भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का गांधीवादी चरण (1915–1947) स्वतंत्रता संग्राम का सबसे व्यापक और जन-आधारित चरण था। इस दौरान महात्मा गांधी के नेतृत्व में आंदोलन ने अहिंसा, सत्याग्रह और जनभागीदारी को आधार बनाया। बिहार इस चरण में एक अत्यंत सक्रिय केंद्र बनकर उभरा।
बिहार में खिलाफत एवं असहयोग आंदोलन
- प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद 16 फरवरी 1919 को पटना में हसन की अध्यक्षता में आयोजित सभा में मित्र राष्ट्रों से खलीफा के प्रति उचित एवं सम्मानजनक व्यवहार की अपील की गयी
- पटना में 1 अगस्त, 1920 को खिलाफत दिवस का आयोजन किया गया।
- 1920 में पटना में आयोजित सार्वजनिक सभा में शौकत अली का भाषण हुआ और असहयोग आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई।
- अगस्त, 1920 में 'बिहार प्रांतीय राजनीतिक सम्मेलन' का आयोजन राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में भागलपुर में हुआ
- इस अवसर पर गाँधी जी ने तार द्वारा असहयोग आंदोलन को समर्थन प्रदान करने का आग्रह किया
- खिलाफत के साथ-साथ जलियाँवाला कांड को इसका कारण बताया
- कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में पारित असहयोग से संबंधित प्रस्ताव की दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में पुष्टि की गई।
- असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में मजहरूल हक, राजेन्द्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, मोहम्मद शफी और ब्रजकिशोर प्रसाद के साथ कई अन्य लोगों ने विधानपरिषद की अपनी उम्मीदवारी वापस ली
- 1921 में अपने बिहार दौरे के क्रम में गाँधीजी ने नेशनल कॉलेज में ही बिहार विद्यापीठ का विधिवत उद्घाटन किया।
- मजहरूल हक इसके कुलपति और ब्रजकिशोर प्रसाद उप-कुलपति बने। इसी विद्यापीठ में जयप्रकाश नारायण, वी. पी. कोईराला, विश्वनाथ प्रसाद वर्मा और अनिरुद्ध सिंह जैसे लोगों ने शिक्षा प्राप्त की
- मजहरूल हक ने पटना-दानापुर रोड पर चरखों का कारखाना खोला, आगे चलकर 'सदाकत आश्रम' बनाया
प्रिंस ऑफ वेल्स का बहिष्कार
- नवम्बर, 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन पर बिहार प्रांतीय सम्मेलन ने उनके बहिष्कार का निर्णय लिया।
- अक्टूबर, 1921 में सरला देवी की अध्यक्षता में बिहार विद्यार्थी परिषद के सोलहवें अधिवेशन में स्वागत समारोह के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। फलतः 22 दिसंबर को प्रिंस के आगमन पर पटना में हड़ताल रही।
- सावित्री देवी ने आगमन के विरोध में कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
अन्य बिंदु :-
- नवंबर, 1921 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के निर्देश पर बिहार कौमी सेवक दल की स्थापना की गई।
- असहयोग आंदोलन को अहिंसक एवं शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- इसके लिए इसे अहिंसा पूर्ण सत्याग्रह के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं की भर्ती करनी थी।
- फरवरी, 1922 में भागलपुर में झंडा कांड हुआ, जिसमें औद्योगिक प्रदर्शनी के दौरान ठेकेदारों द्वारा राष्ट्रीय झंडा लगाए जाने का ब्रिटिश अधिकारियों ने विरोध किया।
बिहार में स्वराज दल
- फरवरी, 1922 में असहयोग आन्दोलन की वापसी
- फरवरी, 1923 में बिहार में बिहार स्वराज दल का गठन किया गया।
- अध्यक्ष -नारायण प्रसाद
