किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति में ऊर्जा संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऊर्जा न केवल औद्योगिक विकास बल्कि जीवन स्तर में सुधार और तकनीकी उन्नति का भी आधार है। बिहार में ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों में ताप विद्युत, जल विद्युत, कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस शामिल हैं, जबकि सौर ऊर्जा, बायोगैस, पवन ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा उत्पादन जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों का भी तेजी से विकास हो रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार बिहार की ऊर्जा की चरम मांग 6880 मेगावाट रही, जिसमें 6738 मेगावाट की पूर्ति की गई। वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 7576 मेगावाट तक पहुँच गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार बिहार में कुल ऊर्जा उत्पादन में ताप विद्युत का योगदान 68.9 प्रतिशत तथा नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 31.1 प्रतिशत है।
अनुमान है कि वर्ष 2025-26 तक नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़कर 34.7 प्रतिशत हो जाएगा। राज्य में प्रति व्यक्ति विद्युत उपभोग वर्ष 2021-22 में 329 किलोवाट घंटा रहा।
बिजली खपत में पटना, गया और मुजफ्फरपुर अग्रणी जिले हैं, जबकि शेखपुरा, अरवल और शिवहर में सबसे कम बिजली खपत दर्ज की गई।
बिहार राज्य विद्युत बोर्ड (BSEB) को वर्ष 2012 में पाँच कंपनियों में विभाजित किया गया। इनमें बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL), बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL), बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (BSPTCL), उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) तथा दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) शामिल हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से राज्य में बिजली उत्पादन, संचरण और वितरण का कार्य किया जाता है।
बिहार में कई महत्वपूर्ण ताप विद्युत परियोजनाएँ संचालित हैं। बेगूसराय स्थित बरौनी थर्मल पावर स्टेशन राज्य का प्रमुख ताप विद्युत केंद्र है, जिसकी स्थापना रूसी सहयोग से हुई थी। मुजफ्फरपुर के कांटी में स्थित कांटी बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (KBUNL) उत्तर बिहार को बिजली उपलब्ध कराता है।
भागलपुर का कहलगांव सुपर थर्मल पावर स्टेशन कोयला आधारित प्रमुख परियोजना है। पटना जिले का बाढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) के अधीन कार्यरत है। इसके अतिरिक्त बक्सर थर्मल पावर परियोजना और औरंगाबाद की नबीनगर सुपर थर्मल परियोजना राज्य की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल हैं।
बिहार राज्य जलविद्युत ऊर्जा निगम (BHPC) की स्थापना 1982 में की गई थी। राज्य में वर्तमान में 13 जलविद्युत परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनसे लगभग 54.3 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। सुपौल का कोसी जलविद्युत केंद्र, पश्चिम चम्पारण की त्रिवेणी नहर परियोजना तथा रोहतास की सोन नहर परियोजनाएँ प्रमुख हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा के विकास हेतु बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (BREDA) कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र, सोलर वाटर पंप, सौर स्ट्रीट लाइट तथा फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
लखीसराय के कजरा और भागलपुर के पीरपैंती में सौर ऊर्जा परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। पटना के विक्रम लेक पर 2 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की योजना भी बनाई गई है।
बिहार सरकार ने “हर घर बिजली लगातार” योजना के माध्यम से राज्य के सभी घरों तक बिजली पहुँचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। राज्य में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा और जल विद्युत परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।
इसके साथ ही नवादा के रजौली में परमाणु विद्युत संयंत्र स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे भविष्य में बिहार की ऊर्जा क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
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