संदर्भ
हाल ही में, भारत ने पहली बार वीमर ट्रायंगल (Weimar Triangle) प्रारूप में भागीदारी की है। इस अवसर पर पोलैंड ने रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका द्वारा डाले जा रहे दबाव के विरुद्ध भारत का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया।
वीमर त्रिकोण के बारे में
- स्थापना वर्ष: 1991
- इसका नाम जर्मनी के वीमर (वेइमर) शहर पर रखा गया है जहाँ इन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक आयोजित हुई थी।
- सदस्य देश: फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड
- वीमर त्रिकोण फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के बीच स्थापित एक त्रिपक्षीय राजनीतिक एवं कूटनीतिक मंच है।
- इसकी स्थापना का उद्देश्य यूरोपीय एकीकरण को प्रोत्साहन देना तथा राजनीतिक संवाद और सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ (विशेषकर रूस और पूर्वी यूरोप से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में) करना है।

उद्देश्य
- पश्चिमी एवं मध्य यूरोप की प्रमुख शक्तियों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा व आर्थिक सहयोग को मज़बूत करना
- रूस और क्षेत्रीय संघर्षों जैसी चुनौतियों के प्रति साझा प्रतिक्रिया विकसित कर एकजुट एवं सुरक्षित यूरोप की दिशा में कार्य करना
प्रमुख कार्य और भूमिकाएँ
- यूरोपीय राजनीतिक समन्वय: यूरोपीय संघ की प्रमुख विदेश नीति, सुरक्षा और रक्षा संबंधी मुद्दों पर सदस्य देशों के दृष्टिकोणों में सामंजस्य स्थापित करता है।
- सुरक्षा एवं यूक्रेन नीति: रूस के प्रति संयुक्त प्रतिक्रिया तय करने और यूक्रेन को समर्थन प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है।
- रणनीतिक संवाद का मंच: यूरोपीय संघ और नाटो की महत्वपूर्ण बैठकों से पूर्व शिखर स्तर पर परामर्श की सुविधा देता है।
- सुलह और एकीकरण की प्रक्रिया: इस मंच ने पोलैंड को नाटो (1999) और यूरोपीय संघ (2004) में शामिल कराने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
- त्रिपक्षीय सहयोग का विस्तार: कूटनीति, रक्षा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहलों को बढ़ावा देता है।
महत्व
- यह मंच पश्चिमी यूरोप और मध्य/पूर्वी यूरोप के बीच सेतु के रूप में कार्य करता है।
- रूस, यूक्रेन व व्यापक सुरक्षा मुद्दों पर यूरोपीय संघ के सामूहिक रुख को आकार देने में योगदान देता है।
- भू-राजनीतिक तनाव और संकट की स्थितियों में यूरोपीय एकता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होता है।