New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

वाणिज्यिक बागवानी योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन

संदर्भ  

भारत में वाणिज्यिक बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक बागवानी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने अपनी योजना के दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित व्यवस्था में पात्रता के नियमों को अधिक कड़ा किया गया है, परिवार की परिभाषा का विस्तार किया गया है तथा सब्सिडी की दरों में कमी की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी सहायता का अधिक न्यायसंगत वितरण, दोहरे लाभ की रोकथाम और सब्सिडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है। 

संशोधन से संबंधित प्रमुख बिंदु   

  • पहले योजना के तहत परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग दिया जाता था और प्रति परिवार अधिकतम 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान था। अब इस व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के बारे में:

  • राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, जो वाणिज्यिक बागवानी तथा फसल कटाई के बाद की अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित करता है। 
  • इसकी ‘बागवानी फसलों के उत्पादन एवं फसल कटाई उपरांत प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास’ योजना के तहत बड़े पैमाने पर व्यावसायिक बागवानी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। 
  • शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर जैसी सब्जियों के अलावा गुलाब, लिलियम और गुलदाउदी जैसे फूल भी इस योजना के दायरे में आते हैं। 

कड़ी हुई पात्रता

  • संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति, केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, नगर निगमों के महापौर तथा जिला पंचायतों के अध्यक्ष वित्तीय सहायता के लिए पात्र नहीं होंगे। 
  • केंद्र एवं राज्य सरकारों के मंत्रालयों और विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त निकायों तथा स्थानीय निकायों के सेवारत कर्मचारियों को भी बाहर रखा गया है। हालांकि एमटीएस, चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को अपवाद दिया गया है। 
  • इसी प्रकार 10,000 रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगी भी पात्र नहीं होंगे। किसानों के समूहों को भी वित्तीय सहायता के लिए अपात्र घोषित किया गया है। हालांकि, इन श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों के परिवार के सदस्य निर्धारित शर्तों के अधीन एक बार सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 

‘एक परिवार-एक सहायता’ का सिद्धांत 

  • संशोधित नियमों में परिवार की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब इसमें पति या पत्नी, पिता, माता, पुत्र और पुत्रियां शामिल होंगे। साथ ही ‘एक परिवार-एक सहायता’ का सिद्धांत लागू किया गया है। यानी परिवार के किसी एक सदस्य को एनएचबी की किसी योजना के तहत सहायता मिल जाने के बाद उसी परिवार का दूसरा सदस्य किसी अन्य एनएचबी योजना के तहत लाभ नहीं ले सकेगा। यह नियम व्यक्तिगत आवेदन के साथ-साथ एचयूएफ, साझेदारी फर्म, स्वामित्व वाली फर्म या कंपनी के निदेशक के माध्यम से किए गए आवेदन पर भी लागू होगा। 
  • इन बदलावों की पृष्ठभूमि में बागवानी सब्सिडी के लाभार्थियों से संबंधित हालिया जांच का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को वर्ष 2025 में 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने तथा तत्कालीन पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार के परिवार के सदस्यों के लाभार्थी होने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, चौधरी ने बाद में सब्सिडी की राशि सरकार को वापस कर दी।

सब्सिडी की दरों में कमी 

  • एनएचबी ने सब्सिडी की दर भी कम की है। सामान्य राज्यों में पात्र परियोजना लागत पर सहायता 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 50 प्रतिशत से घटाकर 45 प्रतिशत की गई है। 
  • इससे नई वाणिज्यिक बागवानी परियोजनाओं में किसानों और उद्यमियों को अधिक निजी निवेश करना पड़ सकता है। 

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर 

  • संशोधित नियमों में गलत जानकारी देने, तथ्य छिपाने या गलत दस्तावेजों के आधार पर सहायता प्राप्त करने की स्थिति में सब्सिडी को ब्याज सहित वापस वसूलने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लाभार्थियों को निर्धारित लॉक-इन अवधि में योजना से स्वेच्छा से बाहर निकलने की सुविधा भी दी गई है, जिसके लिए प्राप्त सब्सिडी और लागू ब्याज वापस करना होगा। 
  • कुल मिलाकर, एनएचबी के संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य सरकारी सब्सिडी को अधिक लक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। एक परिवार को एक ही सहायता देने और कुछ प्रभावशाली श्रेणियों को सीधे पात्रता से बाहर करने से दोहरे लाभ तथा संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाने की कोशिश की गई है। 
  • हालांकि सब्सिडी में कमी से पूंजी-गहन बागवानी परियोजनाओं पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, लेकिन नई व्यवस्था सार्वजनिक संसाधनों के अधिक समान और प्रभावी वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X