- अन्य सदस्य -अब्दुल बारी, कृष्ण सहाय तथा हरनन्दन सहाय बिहार में स्वराजी आन्दोलन से जुड़े किन्तु यह अपने उदेश्य में पूर्ण सफल नहीं हुआ।
बिहार में सविनय अवज्ञा आन्दोलन
बिहार में स्वाधीनता दिवस का आयोजन
- लाहौर प्रस्ताव के अनुरूप बिहार में जगह-जगह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर 26 जनवरी, 1930 को स्वाधीनता दिवस मनाया गया।
- प्रस्ताव के निर्देशों के अनुरूप बिहार के राष्ट्रवादियों ने केंद्रीय और प्रांतीय विधान मंडल की सदस्यता त्याग दी।
- राज्य परिषद की सदस्यता त्यागने वालों में शाह मुहम्मद जुबैर, अनुग्रह नारायण सिंह और महेन्द्र प्रसाद थे।
- विधानमंडल की सदस्यता त्यागने वालों में दीप नारायण सिंह, के. बी. सहाय, रामदयालु सिंह, रामचरित्र सिंह, ठाकुर रामनंदन सिंह तथा अब्दुल बारी आदि।
नमक सत्याग्रह
- गाँधी जी ने नमक कानून को सविनय अवज्ञा आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाने की घोषणा की।
- राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार में नमक कानून के बजाय चौकीदारी कर को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाने का सुझाव दिया।
- गाँधी जी के कहने पर राजेन्द्र प्रसाद ने नमक सत्याग्रह प्रारंभ करना स्वीकार किया।
- बिहार में नमक सत्याग्रह की शुरुआत 15 अप्रैल 1930 को चम्पारण और सारण जिले से हुई।
- यहाँ नमकीन मिट्टी से नमक बनाकर सत्याग्रह किया गया, बिहार में नमक सत्याग्रह एवं सविनय अवज्ञा आन्दोलन की औपचारिक शुरूआत यहीं से हुई।
- 16 अप्रैल 1930 को पटना सिटी के मंगल तालाब में नमक बनाने का कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें राजेन्द्र प्रसाद, जे. बी. कृपलानी आदि की भागीदारी रही।
- इस आयोजन का सरकार द्वारा निर्मम दमन, हजारों लोग को कैद किया गया।
- चम्पारण में विपिन बिहारी वर्मा ने, पटना में जगत नारायण लाल ने, दरभंगा में सत्यनारायण सिंह ने मुंगेर में श्री कृष्ण सिंह ने और शाहाबाद में सरदार हरिहर सिंह ने नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
पटना सत्याग्रह
- यह नमक सत्याग्रह के समय 16 अप्रैल से 21 अप्रैल1930 तक चला।
- अम्बिका कान्त सिन्हा के नेत्रत्व में नखासपिंड नामक जगह पर नमक बनाने के लिए प्रस्थान करने वाले सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया।
- इन छह दिनों के दौरान अब्दुल बारी और आचार्य कृपलानी सहित तमाम सत्याग्रहियों को पुलिसिया जुर्म का शिकार होना पड़ा।
- समुद्र के खारे जल के अभाव के कारण बिहार के सत्याग्रहियों ने नमकीन मिट्टी से नमक बनाने की कोशिश की और कई जगहों पर नमक की पुड़िया को बेचकर नमक कानून को तोड़ा।
नखासपिंड आंदोलन
- स्थान -पटना जिला
- नमक कानून भंग करने के उद्देश्य से
- नेता -अंबिका कांत सिंह
महिलाओं का योगदान
- विशेष रूप से पटना में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को सफल बनाने का श्रेय बिहार की राष्ट्रवादी महिलाओं को जाता है।
- श्रीमती हसन इमाम, विंध्यवासिनी देवी तथा श्रीमती सी.सी. दास आदि के नेतृत्व में महिलाओं ने नगर की सड़कों पर जुलूस निकालकर विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को प्रचारित किया और व्यापारियों के घरों में जाकर उनसे विदेशी वस्त्रों का व्यापार न करने का आग्रह किया।
- इनके द्वारा शराब की दुकानों पर भी सफलतापूर्वक धरना गया।
बिहपुर सत्याग्रह
