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बिहार में यूरोपीय कंपनियों का आगमन

बिहार मुगल साम्राज्य के शासनकाल में एक महत्वपूर्ण सूबा था ,यहाँ से शोरा का व्यापार होता था फलतः पटना मुगल साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा नगर एवं उत्तर भारत का सबसे बड़ा एवं महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र था  । बिहार में सर्वप्रथम 17वीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारियों का आगमन हुआ , जिसमे बिहार में सर्वप्रथम पुर्तगाली व्यापारियों का आगमन हुआ

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन क्रम:- 

पुर्तगाली> डच >अंग्रेज> >डेन>फ्रांसीसी

पुर्तगालियों का भारत आगमन 1498 में हुआ था: 

  • पुर्तगाल के वास्को डी गामा ने 17 मई, 1498 को भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट बंदरगाह पर पहुंचकर भारत के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज की थी । पुर्तगालियों का व्यापारिक केन्द्र हुगली (वर्तमान पश्चिम बंगाल में) था  जहाँ से उनका पटना आवागमन होता था । 
  • पुर्तगीज व्यापारी अपने साथ मसाला, चीनी मिट्टी के बर्तन इत्यादि लेकर आते तथा पटना से सूती वस्त्र ले जाते थे । 

डच कंपनी

  • भारत में डचों का आगमन 1596 में हुआ था, डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1602 में हुई थी। 
  • बिहार में डच कंपनी की प्रथम फैक्ट्री की स्थापना 1632 ई. में हुई थी ,डच व्यापारी बिहार से शोरा, सूती वस्त्र तथा अनाज ले जाते थे । 
  • प्रारंभ में बिहार के शोरा व्यापार पर डच व्यापारियों का एकाधिकार था
  • भारत में आँग्ल-डच युद्ध में बेदरा के युद्ध, 1759 ई. (हुगली के निकट) में अंग्रेज़ों ने डचों को पराजित कर दिया । 
  • डचों की हार हुई एवं उनका ध्यान मलय द्वीप समूहों, इंडोनेशिया के स्पाइस द्वीप समूहों की ओर स्थानांतरित हो गया इस पराजय से भारत में डच की  शक्ति समाप्त हुई । 

ब्रिटिश कंपनी                          

  • 1600 में स्थापित, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापारिक उद्देश्यों के लिए भारत में प्रवेश किया
  •  1608 में, कैप्टन विलियम हॉकिन्स ने सूरत में पहली EIC फैक्ट्री स्थापित की।
  • डच व्यापारियों के पश्चात बिहार में ब्रिटिश कंपनी का आगमन हुआ । 
  • अंग्रेजों ने 1620 ई. में बिहार में पटना के आलमगंज में सर्वप्रथम अपनीं व्यापारिक केन्द्र स्थापित करने का प्रयास किया था । प्रारम्भिक काल में अंग्रेजों की रूचि सूती वस्त्र, अनाज तथा शोरे की प्राप्ति में थी किन्तु बाद में उनका आकर्षण नील के उत्पादन हेतु बढ़ा। 
  • अंग्रेजों को  फैक्ट्री खोलने में वास्तविक सफलता 1651 ई. में मिली ,अंग्रेजों ने पटना में अपनी फैक्ट्री (1651 ई.) मुगल शासक शाहजहाँ के शासन काल में स्थापित की थी । 
  • वर्ष 1664 ई. में जॉब चॉरनाक को पटना फैक्ट्री का प्रधान बनाया तत्कालीन बिहार के सूबेदार शाईस्ता खाँ ने 1680 ई० में अंग्रेजी कंपनी के व्यापार पर 3.5 प्रतिशत कर लगा दिया । इससे नाराज होकर जॉब चर्नाक ने हुगली शहर को वर्ष 1686 में लूट लिया। वर्ष 1717 में दोनों पक्षों में समझौता हो जाने के कारण फर्रुखशियर द्वारा पुनः अंग्रेजों को इस क्षेत्र में व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी ।  
  • 1717 फर्रुखशियर का फरमान जिसे अंग्रेजों का मैगनाकार्टा कहा जाता है  । 
  • इस दौरान कंपनी ने व्यापार में घूसखोरी की प्रथा को प्रारंभ किया। 

