युवा परिवर्तन राजदूत पहल 

संदर्भ

  • तमिलनाडु के त्रिची ज़िले में स्थित एक सरकारी स्कूल ने बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्व की भावना को केवल याद कराने के बजाय दैनिक व्यवहार और अनुभव के माध्यम से विकसित करने की दिशा में एक अभिनव पहल शुरू की है। इस पहल को “यंग एम्बेसडर ऑफ चेंज” नाम दिया गया है, जो मूल्य-आधारित शिक्षा को व्यवहारिक रूप देने का प्रयास है। 

यंग एम्बेसडर ऑफ चेंज पहल के बारे में

  • सरकारी आदि द्रविड़ प्राथमिक विद्यालय, कट्टूर में शुरू की गई यह एक विद्यालय-आधारित मूल्य शिक्षा पहल है। 
  • इसका उद्देश्य बच्चों में मूल नैतिक और नागरिक मूल्यों को अनुभवात्मक सीख और समुदाय से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से विकसित करना है, ताकि मूल्य केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के व्यवहार का हिस्सा बनें।

प्रमुख विशेषताएँ

  • मूल्य-केंद्रित शिक्षण: इस पहल में ईमानदारी, करुणा, सम्मान, जिम्मेदारी, धैर्य, अनुशासन और कृतज्ञता जैसे मूल्यों पर विशेष जोर दिया जाता है।
  • कहानी और आत्मचिंतन की भूमिका: सुबह की प्रार्थना सभाओं में नैतिक मूल्यों से जुड़ी कहानियाँ सुनाई जाती हैं, जिनके बाद प्रार्थना और विचार-विमर्श के माध्यम से बच्चों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • व्यवहार-आधारित दृष्टिकोण: बच्चों को विद्यालय और घर दोनों स्थानों पर छोटे-छोटे दैनिक कार्यों के माध्यम से सीखे गए मूल्यों को व्यवहार में उतारने के अवसर दिए जाते हैं।
  • अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी: मूल्यों को घर तक विस्तारित करने के लिए अभिभावकों को व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से जोड़ा जाता है, जिससे विद्यालय और परिवार के बीच सतत संवाद बना रहे।
  • समावेशी सहभागिता: सभी विद्यार्थियों को समान अवसर देने के लिए बच्चों को हर 15 दिनों में समूहों (बैचों) में बारी-बारी से शामिल किया जाता है।
  • बिना अंक आधारित मूल्यांकन: इस कार्यक्रम में न तो अंक दिए जाते हैं और न ही रजिस्टर बनाए जाते हैं। शिक्षक बच्चों के व्यवहार, सकारात्मक बदलाव और सहभागिता के आधार पर अवलोकन और प्रोत्साहन के जरिए मूल्यांकन करते हैं।
  • प्रेरक वातावरण का निर्माण: विद्यालय और घर में चरित्र बैज, मूल्य-संदेशों वाली दीवारें और उद्धरण बच्चों को निरंतर प्रेरित करते हैं। 

पहल का महत्व

  • यह कार्यक्रम विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर संज्ञानात्मक सीख के साथ-साथ चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देता है।
  • नैतिक शिक्षा के क्षेत्र में यह विद्यालय–परिवार–समुदाय के बीच संबंधों को सुदृढ़ करता है।
  • यह मॉडल दर्शाता है कि यदि शिक्षा को जीवन से जोड़ा जाए, तो मूल्य केवल सिखाए नहीं जाते, बल्कि स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। 
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