- बिहार के सविनय अवज्ञा आंदोलन में बिहपुर (भागलपुर) सत्याग्रह महत्वपूर्ण है, सदाकत आश्रम पर पुलिस के कब्जे और काँग्रेस स्वयंसेवकों के साथ मारपीट के प्रतिक्रियास्वरूप उभरा।
- इसका मुख्य उद्देश्य आश्रम को कब्जे में लेना था।
- सत्याग्रहियों के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करने गए राजेन्द्र प्रसाद, अब्दुल बारी, रामविलास शर्मा, बलदेव सहाय आदि भी पुलिस द्वारा किए गए।
नंगी हड़ताल
- सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान सत्याग्रहियों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और उन्हें उपयोग तथा बिक्री से पूरी तरह त्याग दिया।
- राम विनोद सिंह के नेतृत्व में छपरा जेल के सत्याग्रहियों की जब स्वदेशी वस्तुओं की माँग जेलर द्वारा नामंजूर कर दी गई।
- सत्याग्रहियों नंगा रहने का निश्चय किया।
- अंततः नंगी हड़ताल ने स्वदेशी वस्त्र उपलब्ध करवाने के लिए जेलर को बाध्य कर दिया।
बेगूसराय गोलीकाण्ड
- 26 जनवरी, 1931 को प्रथम स्वाधीनता दिवस को पूरे जोश से मनाने का निर्णय किया।
- रघुनाथ ब्रह्मचारी के नेतृत्व में बेगूसराय जिले के पनहास से एक जुलूस निकाला।
- डीएसपी वशीर अहमद ने गोली चलाने का आदेश दे दिया, जिससे छः व्यक्तियों की घटना स्थल पर मृत्यु एचपी गई थी।
तारापुर गोलीकांड
- 15 फरवरी, 1932 की दोपहर सैकड़ों देशभक्त मुंगेर जिले के तारापुर थाने पर तिरंगा लहराने निकल पड़े।
- कलक्टर ई. ओली एवं एस. पी. डब्ल्यू. फ्लैग के नेतृत्व में होने वाली गोलीबारी में पचास से अधिक राष्ट्रवादियों की शहादत हुई।
- इसे बिहार के जालियाँवाला बाग के रूप में जाना जाता है।
- इस गोलीकांड के बाद कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित कर हर साल 15 फरवरी को तारापुर दिवस मनाने का निर्णय लिया था।
अन्य
- 5 जुलाई 1930 राजेंद्र प्रसाद को छपरा में गिरफ्तार किया गया।
- 26 जनवरी 1931 पटना स्थित पोखर पार्क में आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में अनुग्रह नारायण सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय झंडा फहराया गया
सोशलिस्ट पार्टी और बिहार
बिहार सोशलिस्ट पार्टीः जुलाई, 1931 में स्थापना
- प्रमुख नेता - फूलन प्रसाद वर्मा, रामवृक्ष बेनीपुरी, रामानंद मिश्रा, गंगा शरण सिन्हा
बिहार कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टीः
- पहली बैठक/स्थापना मई 1934, पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में हुई थी।
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टीः
- अक्टुबर 1934 में बंबई अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर पर सोशलिस्ट पार्टी को 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' नाम दिया गया।
- अध्यक्ष आचार्य नरेन्द्र देव, सचिव जय प्रकाश नारायण।
भारत सरकार अधिनियम (1935):
- इसके तहत केन्द्रीय विधान परिषद् में बिहार के सदस्यों की संख्या 8 निर्धारित की गई।
प्रान्तीय चुनाव (1937):
- इस चुनाव के पश्चात् सर्वप्रथम मोहम्मद युनुस (अप्रैल, 1937 जुलाई, 1937) प्रथम मुख्यमंत्री (तब प्रधानमंत्री कहा जाता था) बने।
- इसके पश्चात् श्री कृष्ण सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
- फरवरी, 1938 में राजनीतिक बंदियों को छोड़ने के मुद्दे पर कांग्रेसी सरकार ने इस्तीफा दे दिया था।
व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) में बिहार कारण –