डेनिश कंपनी(डेनमार्क)

  • डेन या डेनिशों का भारत में आगमन 1616 में हुआ था  और डेनिस ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1616 और 1620 के बीच हुई थी 
  • बिहार में डेन फैक्ट्री पटना में 1774 में स्थापित की गई थी। 
  • डेन कंपनी बिहार से सूती वस्त्र का व्यापार करती थी बाद में डेनिश कंपनी अपने सभी व्यापारिक केंद्र अंग्रेजों को बेच दिया

फ्रांसीसी

  • 1664 में, लुई XIV के शासनकाल में जीन-बैप्टिस्ट कोलबर्ट ने फ़्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की ,1667 में, फ़्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में अपना पहला कारखाना स्थापित किया . 1692 में, बंगाल के मुगल गवर्नर नवाब शाइस्ता खान की अनुमति से चंद्रनगर में फैक्ट्री की  स्थापना की गई । 

प्रभाव 

  • यूरोपीय कंपनियों का भारत में आगमन तो व्यापारिक उद्देश्यों के संदर्भ में हुआ था ,किन्तु भारत आगमन के पश्चात उनकी महात्वाकांक्षाओं में वृद्धि हुई तथा वे राजनीतिक सत्ता की प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील हो गए । प्लासी का युद्ध (1757 ई०) राजनीतिक सत्ता की प्राप्ति हेतु अंग्रेजों के लिए बुनियाद सिद्ध हुआ  इसमें अंग्रेजों ने सिराजुद्दौला को पराजित किया । 
  • बक्सर (1764 ई०) के युद्ध के पश्चात जब अंग्रेजों की  हेक्टर मुनरो के नेतृत्व वाली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने भारत के तीन शासकों की शाह आलम द्वितीय (मुगल सम्राट), शुजा-उद-दौला (अवध के नवाब) और मीर कासिम (बंगाल के नवाब)  सम्मिलित सेना को एक साथ पराजित कर दिया । 
  • कंपनी का प्रतिनिधित्व करने वाले रॉबर्ट क्लाइव ने शुजा-उद-दौला और शाह आलम-द्वितीय के साथ इलाहाबाद की संधि(1765 ई ) हुई । तत्पश्चात बंगाल,बिहार पर अंग्रेजों का नियंत्रण बढ़ा । 

सकारात्मक प्रभाव 

  • यूरोपीय व्यापारियों के भारत आगमन से भारत का सम्बंध अंतराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा।
  •  यूरोपीय व्यापारियों ने अपने औपनिवेशिक हितों को ध्यान में रखते हुए बिहार में अपनी फैक्ट्रियाँ स्थापित की । 
  • इन यूरोपीय व्यापारियों की गतिविधियों के द्वारा बिहार का व्यापार पश्‍चिम एशिया, मध्य एशिया के देशों, अफ्रीका के तटवर्ती देशों और यूरोपीय देशों के साथ बढ़ता रहा।

  अन्य महत्वपूर्ण बिंदु  

  • बिहार का सूबेदार सैय्यद हुसैन अली खां एवं उनका भाई अब्दुल्ला खां(हसन आली ) को सैयद बंधु के नाम से जाना जाता है जो इतिहास में शासक निर्माता के रूप में प्रसिद्ध था। 
  • मीरकासिम ने 1763 ई. में पटना में अंग्रेजी फैक्ट्री के एजेंट एलिस सहित 148 कैदियों की हत्या करवा दी, जिसे पटना हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।
  • 1770 में बिहार तथा बंगाल में भयंकर अकाल पड़ा था।
  • 1783 में पुनः बिहार में अकाल पड़ा । 
  • इस समस्या के समाधान हेतु अनाज भंडारण के लिए पटना गोलघर का निर्माण हुआ । 
  • 1770 ई. में बिहार का पूर्णिया जिला संन्यासी विद्रोह का केन्द्र था । 
  • वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1772 ई. में शिताब राय को अपदस्थ कर उसके पुत्र कल्याण सिंह को राय रायन की उपाधि प्रदान की थी । 
  • लॉर्ड कॉर्नवालिस ने 1793 ई. में बिहार में सर जॉन शोर की स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था को लागू किया था । 
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