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भारत में 12 सेमीकंडक्टर प्लांट मंजूर

चर्चा में क्यों ?

केंद्र सरकार ने 5 मई को दो नए सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी है, जिनमें से एक भारत की पहली डिस्प्ले फैब्रिकेशन यूनिट हो सकती है। इसके साथ ही, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत अब तक कुल 12 चिप प्लांट्स को मंजूरी मिल चुकी है। यह मिशन करीब ₹76,000 करोड़ की योजना है, जिसका उद्देश्य भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

सेमीकंडक्टर क्यों हैं अहम ?

  • सेमीकंडक्टर आज हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का आधार हैं—मोबाइल, कार, कंप्यूटर से लेकर फाइटर जेट तक। 
  • वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच, भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और ग्लोबल सप्लाई चेन में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

India Semiconductor Mission (ISM)

  • 2021 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण का पूरा इकोसिस्टम-फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, डिजाइन और डिस्प्ले निर्माण तैयार करना है, जिसमें करीब ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
  • अब सरकार ISM 2.0 के जरिए उपकरण, कच्चे माल और डिजाइन क्षमता को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।

भारत में कहां लग रहे हैं चिप प्लांट ?

  • इन 12 प्लांट्स को गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में लगाया जा रहा है।

प्रमुख प्रोजेक्ट्स:

प्रोजेक्ट/कंपनी

स्थान

मुख्य कार्य/विशेषता

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स

गुजरात

भारत का पहला कमर्शियल चिप फैब, ₹91,000 करोड़ निवेश

माइक्रोन टेक्नोलॉजी

गुजरात

मेमोरी चिप प्लांट, उत्पादन शुरू

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स

असम

रोजाना 4.8 करोड़ चिप बनाने की क्षमता

HCL-फॉक्सकॉन

उत्तर प्रदेश

डिस्प्ले ड्राइवर चिप प्लांट (2028 तक शुरू)

केन्स सेमीकॉन

गुजरात

EV और इंडस्ट्रियल चिप्स का उत्पादन

CG पावर

गुजरात

रेनेसास के साथ संयुक्त प्रोजेक्ट

SiCSem

ओडिशा

सिलिकॉन कार्बाइड आधारित चिप्स

3D ग्लास सॉल्यूशंस

ओडिशा

एडवांस चिप पैकेजिंग यूनिट

क्रिस्टल मैट्रिक्स

गुजरात

भारत की पहली डिस्प्ले यूनिट

Continental Device

पंजाब (मोहाली)

उच्च-शक्ति वाले सेमीकंडक्टर (MOSFETs, IGBTs, शॉट्की डायोड, ट्रांजिस्टर) का निर्माण, सिलिकॉन व सिलिकॉन कार्बाइड आधारित

यह फैसला क्यों है महत्वपूर्ण ?

  • सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल टोस्टर से लेकर फाइटर जेट तक, हर इलेक्ट्रॉनिक चीज में होता है। 
  • मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए, चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा।

आगे की राह: क्या होगा नया ?

  • सूत्रों के अनुसार, ISM 2.0 के तहत सरकार असेंबली और टेस्टिंग प्लांट्स के लिए मिलने वाली 50% सब्सिडी में कुछ कमी कर सकती है, लेकिन पूरा ध्यान भारत की अपनी IP (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) और डिजाइन ईकोसिस्टम को मजबूत करने पर रहेगा।

निष्कर्ष

  • भारत का सेमीकंडक्टर मिशन देश को टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, असली चुनौती अब इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहना होगी।
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