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बाल तस्करी में तीव्र वृद्धि : कारण तथा वर्तमान उपाय

  • 16th October, 2020

(प्रारंभिक परीक्षा : सामाजिक विकास– अधिकार सम्बंधी मुद्दे, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र– 2 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसँख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य निष्पादन; इन अति सम्वेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान तथा निकाय)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, राष्ट्रीय चाइल्डलाइन 1098 द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकडों के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौर में बाल तस्करी (Child Traficcking) में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु

  • महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के चलते प्रवासी श्रमिकों के लिये रोज़गार का संकट उत्पन्न हो जाने से अवैध श्रम, जबरन विवाह और बाल तस्करी जैसी प्रवृतियों में वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2020 में मार्च और अगस्त माह के मध्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा स्थापित हेल्पलाइन की सहायता से इस तरह के 1.92 लाख मामलों में हस्तक्षेप किया गया। पिछले वर्ष समान अवधि में इन मामलों की संख्या 1.70 लाख थी।
  • अप्रैल से अगस्त के मध्य चाइल्डलाइन के अधिकारीयों द्वारा बाल विवाह के 10,000 से अधिक मामलों को ट्रैक किया गया।
  • कमज़ोर सहायता प्रणाली के कारण अपराधियों द्वारा बच्चों तथा युवाओं की भावनात्मक अस्थिरता (Emotional Instability) का फ़ायदा उठाकर उन्हें बरगलाया जाता है तथा तस्करी के पश्चात् पीड़ित पर कई प्रकार के अनुचित कार्यों जैसे वेश्यावृत्ति, मज़दूरी, भीख मंगवाना और विवाह आदि के लिए जबरन दबाव बनाया जाता है।
  • सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक राज्य में कम से कम 50% जिलों में मानव तस्करी रोधी इकाइयाँ होना अनिवार्य है लेकिन यूपी और महाराष्ट्र सहित कई प्रमुख राज्यों में इनकी संख्या बहुत कम है।
  • प्रशासन के समक्ष आए बाल अपराधों के अधिकांश मामले तस्करी, बाल विवाह, भावनात्मक शोषण, यौन शोषण, भीख मंगवाने तथा साइबर अपराध से सम्बंधित हैं।

बच्चों का अवैध व्यापार

  • यूनिसेफ के अनुसार, अगर कोई 18 वर्ष से कम आयु के किसी बालक या बालिका को बहला फुसलाकर या फिर उसकी इच्छा के विरूद्ध शोषण के इरादे से अगवा करता है, तो यह गतिविधि बच्चों के अवैध व्यापार के अंतर्गत आएगी। जबरन शादी, वेश्यावृत्ति, भीख मंगवाने, मज़दूरी, अंग व्यापार और कभी-कभी तो आतंकी गतिविधियों के उद्देश्य से बालक- बालिकाओं की तस्करी की जाती है।

कारण

  • भारत में बाल तस्करी के मूल कारण गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा तथा बेरोज़गारी हैं। सयुंक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) के अनुसार भारत में बेरोज़गारी की दर बहुत अधिक है और इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है।
  • गरीबी से बाहर निकलने या कर्ज़ चुकाने के लिये कुछ माता-पिता अपने बच्चों को तस्करों को बेचने पर मज़बूर हो जाते हैं।
  • भारत के पर्यटन क्षेत्र में वेश्यावृत्ति या देह-व्यापार जैसी अनैतिक मांगों में उच्च वृद्धि के कारण मानव तस्करी में अत्यधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चुनौतियाँ

  • बचाव दलों (Rescue Units) द्वारा समय रहते हस्तक्षेप ना किया जाना एक प्रमुख समस्या है।
  • पुनर्वास (rehabilitation) की उचित सुविधा का अभाव, जिससे आत्महत्या तथा अवसाद जैसी प्रवृतियों में वृद्धि होती है।
  • तस्कर विरोधी कार्यकर्ताओं (anti trafficking activist) के प्रति बढ़ते अपराध।
  • अंध विश्वास तथा पुराने रीति रिवाज़ (धार्मिक या समूह आधारित) भी बच्चों के प्रति अपराध में वृद्धि की मुख्य वजह हैं।
  • एकीकृत निगरानी प्रणाली का अभाव।

