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क्रिस्पर तकनीक : प्रक्रिया एवं महत्त्व

  • 16th October, 2020

चर्चा में क्यों?

  • वर्ष 2020 में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में जीन-एडिटिंग तकनीक के लिये फ्रांस की इमैनुएल चार्पेंटियर और अमेरिका की जेनिफर डौडना को नोबेल पुरूस्कार प्रदान किया गया है। यह पहली बार है जब किसी वर्ग में दो महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से नोबेल पुरस्कार दिया गया है। जीन-एडिटिंग तकनीक को क्रिस्पर कैस-9 डी.एन.ए. "कैंची" टूल के रूप में भी जाना जाता है।

क्रिस्पर तकनीक क्या है?

  • क्रिस्पर कैस-9 तकनीक (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats’ and ‘CRISPR-associated protein 9’) जीन एडिटिंग की वह तकनीक है, जिसका उपयोग किसी जीव के जीनों में परिवर्तन करने या उसके अनुवांशिक गठन में फेर-बदल करने में किया जा सकता है। इसकी खोज वर्ष 2012 में की गई थी। जीनोम एडिटिंग या जीन एडिटिंग तकनीक जीनोम में लक्षित स्थानों पर अनुवांशिक सामग्री को जोड़ने, हटाने या बदलने की अनुमति देती है।
  • क्रिस्पर तकनीक में कैस-9 जीन या अनुवांशिक कैंची के द्वारा विशेष तरीके से तैयार किये गए अणु ख़राब डी.एन.ए. स्ट्रैंड को खोज लेते हैं तथा एंजाइम की सहायता से लक्षित डी.एन.ए. स्ट्रैंड को काट दिया जाता है। अतः आनुवंशिक रूप से मिलने वाले बीमारी से ग्रसित जीन को काटकर अलग करके रोग मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।
  • डी.एन.ए. सिरा के जिस विशिष्ट भाग को काटा या हटाया जाता है उसमें प्राकृतिक रूप से पुनर्निर्माण, मरम्मत, या बनने की प्रवृत्ति होती है। क्रिस्पर कैस-9 प्रणाली अन्य मौजूदा जीनोम सम्पादन विधियों की तुलना में तेज़, सस्ता, अधिक सटीक और कुशल है।
  • विदित है कि स्ट्रेप्टोकॉक्कस प्योजेंस (Streptococcus Pyogenes) ( एक प्रकार का बैक्टीरिया, जो मनुष्यों के लिये सबसे अधिक नुकसान का कारण बनता है) का अध्ययन करते हुए, एमैनुएल चार्पेंटियर ने एक अज्ञात अणु ट्रांस-एक्टिवेटिंग क्रिस्पर आर.एन.ए. (TracrRNA) की खोज की थी, जिसे वर्ष 2011 में प्रकाशित किया गया था। ये ‘TracrRNA’ बैक्टीरिया की प्राचीन प्रतिरक्षा प्रणाली क्रिस्पर- कैस 9 का हिस्सा था, जो अपने डी.एन.ए. को विघटित करके वायरस को निष्क्रिय कर देता था।

क्रिस्पर तकनीक से होने वाले लाभ

  • कैंसर ग्रस्त जीन को काटकर उसके स्थान पर स्वस्थ जीन को प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जिससे यह प्रौद्योगिकी कैंसर उपचार के लिये भी महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। (चीन में पहली बार फेंफडों के कैंसर का इलाज करने के लिये जीन एडिटिंग तकनीक का प्रयोग किया गया।)
  • क्रिस्पर कैस- 9 को एच.आई.वी, कैंसर, सिकल सेल एनीमिया आदि रोगों के निदान हेतु कारगर उपाय के रूप में देखा जा रहा है। मलेरिया को दूर करने के लिये भी जीन एडिटिंग का उपयोग किया गया है। यह तकनीक प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
  • क्रिस्पर कैस-9 का उपयोग कर जानवरों, पौधों और सूक्ष्मजीवों के डी.एन.ए. को बेहद सटीक रूप से परिवर्तित किया जा सकता है। इस तकनीक ने पहले से ही फसल उत्पादन को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे सूखे की स्थिति से निपटने हेतु तथा कीटों का सामना करने के लिये फसलों के आनुवंशिक कोड को बदला गया है।
  • हाल ही में, चीन ने जीन एडिटिंग का प्रयोग एच.आई.वी. संक्रमित जीन तथा भ्रूण में जीन को संशोधित करने में किया, जिसने अंतर्राष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया है। वैज्ञानिक एवं नैतिक दृष्टि से इसे उचित नहीं माना जा सकता क्योंकि इस तकनीक का प्रयोग केवल गम्भीर बीमारियों के निदान के लिये किया जा सकता है।
  • हालाँकि एच.आई.वी. एक गम्भीर बीमारी है लेकिन इसके वायरस को औषधियों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जीन एडिटिंग द्वारा एच.आई.वी. संक्रमण को पूरे तरीके से खत्म किया जा सकता है परन्तु इस प्रकार की जीन एडिटिंग के निश्चित तौर पर कुछ हानिकारक परिणाम भी होंगे, जिनसे निपटने के लिये अभी हमारे पास कोई तकनीक उपलब्ध नहीं है।
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