- द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारतीय जनमानस की सहमति के बिना भारत को विश्वयुद्ध में शामिल किया जाना
- बिहार के परिपेक्ष्य में व्यक्तिगत सत्याग्रह की प्रेरणा विनोबा भावे से मिली जो पहले सत्याग्रही थे।
- बिहार में पहले सत्याग्रही श्री कृष्ण सिंह तथा दूसरे अनुग्रह नारायण सिंह थे।
- महिला सत्याग्रहियों में जानकी देवी तथा जगतरानी देवी आदि प्रमुख हैं।
भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार की भूमिका
- राष्ट्रीय आंदोलन के अन्य आंदोलनों की तरह भारत छोड़ो आंदोलन में भी बिहार की उल्लेखनीय भूमिका रही।
- 8 अगस्त 1942 भारत छोड़ो आंदोलन का प्रारंभ को होने के बाद इसी दिन मध्य रात्रि से ऑपरेशन 'जीरो ऑवर' के तहत प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
- राजेन्द्र प्रसाद (बाँकोपुर जेल, पटना), जगत नारायण लाल (बाँकीपुर जेल, पटना), जयप्रकाश नारायण (हजारीबाग जेल, झारखण्ड) अन्य प्रमुख नेता श्री कृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह, फूलन प्रसाद् तथा मथुरा प्रसाद आदि को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
- 9 अगस्त 1942 और 10 अगस्त 1942 प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी का आम जनता द्वारा भारी विरोध किया गया।
- शैक्षणिक केंन्द्रों पर हड़ताल एवं राष्ट्रीय झण्डा फहराने जैसे कार्यक्रम हुए रामप्यारी देवी (जगत नारायण लाल की पत्नी) ने बाँकीपर जेल में सभा कर आम जनता से नौकरी छोड़ने की अपील की।
- भगवती देवी ने पटना में महिलाओं के विशाल जुलूस का नेतृत्व किया।
- जिसके तहत पटना स्थित प्रमुख राष्ट्रवादी संस्थान जैसे सदाकत आश्रम, किसान सभा कार्यालय (पटना), कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कार्यालय तथा बिहार विधायिका आदि पर पुलिस ने जप्त कर लिया।
सचिवालय गोली कांड (11 अगस्त 1942)की घटना
- इस दिन छात्रों के एक जुलूस द्वारा पटना स्थित सचिवालय भवन के सामने विधायिका की इमारत पर राष्ट्रीय झंडा फहराने का प्रयास हुआ।
- इसे रोकने के लिए तत्कालीन पटना जिलाधिकारी डब्लू. जी. आर्चर के आदेश पर पुलिस द्वारा गोलीबारी की गई।
- जिसमें सात छात्र शहीद हुए राजेन्द्र सिंह (बनवारी चक, सारण), रामानंद सिंह (शहादत नगर, वर्तमान धनरूआ, पटना), रामगोविन्द सिंह (दशरथा, पटना). उमाकांत प्रसाद सिन्हा (नरेंद्रपुर, सारण), सतीश प्रसाद झा (खड़हरा, भागलपुर), देवीपद चौधरी (शिलहट, जमालपुर) व जगपती कुमार (खराटी, औरंगाबाद)।
- इस गोलीकांड के विरोध में आगे चलकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आई पटना में पूर्ण हड़ताल, संचार सुविधाएँ ठप्प करना, सरकारी कार्य शिथिल करना, रेल कारखाना लूट. डाकघर जलाना आदि।
भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार की महिलाओ की भूमिका
रामप्यारी देवी-
- जगत नारायण लाल की पत्नी ने बाँकीपुर जेल में सभा कर आम जनता से नौकरी छोड़ने की अपील की।
भगवती देवी-
- राजेन्द्र प्रसाद की बहन, पटना में महिलाओं के विशाल जुलूस का नेतृत्व किया।
शांति देवी-
शारदा एवं सरस्वती बहनें
- छपरा के दिघवारा प्रखण्ड में राष्ट्रीय झंडा फहराने के कारण शारदा को 14 वर्ष तथा । सरस्वती को 11 वर्ष की सजा मिली।
सुनीति देवी एवं राधिका देवी
- पुरुष वेश में साइकिल यात्रा से जागरण किया।
सरस्वती देवी-
- इनके नेतृत्व में हजारीबाग में विशाल जनप्रदर्शन हुआ।
जिरियावती देवी –
- अंग्रेज सिपाही को गोली मारी