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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026 Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026

दुनिया के नवाचार परिदृश्य में नई छलांग

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)

भूमिका

इक्कीसवीं सदी का वर्तमान चरण ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार द्वारा संचालित विकास का युग है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा अब केवल संसाधनों या श्रम-लागत पर आधारित न होकर नवाचार क्षमता, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा तकनीकी अनुकूलन पर निर्भर हो गई है। इस बदलते वैश्विक नवाचार परिदृश्य में भारत ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए एक नई छलांग लगाई है।

वैश्विक नवाचार परिदृश्य का स्वरूप

  • आज दुनिया में ‘नवाचार’ डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष विज्ञान के इर्द-गिर्द केंद्रित है। 
  • विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी नवाचार को आर्थिक वृद्धि और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रमुख साधन मान रही हैं। 
  • वैश्विक नवाचार प्रतिस्पर्धा में वही देश आगे हैं जिन्होंने शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग के बीच मजबूत तालमेल स्थापित किया है।

भारत की नवाचार यात्रा

  • भारत ने बीते एक दशक में नवाचार के क्षेत्र में गुणात्मक परिवर्तन दर्ज किया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), जैसे- आधार, UPI, डिजिलॉकर और इंडिया स्टैक ने नवाचार को व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव से जोड़ा है। 
  • इन प्लेटफॉर्मों ने कम लागत में बड़े पैमाने पर सेवाओं की डिलीवरी संभव बनाकर भारत को वैश्विक नवाचार के एक विशिष्ट मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
  • भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी इस नवाचार छलांग का प्रमुख आधार है। फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक, एडटेक और डीप-टेक क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। विश्वविद्यालयों, IITs एवं अनुसंधान संस्थानों की बढ़ती भागीदारी से नवाचार संस्कृति को संस्थागत आधार मिला है।

नवाचार के प्रमुख क्षेत्र

भारत में नवाचार विशेष रूप से कुछ क्षेत्रों में तीव्र गति से उभर रहा है:

  • डिजिटल और AI आधारित समाधान: ई-गवर्नेंस, फिनटेक, स्मार्ट सिटी
  • जैव-प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य: वैक्सीन विकास, जेनेरिक दवाएँ
  • अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी: निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका
  • स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी: नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन

नवाचार से जुड़ी चुनौतियाँ

  • हालाँकि, भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी कुछ प्रमुख चुनौतियाँ विद्यमान हैं। अनुसंधान एवं विकास में निवेश अभी भी GDP के लगभग 0.7% के आसपास है, जो कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कम है।
  • इसके अतिरिक्त, पेटेंटिंग की धीमी प्रक्रिया, डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए दीर्घकालिक पूंजी की कमी और उद्योग-अकादमिक सहयोग की सीमाएँ नवाचार की गति को बाधित करती हैं।
  • एक अन्य चुनौती क्षेत्रीय असमानता है जहाँ नवाचार गतिविधियाँ कुछ शहरी केंद्रों तक सीमित हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव अभी भी एक बाधा बना हुआ है।

सरकारी पहल 

  • सरकार द्वारा स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और मिशन-आधारित नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार को संस्थागत समर्थन दिया जा रहा है। अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना, शिक्षा प्रणाली को नवाचार-उन्मुख बनाना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है।

निष्कर्ष

समग्र रूप से दुनिया के नवाचार परिदृश्य में भारत की नई छलांग न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है बल्कि समावेशी और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यदि मौजूदा पहलों को निरंतरता और गहराई दी जाए, तो भारत वैश्विक नवाचार नेतृत्व में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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