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राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार की भूमिका

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिहार केवल राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरण, किसान आंदोलनों और क्रांतिकारी गतिविधियों का भी प्रमुख क्षेत्र था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए कई महत्वपूर्ण आंदोलन बिहार से जुड़े रहे, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

बिहार में राष्ट्रीय चेतना का जागरण के कारण 

  • सर्वप्रथम, बिहार का क्षेत्र पिछली एक शताब्दी से भी अधिक समय से ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का केन्द्र रहा था। 
  • वहाबी आंदोलन, सीमित विद्रोहों और 1857 के संग्राम ने बिहारवासियों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था।
  • दूसरी ओर, पाश्चात्य शिक्षा के प्रसार ने नए राजनीतिक विचारों, विशेषकर राष्ट्रवाद के विकास में योगदान रहा था। 
  • ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों से उत्पन्न निरंतर असंतोष ने विद्रोह की अग्नि को और प्रज्वलित किया।
  • बंगाल राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख केंद्र जिसका सीधा प्रभाव बिहार पर पड़ा 

बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विभिन्न अधिवेशन

  • भारत में कॉंग्रेस की स्थापना ए ओ ह्यूम ने की थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस का प्रथम अधिवेशन बंबई(1885) में हुआ जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी। 

बांकीपुर (पटना) अधिवेशन

  • 1912, बांकीपुर (पटना) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 27वाँ अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता आर. एन. मुदहोळकर (R. N. Mudholkar) ने की थी। 
  • इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया।

गया अधिवेशन 

  • 1922 में गया में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 37वाँ अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता चित्तरंजन दास ने की थी।

रामगढ़ (झारखंड) अधिवेशन 

  • 1940 में रामगढ़ (झारखंड) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 53वाँ अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता अबुल कलाम आज़ाद ने की थी।

बिहार प्रांतीय सम्मेलन

  • प्रथम अधिवेशन (1908, पटना) में बिहार प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता सैयद हसन इमाम ने की थी।
  • द्वितीय अधिवेशन (1909, भागलपुर) में सम्मेलन हुआ, जिसकी अध्यक्षता दीप नारायण सिंह ने की थी।

बिहार प्रांत की मांग

  • 19वीं शताब्दी के अंतिम दशक में बिहार को एक पृथक राज्य में परिवर्तित करने की माँग बुद्धिजीवियों द्वारा उठाई जाने लगी।
  • 1894 में ‘बिहार टाइम्स’ नामक पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ हुआ, जिसमें बिहार को पृथक प्रांत बनाने की माँग प्रमुख रूप से उठाई गई।
  • 12 दिसम्बर 1911 को दिल्ली दरबार में सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा बिहार को पृथक प्रांत बनाने की घोषणा की गई।
  • 22 मार्च 1912 को बिहार एवं उड़ीसा को बंगाल से पृथक करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।
  • 1 अप्रैल 1912 को बिहार एवं उड़ीसा नामक नए प्रांत की स्थापना हुई।

क्रांतिकारी राष्ट्रवाद

  • बंग-भंग विरोधी आंदोलन के दौरान बंगाल में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का प्रसार हुआ।
  • अनुशीलन समितियों के माध्यम से सरकार के विरुद्ध हिंसात्मक संघर्ष की प्रेरणा दी गई।
  • इसका प्रभाव बिहार पर भी पड़ा।
  • बिहार में इस विचार के प्रारंभिक प्रवर्तकों में डॉ. ज्ञानेन्द्र नाथ, केदारनाथ बनर्जी और बाबाजी ठाकुरदास प्रमुख थे।
  • बाबाजी ठाकुरदास ने 1906–07 में पटना में रामकृष्ण सोसाइटी की स्थापना की तथा ‘दि मदरलैण्ड’ नामक समाचार पत्र का प्रकाशन भी प्रारंभ किया।
  • 1908 में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर के जिला जज डी. एच. किंग्सफोर्ड की हत्या के प्रयास में उनकी बग्घी पर बम फेंका।
  • इस घटना में धोखे से दो महिलाओं की मृत्यु हो गई, जो प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और पुत्री थीं।
  • खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर 11 अगस्त 1908 को फाँसी दे दी गई, जबकि प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली।
  • मुजफ्फरपुर बम कांड से बिहार के नवयुवकों में नया क्रांतिकारी उत्साह उत्पन्न हुआ।
  • रेवती नाग, चुनचुन पांडेय, बटेश्वर पाण्डेय, छोटन सिंह, नलिनी बाग्ची आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।
  • 1913 में शचिन्द्रनाथ सान्याल ने पटना में अनुशीलन समिति की एक शाखा की स्थापना की।
  • ढाका अनुशीलन समिति के सदस्य रेवती नाग ने भागलपुर में तथा यदुनाथ सरकार ने बक्सर में युवाओं को प्रशिक्षण दिया।
  • भूपेन्द्र नाथ दत्त ने पटना में भवानी मंदिर नामक क्रांतिकारी संस्था की स्थापना की।

होमरूल आंदोलन

  • भारत में होमरूल आंदोलन का प्रारंभ 1916 में एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक द्वारा किया गया।
  • मौलाना मजहरुल हक की अध्यक्षता में 1916 में पटना में होमरूल लीग की स्थापना की गई।

अन्य प्रमुख तथ्य

  • बिहार स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस (1906) – प्रमुख व्यक्तित्व: श्री कृष्ण सिंह, तेजेश्वर प्रसाद।
  • 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस का 16वाँ अधिवेशन हजारीबाग में हुआ, जिसकी अध्यक्षता सरला देवी ने की थी।
  • बॉयज एसोसिएशन (1909, दरभंगा) – संस्थापक: सूर्यदेव नारायण वर्मा।
  • पटना उच्च न्यायालय (1916) की स्थापना हुई तथा सर एडवर्ड प्रथम इसके मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।
  • पटना युवक संघ (1927) – मणिन्द्र नारायण राय द्वारा स्थापित।
  • पाटलिपुत्र युवक संघ (1929) की स्थापना हुई।
  • अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (1929) का आयोजन पटना में हुआ।
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