संदर्भ
केंद्र सरकार ने जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और इनके माध्यम से बेहतर संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कर्नाटक के मैसूरु में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय भाषा एवं संग्रहालय सम्मेलन के दौरान ‘आदि वाणी’ नामक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूर्ण संस्करण पेश किया।
आदि वाणी प्लेटफार्म के बारे में
- आदि वाणी को जनजातीय भाषाओं के लिए भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुवाद मंच बताया गया है।
उद्देश्य:
- इसका उद्देश्य जनजातीय और गैर-जनजातीय आबादी के बीच भाषा की बाधा को कम करना है।
- साथ ही, यह प्लेटफार्म जिन जनजातीय भाषाओं के अस्तित्व पर संकट है, उनके शब्दों, बोलियों और मौखिक परंपराओं को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने में भी यह तकनीक मदद करेगा।
- इसके जरिए हिंदी और अंग्रेजी से जनजातीय भाषाओं में टेक्स्ट तथा आवाज का तत्काल अनुवाद किया जा सकेगा।
- बच्चों और विद्यार्थियों के लिए भाषा सीखने की डिजिटल सुविधा विकसित की जाएगी।
- जनजातीय समुदायों की लोककथाओं, मौखिक इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।
- स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और सरकारी सेवाओं तक पहुंच में भाषाई बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
- लोगों को सरकारी योजनाओं तथा महत्वपूर्ण भाषणों की जानकारी उनकी अपनी भाषा में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
विकास/संबंधित संस्थान:
- इस प्लेटफॉर्म का विकास देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों और जनजातीय अनुसंधान संस्थाओं के सहयोग से किया गया है। परियोजना का नेतृत्व आईआईटी दिल्ली ने किया है, जबकि बीआईटीएस (पिलानी), IIIT हैदराबाद और IIIT नया रायपुर इसके प्रमुख साझेदार हैं।
- झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मेघालय के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को भी इस परियोजना से जोड़ा गया है।
एआई तकनीक का प्रयोग:
- आदि वाणी प्लेटफार्म में कम डिजिटल संसाधन वाली जनजातीय भाषाओं के लिए विकसित एआई मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। इनमें No Language Left Behind (NLLB) और IndicTrans2 जैसे भाषा मॉडल शामिल हैं।
- इनकी मदद से ऐसी भाषाओं में भी डिजिटल अनुवाद की सुविधा विकसित करने का प्रयास किया गया है, जिनके लिए ऑनलाइन भाषा-संसाधन बेहद सीमित हैं।
सुविधाएं:
- प्लेटफॉर्म में कई उपयोगी डिजिटल फीचर शामिल हैं। दस्तावेज और तस्वीरों को टेक्स्ट में बदलने की सुविधा के जरिए उपयोगकर्ता किसी इमेज या दस्तावेज से लिखित सामग्री निकालकर उसे संपादित और अनुवादित कर सकेगा।
- इसी तरह, ऑडियो-टू-टेक्स्ट सुविधा के माध्यम से किसी रिकॉर्डिंग या लाइव भाषण को लिखित रूप में बदला जा सकेगा और उसके बाद उसे संबंधित जनजातीय भाषा में अनुवाद किया जा सकेगा।
- एक अन्य महत्वपूर्ण सुविधा स्पीच-टू-स्पीच अनुवाद है। इसके जरिए हिंदी या अंग्रेजी में बोले गए शब्दों को जनजातीय भाषाओं में आवाज के रूप में सुना जा सकेगा। शुरुआती चरण में संथाली, मुंडारी और भीली जैसी भाषाओं में यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है।
भाषा संरक्षण की दिशा में अहम कदम:
- भारत में कई जनजातीय भाषाएं सीमित संख्या में बोलने वालों और डिजिटल संसाधनों की कमी के कारण संरक्षण की चुनौती का सामना कर रही हैं। ऐसे में ‘आदि वाणी’ जैसी पहल तकनीक को भाषा संरक्षण से जोड़ती है।
- इसका महत्व केवल अनुवाद तक सीमित नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों की भाषाई पहचान, मौखिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित रखने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है।