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एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) क्या है ?

एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES – Monitoring System for Tigers: Intensive Protection and Ecological Status) एक आईटी-आधारित आधुनिक निगरानी प्रणाली है, जिसका उपयोग भारत में बाघों और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा, निगरानी तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किया जाता है। हाल ही में अनामलाई टाइगर रिज़र्व में बाघों और वन्यजीवों की जनगणना के दौरान वन कर्मियों द्वारा इसी ऐप का उपयोग किया जा रहा है।


एम-स्ट्राइप्स की पृष्ठभूमि

  • एम-स्ट्राइप्स एक सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी प्रणाली है।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में की गई थी।
  • इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से विकसित किया।
  • यह प्रणाली बाघ अभयारण्यों में गश्त, सुरक्षा और संरक्षण को मजबूत बनाती है।

एम-स्ट्राइप्स के प्रमुख उद्देश्य

  • बाघों और अन्य वन्यजीवों की प्रभावी निगरानी
  • संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण
  • वन्यजीव संरक्षण के लिए डेटा-आधारित निर्णय
  • अभयारण्य प्रबंधन की क्षमता और पारदर्शिता बढ़ाना

एम-स्ट्राइप्स प्रणाली के घटक

एम-स्ट्राइप्स में दो प्रमुख भाग होते हैं:

1. केंद्रीय डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर

  • केंद्रीय स्तर पर डेटा संग्रह और विश्लेषण
  • GIS और सांख्यिकीय उपकरणों का उपयोग
  • ऑनलाइन विश्लेषण टूल और एनालिटिकल इंजन

2. एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन

  • वास्तविक समय (Real-time) GPS ट्रैकिंग
  • फील्ड से अवलोकन और रिपोर्टिंग
  • गश्त के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग

उपयोग की जाने वाली तकनीकें

एम-स्ट्राइप्स निम्न आधुनिक तकनीकों पर आधारित है:

  • GPS (Global Positioning System)
  • GPRS (General Packet Radio Service)
  • Remote Sensing
  • GIS (Geographical Information System)

एम-स्ट्राइप्स की कार्यप्रणाली

  • प्रत्येक वन रक्षक अपने बीट क्षेत्र में नियमित गश्त करता है।
  • गश्त के दौरान:
    • GPS के माध्यम से अपने मार्ग और पदचिह्न रिकॉर्ड करता है।
    • वन्यजीवों, शिकार के संकेतों और अवैध गतिविधियों का विवरण दर्ज करता है।
  • यह जानकारी डिजिटल डेटाबेस में संग्रहित होती है।
  • GIS और सांख्यिकीय विश्लेषण से निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
  • इससे बाघ अभ्यारण्य प्रबंधकों को बेहतर योजना और संसाधन प्रबंधन में मदद मिलती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

भारत में वन प्रशासन की सबसे छोटी इकाई “बीट” है, जिसकी जिम्मेदारी सामान्यतः एक वन रक्षक के पास होती है।

अनामलाई टाइगर रिज़र्व : -

भौगोलिक स्थिति

  • यह अनामलाई पहाड़ियों में स्थित है।
  • दक्षिणी पश्चिमी घाट में पालक्कड़ दर्रे के दक्षिण में स्थित है।
  • सीमावर्ती संरक्षित क्षेत्र:
    • पूर्व में – परम्बिकुलम टाइगर रिज़र्व
    • दक्षिण-पश्चिम में – चिन्नार वन्यजीव अभयारण्य
    • एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान

जनजातीय समुदाय

यह क्षेत्र छह स्वदेशी समुदायों द्वारा आबाद है:

  • कादर,मुदुवर,मालासर,मलाई मालासर,एरावलर और पुलयार

वनस्पति (Flora)

यहाँ विभिन्न प्रकार के वन पाए जाते हैं:

  • आर्द्र सदाबहार वन,अर्ध-सदाबहार वन,नम पर्णपाती वन,शुष्क पर्णपाती वन,शुष्क कांटेदार वन और शोला वन । 

अन्य विशिष्ट आवास:

  • पर्वतीय घास के मैदान,सवाना,दलदली घास के मैदान

यह क्षेत्र कृषि फसलों के जंगली रिश्तेदारों से भी समृद्ध है:

  • आम, कटहल, जंगली केला
  • अदरक, हल्दी
  • काली मिर्च, इलायची

जीव-जंतु (Fauna)

अनामलाई टाइगर रिज़र्व के प्रमुख वन्यजीव:

  • बाघ,एशियाई हाथी,तेंदुआ,सांभर,चित्तीदार हिरण,भौंकने वाला हिरण,सियार और जंगली बिल्ली
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