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बैसिलस सबटिलिस : केरल का राज्य सूक्ष्मजीव

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में केरल सरकार ने बैसिलस सबटिलिस (Bacillus subtilis) को आधिकारिक रूप से अपना “राज्य सूक्ष्मजीव (State Microbe)” घोषित किया है। इसका उद्देश्य जैव-विविधता के संरक्षण, जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान को बढ़ावा देना और छात्रों में सूक्ष्मजीव विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

बैसिलस सबटिलिस क्या है ?

बैसिलस सबटिलिस एक प्रोबायोटिक बैक्टीरिया है, जिसे सामान्यतः “अच्छा बैक्टीरिया” कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से:

  • मानव आंत (Gut) में पाया जाता है।
  • किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है।
  • मिट्टी और पौधों की सतह पर व्यापक रूप से पाया जाता है।

यह जीव विज्ञान और जैव-तकनीक में सबसे अधिक अध्ययन किए जाने वाले सूक्ष्मजीवों में से एक है।

बैसिलस सबटिलिस की प्रमुख विशेषताएँ

1. संरचनात्मक विशेषताएँ

  •  बीजाणु बनाने वाला (Spore-forming)
  • छड़ के आकार का (Rod-shaped)
  • ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया
  • गतिशील (Motile)
  • वैकल्पिक एरोब (Facultative Aerobe) – ऑक्सीजन की उपस्थिति और अनुपस्थिति दोनों में जीवित रह सकता है।

2. आवास (Habitat)

  • मुख्यतः मिट्टी और वनस्पति में पाया जाता है।
  • इसके लिए अनुकूल तापमान 25–35°C होता है।

3. जैविक क्षमता

  •  यह कई प्रकार के एंटीबायोटिक उत्पन्न करता है।
  • इसके जीनोम में 5 सिग्नल पेप्टिडेज़ जीन होते हैं, जो एंटीबायोटिक स्राव में सहायक होते हैं।
  • यह निम्नलिखित पदार्थ स्रावित कर सकता है:
    • पॉलीमिक्सिन (Polymyxin)
    • डिफिसिडिन (Difficidin)
    • सबटिलिन (Subtilin)
    • माइकोबैसिलिन (Mycobacillin)

4. एंडोस्पोर क्षमता

  • इसके एंडोस्पोर अत्यंत कठोर परिस्थितियों को सहन कर सकते हैं:
    • UV किरणें
    • उच्च तापमान
    • सूखा वातावरण
  • इसलिए यह लंबे समय तक निष्क्रिय अवस्था में जीवित रह सकता है।

संचरण और रोगजनकता

  • सामान्यतः यह रोगजनक नहीं होता
  • लेकिन:
    • भोजन को दूषित कर सकता है।
    •  कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में अवसरवादी रोगजनक (Opportunistic Pathogen) बन सकता है।

बैसिलस सबटिलिस के अनुप्रयोग (Applications)

कृषि क्षेत्र में

  • प्राकृतिक फफूंदनाशक (Bio-fungicide) के रूप में उपयोग।
  •  पौधों की जड़ों में रहकर रोगजनक जीवों से प्रतिस्पर्धा करता है।
  • कुछ प्रजातियाँ कीटों के लिए विष उत्पन्न करती हैं, जिससे फसलों की रक्षा होती है।
  •  जैविक खेती (Organic Farming) में महत्वपूर्ण भूमिका।

वैज्ञानिक अनुसंधान में

  •  एंडोस्पोर निर्माण के अध्ययन हेतु मॉडल जीव।
  • स्पोरिसाइड्स और स्टेरिलेंट्स की प्रभावशीलता जांचने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • जीन अभिव्यक्ति और एंटीबायोटिक उत्पादन के अध्ययन में उपयोगी।

स्वास्थ्य और उद्योग में

  •  प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स में उपयोग।
  • आंत स्वास्थ्य सुधारने में सहायक।
  • एंजाइम और औषधीय उत्पादों के निर्माण में प्रयोग।

केरल द्वारा राज्य सूक्ष्मजीव घोषित करने का महत्व

  •  वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ेगी।
  •  माइक्रोबायोलॉजी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
  •  जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण को समर्थन मिलेगा।
  • छात्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित होगी।

सूक्ष्मजीव क्या होते हैं ?

  • सूक्ष्मजीव वे अत्यंत छोटे जीव होते हैं जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता, बल्कि माइक्रोस्कोप की सहायता से देखा जाता है।
    ये जल, वायु, मिट्टी, भोजन और हमारे शरीर में भी पाए जाते हैं।
  • कुछ सूक्ष्मजीव लाभकारी होते हैं जबकि कुछ रोग उत्पन्न करने वाले होते हैं।

सूक्ष्मजीवों के प्रमुख प्रकार

1. बैक्टीरिया (Bacteria)

  • एककोशिकीय जीव।
  • मिट्टी, जल, भोजन और मानव शरीर में पाए जाते हैं।
  • कुछ लाभकारी (दही बनाने वाले), कुछ रोगजनक (टीबी, टायफाइड)।

उदाहरण: बैसिलस सबटिलिस, ई.कोलाई

2. विषाणु (Virus)

  • जीवित कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहते हैं।
  • केवल जीवित कोशिका के अंदर ही सक्रिय होते हैं।
  • अनेक संक्रामक रोग फैलाते हैं।

उदाहरण:-कोरोना वायरस, इन्फ्लुएंजा वायरस

3. कवक (Fungi)

  • यीस्ट और फफूंद शामिल।
  • खाद्य पदार्थों को खराब भी करते हैं और उपयोगी भी होते हैं।

उदाहरण: यीस्ट (ब्रेड बनाने में), पेनिसिलियम (पेनिसिलिन दवा)

4. प्रोटोजोआ (Protozoa)

  • एककोशिकीय यूकैरियोट जीव।
  • जल में पाए जाते हैं।

उदाहरण: अमीबा, प्लास्मोडियम (मलेरिया)

5. शैवाल (Algae)

  • प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
  • जल में पाए जाते हैं।

उदाहरण: स्पाइरुलिना, क्लोरेला

सूक्ष्मजीवों के लाभ

  • दही, ब्रेड, सिरका, शराब बनाने में उपयोग
  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण (मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना)
  • दवाइयाँ और एंटीबायोटिक निर्माण
  • अपशिष्ट विघटन (कचरा साफ करना)
  •  जैव-कीटनाशक और जैव-उर्वरक

सूक्ष्मजीवों के नुकसान

  • रोग फैलाते हैं – टीबी, हैजा, मलेरिया
  • भोजन खराब करते हैं
  • फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं
  •  विषाक्त पदार्थ उत्पन्न कर सकते हैं

सूक्ष्मजीवों का उपयोग

चिकित्सा क्षेत्र

  • एंटीबायोटिक दवाओं का निर्माण।
  • टीकों (वैक्सीन) की तैयारी।
  • प्रोबायोटिक के रूप में पाचन सुधार।
  • इंसुलिन और हार्मोन उत्पादन।
  • रोगों की पहचान एवं परीक्षण।

कृषि

  • जैव-उर्वरक के रूप में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना।
  • जैव-कीटनाशक द्वारा कीट नियंत्रण।
  • पौध रोगों से सुरक्षा।
  • मिट्टी में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण।
  • फसल उत्पादन में वृद्धि।

अनुसंधान

  • डीएनए और जीन अध्ययन।
  • नई दवाओं का परीक्षण।
  • एंजाइम रिसर्च।
  •  जैव-प्रौद्योगिकी प्रयोग।
  • आनुवंशिक सुधार।

उद्योग

  • दही, ब्रेड, शराब, सिरका निर्माण।
  • बायोफ्यूल उत्पादन।
  • कपड़ा और कागज उद्योग में उपयोग।
  •  एंजाइम आधारित सफाई।
  • खाद्य संरक्षण।

पर्यावरण संरक्षण

  • कचरे का अपघटन।
  • जल शुद्धिकरण (सीवेज ट्रीटमेंट)।
  • तेल रिसाव की सफाई।
  • प्रदूषण नियंत्रण।
  • जैव विविधता संरक्षण।
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