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विकिरण-रोधी पिल्स

(प्रारंभिक परीक्षा-सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)

संदर्भ

यूक्रेन के ज़ापोरिज़्ज़िया (Zaporizhzhia) परमाणु संयंत्र में आपदा की आशंका के बीच यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को 5.5 मिलियन विकिरण-रोधी पिल्स  (Anti-radiation Pills : ARPs) की आपूर्ति का निर्णय लिया है।  

ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु संयंत्र

  • यह यूरोप का सबसे बड़ा और विश्व का 9वां सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
  • यह संयंत्र यूक्रेन में नाइपर नदी (Dnieper River) के पास एनरहोदर (Enerhodar) शहर में स्थित है। 

क्या है विकिरण-रोधी पिल्स 

  • पोटैशियम आयोडाइड (KI) की पिल्स को ही विकिरण-रोधी पिल्स कहते हैं। यह विकिरण रिसाव से कुछ सुरक्षा प्रदान करती है।
  • पोटैशियम आयोडाइड शरीर में रेडियोएक्टिव आयोडीन को जाने से रोकती है। इस दवा (पिल्स) को लेने से थाइरॉइड ग्रंथि अवरुद्ध हो जाती है, जिससे शरीर में रेडियोसक्रिय आयोडीन का अवशोषण और उसका संकेंद्रण नहीं हो पाता है।   
  • विकिरण रिसाव की पुष्टि होने के बाद ही इन पिल्स के प्रयोग की सलाह दी जाती है। 

विकिरण आपातकाल (Radiation Emergency)

  • ये अनियोजित या आकस्मिक दुर्घटनाएँ हैं जो मनुष्यों और पर्यावरण के लिये रेडियो-परमाणुवीय संकट उत्पन्न करती हैं।
  • इन दुर्घटनाओं में रेडियोधर्मी स्रोत से उत्पन्न विकिरण जोखिम शामिल होता है तथा खतरे को कम करने के लिये तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिये विकिरण-रोधी पिल्स महत्त्वपूर्ण हैं।

कार्यप्रणाली  

  • शरीर के लिये आयोडीन बहुत आवश्यक होता है जो थाइरॉइड ग्रंथि में संकेंद्रित होता है। जब विकिरण रिसाव होता है तो रेडियोसक्रिय आयोडीन निकलता है।
  • चूँकि थाइरॉइड ग्रंथि बहुत संवेदनशील होती है, इसलिये वो गैर-रेडियोसक्रिय आयोडीन और रेडियोसक्रिय आयोडीन को नहीं पहचान पाती है। 
  • रेडियोसक्रिय आयोडीन श्वास या भोजन के माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है, जिससे शरीर में विकिरण का प्रसार हो जाता है। पोटैशियम आयोडाइड थाइरॉइड ग्रंथि को ब्लॉक कर देती है, जिससे रेडियोसक्रिय आयोडीन जमा नहीं हो पाता और विकिरण से बचा जा सकता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार विकिरण रिसाव से पूर्व या बाद में पोटैशियम आयोडाइड की दवा ली जा सकती है। ये दवा थाइरॉइड ग्रंथि में आयोडीन जमा कर देती है।
  • ऐसे में अगर रेडियोसक्रिय आयोडीन का रिसाव भी होता है तो वो थाइरॉइड ग्रंथि में जमा नहीं हो पाता है। 
  • बाह्य संपर्क से शरीर पर जमा रेडियोसक्रिय आयोडीन को गर्म पानी और साबुन से हटाया जा सकता है, किंतु शरीर के आंतरिक संपर्क में आने से थाइरॉइड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को इससे सबसे अधिक खतरा होता है। 
  • पोटैशियम आयोडाइड में बहुत अधिक गैर-रेडियोसक्रिय आयोडीन होते हैं, इसलिये थाइरॉइड ग्रंथि भर जाती है और अगले 24 घंटों के लिये किसी भी प्रकार के आयोडीन (स्थिर या रेडियोधर्मी) को अवशोषित नहीं कर सकती है।

थाइरॉयड ग्रंथि 

  • ये ग्रंथि दो हार्मोन- टेट्राआयडोथाइरोनीनस (T4) या थायरोक्सीन तथा ट्राईआयडोथाइरोनीन (T3) का संश्लेषण करती है। इन हार्मोन्स के सामान्य दर से संश्लेषण लिये आयोडीन आवश्यक है। 
  • इसकी कमी से अव थाइरॉइडता एवं थायरॉयड ग्रंथि की वृद्धि हो जाती है, जिसे साधारणतया गलगंड कहते हैं।
  • गर्भावस्था के समय इसकी कमी से विकसित हो रहे भ्रूण की वृद्धि विकृत हो जाती है। इससे शिशु अवरोधित वृद्धि (क्रिटेनिज्म) या वामनता, मंदबुद्धि, त्वचा असमानता व मूक बधिरता आदि का शिकार हो जाता है।    
  • थाइरॉइड ग्रंथि के कैंसर (गाँठों की वृद्धि) से हार्मोन संश्लेषण की दर अधिक हो जाती है। इस स्थिति को थाइरॉइड अतिक्रियता कहते हैं। 

सीमाएँ 

  • पोटैशियम आयोडाइड पिल्स केवल निवारक हैं और विकिरण द्वारा थाइरॉइड ग्रंथि को हुए किसी भी नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं कर सकती हैं।  
  • ये पिल्स शत-प्रतिशत सुरक्षा नहीं प्रदान करती हैं, बल्कि इसकी प्रभावशीलता शरीर में प्रवेश करने वाली रेडियोसक्रिय आयोडीन की मात्रा और अवशोषण के समय पर निर्भर करती है। 
  • साथ ही, इन पिल्स को 40 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिये अनुशंसित किया जाता है। 
  • यह रेडियोधर्मी आयोडीन से थाइरॉइड की रक्षा कर सकता है किंतु विकिरण संदूषण से यह अन्य अंगों की रक्षा नहीं कर सकता है। 
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