बाल तस्करी रोकथाम हेतु प्रावधान

  • संविधान के अनुच्छेद 23(1) के अनुसार मानव या व्यक्तियों का अवैध व्यापार प्रतिबंधित है।
  • अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम, 1956 वाणिज्यिक शोषण हेतु अवैध व्यापार की रोकथाम से सम्बंधित प्रमुख विधान है।
  • बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986
  • मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994
  • बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
  • बाल संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो अधिनियम, 2012) बच्चों को यौन अपराधों और यौन शोषण से बचाने के लिये एक विशेष कानून है। इसमें साधारण और गहन उत्पीड़न सहित यौन दुर्व्यवहार के विभिन्न रूपों की सटीक और स्पष्ट परिभाषाएँ दी गई हैं।
  • आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 के तहत भारतीय दण्ड सहिंता की धारा 370 में संशोधन कर मानव तस्करी के खतरे के प्रतिकार हेतु व्यापक प्रावधान किये गए हैं, जैसे किसी भी रूप में बच्चों के यौन शोषण, गुलामी, दासता या अंगों का व्यापार आदि।
  • राज्य सरकारों द्वारा भी इस मुद्दे से निपटने हेतु विशिष्ट कानून बनाए गए हैं, जैसे पंजाब मानव तस्करी रोकथाम अधिनियम, 2012।

बाल तस्करी रोकथाम हेतु वर्तमान प्रयास

  • चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन (CIF) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की नोडल एजेंसी है। जो एक मूल संस्थान के रूप में चाइल्डलाइन 1098 के माध्यम से बाल समस्याओं (बाल श्रम, दुर्व्यवहार तथा हिंसा, यौन शोषण तथा बच्चों का अवैध व्यापार, लापता, भागे हुए बच्चे, बाल स्वास्थ्य, बुरी लत, शिक्षा सम्बंधी, बाल विवाह, कानूनी लड़ाई और बेघर) पर हस्तक्षेप करके सहायता और समाधान उपलब्ध करवाती है।
  • भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा मानव तस्करी की रोकथाम हेतु सुझाव और दिशा-निर्देश देने हेतु www.stophumantrafficcking-mha.nic.in वेब पोर्टल की शुरुआत की गई है।
  • निचली अदालतों द्वारा मानव तस्करी के मुद्दे पर जागरूक करने हेतु न्यायिक संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है, जिसका उद्देश्य तस्करी से पीड़ितों के लिये त्वरित अदालती प्रक्रिया सुनिश्चित कराना है।
  • भारत ने अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पर सयुंक्त राष्ट्र सम्मेलन (यू.एन.सी.टी.ओ.सी.) की पुष्टि की है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम हेतु प्रोटोकाल तथा महिलाओं और बच्चों के अवैध व्यापार की सज़ा शामिल है।
  • भारत ने वेश्यावृत्ति की रोकथाम हेतु महिलाओं और बच्चों के अवैध व्यापार को रोकने की बात सार्क सम्मलेनों में भी दोहराई है।
  • भारत और बांग्लादेश के मध्य महिलाओं तथा बच्चों में मानव तस्करी की रोकथाम, बचाव करने, पुनः प्राप्ति, प्रत्यावर्तन और अवैध व्यापार के पीड़ितों के पुनः एकीकरण हेतु द्विपक्षीय सहयोग के लिये एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए हैं।
  • गर्ल्स नॉट ब्राइड्स (Girls Not Brides) पहल 1400 सिविल सोसाइटी संगठनों की एक वैश्विक भागीदारी है, जो बाल विवाह को पूर्ण रूप से समाप्त करने हेतु प्रतिबद्ध है। भारत भी इसका भागीदार देश है।

निष्कर्ष

  • भारत में बाल अपराध तथा मानव तस्करी को बढ़ावा देने वाली पारम्परिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को समाप्त कर बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे सजग करने के साथ ही एक मज़बूत निगरानी तंत्र और त्वरित कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है।
  • आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था के खुलने से उद्योगों में श्रम की माँग में वृद्धि होगी। श्रम की बढ़ती माँग और बेरोज़गारी की विकट समस्याओं के चलते बाल और श्रमिक शोषण में वृद्धि होने की सम्भावना है, जिसके लिये पूर्व उपाय किये जाने आवश्यक हैं।

प्री फैक्ट्स

  • कोई भी बालक/ बालिका या कोई वयस्क किसी अप्रिय स्थिति में चाइल्डलाइन की हेल्पलाइन नम्बर 1098 पर कॉल कर सकता है। यह सेवा 24 घंटे (दिन-रात) उपलब्ध है। कॉल प्राप्त होने पर 60 मिनट में सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
  • चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन (CIF) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की नोडल एजेंसी है।
  • भारत ने अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पर सयुंक्त राष्ट्र सम्मेलन (यू.एन.सी.टी.ओ.सी.) की पुष्टि की है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार पिछले दशक में युवा लड़कियों (18 वर्ष से कम आयु) की तस्करी में 14 गुना वृद्धि हुई है।
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