New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) क्या है?

  • हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट में वायदा (Futures) और विकल्प (Options) दोनों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax - STT) को 150% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। 
  • इस प्रस्ताव ने शेयर बाजार, विशेष रूप से डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच बहस को जन्म दिया है। 
  • ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण हो जाता है कि STT क्या है, यह कैसे काम करता है और इसका प्रभाव क्या होगा।

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) क्या है ?

  • प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) एक प्रत्यक्ष कर है, जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है। 
  • यह कर केंद्र सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाता है।

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स STT की प्रमुख विशेषताएँ:

  • लेन-देन आधारित कर: STT सीधे लेन-देन के मूल्य पर लगाया जाता है, न कि लाभ या हानि पर। यानी चाहे ट्रेडर को मुनाफा हो या नुकसान, STT देना ही पड़ेगा।
  • TDS की तरह कार्य करता है: यह कर स्रोत पर कटौती (TDS) के समान कार्य करता है, क्योंकि इसे लेनदेन के समय ही काट लिया जाता है।
  • मध्यस्थों के माध्यम से संग्रह: यह कर सीधे स्टॉक एक्सचेंजों या ब्रोकर जैसे मध्यस्थों के माध्यम से सरकार को जमा किया जाता है।
  • कानूनी आधार: STT को वित्त अधिनियम, 2004 के तहत पेश किया गया था। यह कर प्रतिभूति लेनदेन कर अधिनियम (STT Act) द्वारा शासित है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध है कि किन लेनदेनों पर STT लागू होगा।

किन प्रतिभूतियों पर STT लागू होता है ?

STT निम्नलिखित पर लागू होता है:

  • इक्विटी शेयर (Equity Shares)
  • डेरिवेटिव्स (Futures & Options)
  • इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड यूनिट्स
  • IPO के तहत बेचे गए गैर-सूचीबद्ध शेयर, यदि वे बाद में स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो जाते हैं।

किन पर STT लागू नहीं होता ?

  • ऑफ-मार्केट लेनदेन
  • वस्तु (Commodity) ट्रेडिंग
  • मुद्रा (Currency) ट्रेडिंग

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) दरें और सरकार का अधिकार

  • विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों के लिए अलग-अलग STT दरें निर्धारित हैं।
  • सरकार को समय-समय पर इन दरों में संशोधन करने का अधिकार है।
  • हालिया प्रस्ताव में Futures और Options पर STT में 150% की वृद्धि का सुझाव दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो सकती है।

वायदा और विकल्प (Futures और Options) ट्रेडिंग क्या है ?

  • STT वृद्धि को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि Futures और Options क्या होते हैं।

डेरिवेटिव्स क्या हैं ?

डेरिवेटिव्स वे वित्तीय अनुबंध होते हैं जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति (Underlying Asset) से जुड़ा होता है, जैसे:

  • शेयर
  • शेयर बाजार सूचकांक (Nifty, Sensex)
  • कमोडिटी
  • ETF

इनका उपयोग मुख्य रूप से तीन उद्देश्यों के लिए किया जाता है:

  1. सट्टेबाजी (Speculation)
  2. जोखिम से बचाव (Hedging)
  3. बाजार में एक्सपोजर बढ़ाना (Leverage)

वायदा अनुबंध (Futures) 

  • यह एक कानूनी अनुबंध है जिसमें खरीदार और विक्रेता एक निश्चित तारीख पर पहले से तय कीमत पर किसी संपत्ति का लेन-देन करने के लिए बाध्य होते हैं।
  • खरीदार को संपत्ति खरीदनी ही होगी।
  • विक्रेता को संपत्ति बेचनी ही होगी।

अर्थात्, Futures में दोनों पक्षों पर दायित्व (Obligation) होता है।

विकल्प अनुबंध (Options)

Options में स्थिति अलग होती है:

  • खरीदार के पास अधिकार (Right) होता है, लेकिन बाध्यता नहीं कि वह तय कीमत पर संपत्ति खरीदे या बेचे।
  • लेकिन यदि खरीदार विकल्प का प्रयोग करता है, तो विक्रेता को अनुबंध का पालन करना पड़ता है।

अर्थात्, Options में खरीदार के पास चुनाव होता है, लेकिन विक्रेता बाध्य होता है।

STT वृद्धि का संभावित प्रभाव

अगर Futures और Options पर STT 150% बढ़ता है, तो इसके प्रभाव हो सकते हैं:

सकारात्मक प्रभाव:

  • अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश
  • बाजार में स्थिरता बढ़ सकती है
  • सरकार के राजस्व में वृद्धि

नकारात्मक प्रभाव:

  • छोटे ट्रेडर्स पर बोझ बढ़ेगा
  • डेरिवेटिव मार्केट में तरलता (Liquidity) कम हो सकती है
  • हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR