, भारत (2017 से।
  • ध्यान देने योग्य: चीन इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, जो दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REEs) जैसे संवेदनशील संसाधनों के निर्यात प्रतिबंधों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करता है।

आलोचनाएं

  • पुराना ढांचा: व्यवस्था भौतिक निर्यात पर केंद्रित है, जबकि क्लाउड सेवाएं और SaaS मॉडल (जहां सॉफ्टवेयर स्थानीय रूप से इंस्टॉल नहीं होता) को नियंत्रित करना मुश्किल है।
  • सहमति आधारित निर्णय: किसी भी संशोधन को सभी 42 सदस्यों की सहमति चाहिए, जिससे सुधार अवरुद्ध हो जाते हैं।
  • राष्ट्रीय विवेक: नियंत्रणों का कार्यान्वयन देशों की घरेलू नीतियों पर निर्भर करता है, जिससे असमानता और कमियां रहती हैं।
  • क्लाउड सेवाओं की अनदेखी: क्लाउड सेवाओं के रिमोट उपयोग या API कॉल को निर्यात नहीं माना जाता, जिससे निगरानी प्रौद्योगिकियों का दुरुपयोग बढ़ता है।
  • मानवाधिकार जोखिम: डिजिटल निगरानी और बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने में व्यवस्था अक्षम है।

पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता

  • वासेनार व्यवस्था को आधुनिक प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से क्लाउड और AI, के अनुरूप बनाने की जरूरत है। 
  • वर्तमान में यह निगरानी और दमन के लिए दुरुपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पा रही। 
  • भारत जैसे देशों ने वैधता प्राप्त करने पर ध्यान दिया है, लेकिन सुधार की मांग कम की है। व्यवस्था को क्लाउड युग के लिए प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता है।

चुनौतियां

  • सहमति की बाधा: कुछ शक्तिशाली देश, जो निगरानी प्रौद्योगिकियों के निर्यात से लाभ उठाते हैं, सुधारों का विरोध करते हैं।
  • क्लाउड की जटिलता: क्लाउड सेवाओं को नियंत्रण श्रेणियों में मैप करना, हानिकारक और गैर-हानिकारक उपयोग में अंतर करना, और सीमा-पार लाइसेंसिंग लागू करना जटिल है।
  • नवाचार पर प्रभाव: सख्त नियंत्रण नवाचार और निजी उद्योग पर अनावश्यक नियम थोपने के रूप में देखे जा सकते हैं।
  • राष्ट्रीय नीतियों में असमानता: विभिन्न देशों की निर्यात नियंत्रण नीतियां और राजनीतिक इच्छाशक्ति में अंतर।
  • तकनीकी गति: क्लाउड और AI प्रौद्योगिकियां तेजी से विकसित होती हैं, जबकि व्यवस्था की प्रक्रियाएं धीमी हैं।

आगे की राह

  • नियंत्रण सूचियों का विस्तार: बड़े पैमाने पर निगरानी, प्रोफाइलिंग, और सीमा-पार डेटा हस्तांतरण (जैसे बायोमेट्रिक सिस्टम) को नियंत्रण सूची में शामिल करना। 
  • क्लाउड निर्यात की परिभाषा: रिमोट उपयोग, API कॉल, और प्रशासनिक अधिकारों को नियंत्रित प्रौद्योगिकी के निर्यात के समकक्ष मानना।
  • बाध्यकारी ढांचा: स्वैच्छिक प्रकृति के बजाय बाध्यकारी संधि, जिसमें न्यूनतम लाइसेंसिंग मानक, अत्याचार-प्रवण क्षेत्रों में निर्यात पर रोक, और सहकर्मी समीक्षा शामिल हो।
  • सूचना साझाकरण: तकनीकी अंतरसंचालनीयता मानक, ब्लैकलिस्टेड ग्राहकों की साझा सूची, और रीयल-टाइम रेड अलर्ट सिस्टम।
  • डोमेन-विशिष्ट व्यवस्था: AI, डिजिटल निगरानी, और साइबर हथियारों के लिए एक अलग नियंत्रण व्यवस्था, जो समग्र वासेनार व्यवस्था के साथ संरेखित हो लेकिन तेजी से विकसित हो सके।
  • कॉर्पोरेट जवाबदेही: संयुक्त राष्ट्र मार्गदर्शक सिद्धांतों के तहत कॉर्पोरेट मानवाधिकार कर्तव्यों और सार्वजनिक खरीद सीमाओं को लागू करना।
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