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बिहार की राज्यव्यवस्था

परिचय

बिहार में लोकतंत्र की परंपरा अत्यंत प्राचीन और मजबूत रही है। वज्जि गणराज्य से लेकर वर्तमान भारतीय गणतंत्र तक जनप्रतिनिधियों की शासन व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया। बिहार की वर्तमान राज्य व्यवस्था क्रमिक रूप से विकसित हुई है तथा यह भारतीय संघीय शासन प्रणाली का अभिन्न अंग है। 

प्रांत के रूप में बिहार

पृथक प्रांत के रूप में बिहार के गठन की घोषणा वर्ष 1911 में की गई। 22 मार्च 1912 को बिहार बंगाल से अलग होकर एक नए प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया, जिसमें उड़ीसा भी शामिल था। 1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा अलग हुआ। 15 नवंबर 2000 को झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान बिहार राज्य का गठन हुआ। जनसंख्या की दृष्टि से बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार का 13वाँ स्थान है। झारखंड संयुक्त बिहार का लगभग 42.35% क्षेत्र लेकर अलग हुआ।

राज्य प्रशासन

भारतीय संविधान के भाग-VI के अनुच्छेद 152 से 237 तक राज्य प्रशासन से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। राज्य प्रशासन को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है- राज्य की विधायिका, राज्य की कार्यपालिका तथा राज्य की न्यायपालिका। 

राज्य की विधायिका के अंतर्गत विधानसभा एवं विधान परिषद् आते हैं। राज्य की कार्यपालिका में राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् शामिल होते हैं। वहीं राज्य की न्यायपालिका के अंतर्गत उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय आते हैं।

राज्य की विधायिका

संविधान के अनुच्छेद 168 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल होता है। यह राज्यपाल, विधानसभा तथा विधान परिषद् (यदि हो) से मिलकर बनता है। बिहार में द्विसदनीय विधानमंडल है।

बिहार की द्विसदनीय व्यवस्था

  • विधानसभा (निम्न सदन)
  • विधान परिषद् (उच्च सदन)

विधान परिषद्

विधान परिषद् राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। इसकी सदस्य संख्या न्यूनतम 40 तथा अधिकतम विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 1/3 तक हो सकती है।

गठन एवं इतिहास

बिहार विधान परिषद् का गठन वर्ष 1912 में हुआ। प्रथम बैठक 20 जनवरी 1913 को पटना कॉलेज, बांकीपुर में आयोजित हुई। 22 नवंबर 1921 को बिहार विधान परिषद् ने महिलाओं को मताधिकार देने संबंधी विधेयक पारित किया। 28 मार्च 1936 को बिहार के लिए पृथक विधान परिषद् गठित हुई।

विशेष तथ्य

बिहार विधान परिषद् NeVA प्लेटफॉर्म पर जाने वाला देश का पहला सदन बना। वर्ष 2021 का शीतकालीन सत्र पूर्णतः पेपरलेस मोड में आयोजित किया गया।

कार्यकाल एवं सदस्यता

सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। प्रत्येक दो वर्ष बाद 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है। 1/6 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा किया जाता है।

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में केवल 6 राज्यों में विधान परिषद् है-उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

विधान परिषद् के सभापति

  • प्रथम सभापति (बिहार एवं उड़ीसा) - सर वाल्टन मोड़े 
  • प्रथम सभापति (स्वतंत्रता पूर्व बिहार) - राजीव रंजन प्रसाद सिंह
  • प्रथम सभापति (स्वतंत्रता पश्चात बिहार) - श्यामा प्रसाद सिंह
  • वर्तमान सभापति - श्री अवधेश नारायण सिंह

विधान सभा

बिहार विधानमंडल का निम्न सदन विधान सभा कहलाता है। बिहार विधान सभा में कुल 243 सदस्य हैं।

संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेद 170 के अनुसार सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने जाते हैं। विधानसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 500 तथा न्यूनतम 60 हो सकती है। सदस्य वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं।

अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष

विधानसभा अपने निर्वाचित सदस्यों में से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव करती है। विधानसभा सचिवालय का प्रमुख अधिकारी मुख्य सचिव कहलाता है।

शक्तियाँ

विधान सभा को कानून निर्माण, बजट पारित करने तथा कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

कार्यकाल 

विधान सभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है, जिसे आपातकाल की स्थिति में अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

104वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2020

लोकसभा एवं विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन आरक्षण समाप्त किया गया। SC/ST आरक्षण की अवधि 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाई गई।

बिहार विधान सभा अध्यक्ष

  • प्रथम विधानसभा अध्यक्ष (स्वतंत्रता पूर्व) - रामदयालु सिंह
  • प्रथम विधानसभा अध्यक्ष (स्वतंत्रता पश्चात) - बिन्धयेश्वरी प्रसाद वर्मा
  • वर्तमान अध्यक्ष - श्री नन्द किशोर यादव

बिहार राज्यव्यवस्था : महत्वपूर्ण तथ्य

विषय

विवरण

विधानमंडल का स्वरूप

द्विसदनीय

विधानसभा सदस्य संख्या

243

विधान परिषद् सदस्य संख्या

75

विधानसभा में अनारक्षित सीटें

203

SC/ST आरक्षित सीटें

38 / 2

लोकसभा सीटें

40

राज्यसभा सीटें

16

लोकसभा में SC आरक्षित सीटें

6

जिलों की संख्या

38

प्रखंडों की संख्या

534

जिला परिषद्

38

नगर निगम

12

नगर परिषद्

49

नगर पंचायत

81

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