
- एक्सपोजोम (Exposome) एक उभरती हुई वैज्ञानिक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के जीवनकाल में सभी पर्यावरणीय जोखिमों (exposures) का समग्र अध्ययन करती है।
- यह जीनोम (genome) की अवधारणा का पूरक है, जहां जीनोम आनुवंशिक कारकों पर केंद्रित है, वहीं एक्सपोजोम पर्यावरणीय और गैर-आनुवंशिक कारकों पर।
- एक्सपोजोम को किसी व्यक्ति के गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक के सभी जोखिमों के माप के रूप में परिभाषित किया जाता है, और ये जोखिम स्वास्थ्य से कैसे संबंधित हैं।
- इंटरनेशनल ह्यूमन एक्सपोजोम नेटवर्क (IHEN) इसे "सभी भौतिक, रासायनिक, जैविक और मनोसामाजिक कारकों तथा उनकी अंतःक्रियाओं के एकीकृत संकलन" के रूप में परिभाषित करता है।
- यह अवधारणा 2005 में क्रिस्टोफर वाइल्ड द्वारा प्रस्तावित की गई थी, और अब यह वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
एक्सपोजोम के घटक
एक्सपोजोम को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
- बाहरी जोखिम (External Exposures):
- पर्यावरणीय कारक: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मिट्टी में रसायन, विकिरण, शोर प्रदूषण आदि।
- रासायनिक जोखिम: कीटनाशक, प्लास्टिक के रसायन (जैसे BPA), भारी धातुएं (सीसा, पारा) और औद्योगिक उत्सर्जन।
- जैविक कारक: बैक्टीरिया, वायरस, परागकण और अन्य माइक्रोबायोलॉजिकल एजेंट।
- मनोसामाजिक कारक: तनाव, सामाजिक असमानता, शहरीकरण और कार्यस्थल का दबाव।
- आंतरिक जोखिम (Internal Exposures):
- चयापचय (metabolism): शरीर की आंतरिक प्रक्रियाएं जो जोखिमों को प्रभावित करती हैं।
- माइक्रोबायोम: आंत के बैक्टीरिया जो पोषण और प्रतिरक्षा को प्रभावित करते हैं।
- जीवनशैली कारक: आहार, व्यायाम, धूम्रपान और शराब का सेवन।
ये जोखिम जीवन भर संचित होते हैं और जीन के साथ अंतर्क्रिया करके रोगों की संवेदनशीलता निर्धारित करते हैं।
उदाहरण के लिए, वायु प्रदूषण से फेफड़ों की बीमारियां बढ़ सकती हैं, जबकि तनाव हृदय रोगों को ट्रिगर कर सकता है।
एक्सपोजोम का महत्व और बीमारियों से संबंध
अधिकांश बीमारियां (लगभग 70-80%) पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होती हैं, जबकि आनुवंशिक कारक केवल 20-30% भूमिका निभाते हैं। एक्सपोजोम इस अंतर को भरता है। यह गैर-संचारी रोगों (जैसे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य विकार) के कारणों को समझने में मदद करता है।
उदाहरण:
- पर्यावरणीय प्रभाव: दिल्ली जैसे शहरों में PM2.5 प्रदूषण से श्वसन रोग बढ़ते हैं।
- जीवनकाल प्रभाव: बचपन में सीसे के संपर्क से वयस्कता में संज्ञानात्मक हानि हो सकती है।
- सामाजिक प्रभाव: गरीबी और असमानता से जुड़े जोखिम दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव पैदा करते हैं।
एक्सपोजोम स्वास्थ्य नीतियों को व्यक्तिगत化 करने में सहायक है, जैसे कि व्यक्तिगत सेंसर या ऐप्स से जोखिमों की निगरानी।
एक्सपोजोमिक्स: अध्ययन की विधियां
एक्सपोजोमिक्स एक्सपोजोम का वैज्ञानिक अध्ययन है, जो आंतरिक और बाहरी मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
- आंतरिक मूल्यांकन: जीनोमिक्स, मेटाबोलॉमिक्स, लिपिडोमिक्स, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और प्रोटिओमिक्स का उपयोग। ये बायोमार्कर (biomarkers) की पहचान करते हैं जो जोखिमों के प्रभाव को दिखाते हैं। बड़ी डेटा सेट से सांख्यिकीय संबंध निकाले जाते हैं।
- बाहरी मूल्यांकन: प्रत्यक्ष मापन उपकरण (सेंसर), प्रयोगशाला विश्लेषण और सर्वेक्षण। उदाहरण: वेयरेबल डिवाइस से वायु गुणवत्ता मापना।
एक्सपोजोमिक्स AI और बिग डेटा का उपयोग करके जटिल अंतर्क्रियाओं को मैप करता है।
वैश्विक प्रयास: ह्यूमन एक्सपोजोम प्रोजेक्ट
वैज्ञानिकों ने "ह्यूमन एक्सपोजोम" का मानचित्रण करने के लिए महत्वाकांक्षी वैश्विक प्रयास शुरू किए हैं। मुख्य पहलें:-
- इंटरनेशनल ह्यूमन एक्सपोजोम नेटवर्क (IHEN): 2023 में स्थापित, यह यूरोपीय ह्यूमन एक्सपोजोम नेटवर्क (EHEN) पर आधारित है। IHEN एक्सपोजोम को वैश्विक स्तर पर समन्वयित करता है, जिसमें 106 मिलियन यूरो का निवेश शामिल है।
- ह्यूमन एक्सपोजोम प्रोजेक्ट (HEP): ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की तरह, यह जीवन भर के जोखिमों को मैप करने का लक्ष्य रखता है। AI और उन्नत डेटा टूल्स से संचालित, यह चिकित्सा को जेनेटिक्स से आगे ले जाता है।
- यूरोपीय प्रयास: EHEN (2020-2025) ने 9 परियोजनाओं के माध्यम से शहरीकरण, कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस किया। EIRENE (2021) एक पैन-यूरोपीय इंफ्रास्ट्रक्चर है।
ये प्रयास रोग रोकथाम, व्यक्तिगत चिकित्सा और नीति निर्माण में क्रांति ला सकते हैं।
भारत के संदर्भ में एक्सपोजोम
भारत, जहां पर्यावरणीय रोग बोझ वैश्विक स्तर पर 25% है, एक्सपोजोमिक्स से लाभान्वित हो सकता है। यहां प्रदूषण (वायु, जल), रसायनिक जोखिम और NCDs (जैसे 3 मिलियन मौतें OEH से) प्रमुख हैं।
- रिसर्च प्रयास: भारत में एक्सपोजोमिक्स उभर रहा है, जैसे कि प्रदूषण मैपिंग और स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इसे एकीकृत करने से पर्यावरणीय जोखिमों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
चुनौतियां: डेटा संग्रह की जटिलता, गोपनीयता मुद्दे और संसाधन की कमी।
चुनौतियां और भविष्य की दिशा
- चुनौतियां: पूर्ण एक्सपोजोम मैपिंग असंभव जैसी लगती है, लेकिन आंशिक डेटासेट से लाभ। नैतिक मुद्दे जैसे डेटा गोपनीयता और समानता।
- भविष्य: वेयरेबल टेक्नोलॉजी, AI और वैश्विक सहयोग से एक्सपोजोम चिकित्सा को बदल सकता है। भारत में इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में शामिल करें।