ब्रूसथोआ इसरो

संदर्भ 

हाल ही में, केरल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोल्लम तट के गहरे समुद्र (250-450 मीटर) में आइसोपॉड (Isopod) की एक नई प्रजाति की खोज की है जिसका नाम ‘ब्रूसथोआ इसरो’ (Brucethoa isro) रखा गया है।

ब्रूसथोआ इसरो के बारे में 

  • यह ब्रूसथोआ वंश का एक परजीवी आइसोपॉड है जो एक समुद्री मछली ‘स्पाइनीजॉ ग्रीनआई’ (क्लोरोफथाल्मस कॉर्निगर) के गिल गुहा के भीतर रहता है। 
  • इस प्रजाति का नाम ‘ब्रूसथोआ इसरो’ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सम्मान में रखा गया है।
  • यह प्रजाति भारत में प्रलेखित होने वाली ‘ब्रूसथोआ वंश’ की दूसरी प्रजाति है। इस प्रजाति की मादाएँ नर की तुलना में बड़ी होती हैं। 
  • इस खोज द्वारा गहरे समुद्र में परजीवी आइसोपॉड की विशिष्ट आकृति विज्ञान और व्यवहार के बारे में पता चलेगा, साथ ही समुद्री परजीविता के बारे में वैज्ञानिक समुदाय की समझ विकसित होगी।

आइसोपॉड के बारे में 

  • आइसोपोडा आर्थ्रोपोडा संघ और क्रस्टेशिया उपसंघ का अकशेरुकी (रीढ़ की हड्डी के बिना) जीवों का एक गण हैं जिसके सदस्यों को आइसोपॉड कहा जाता है। 
  • यह एक बड़ा क्रस्टेशियन समूह है जिसमें लगभग 10,000 स्थलीय एवं जलीय दोनों प्रकार की प्रजातियाँ शामिल हैं। 
  • आइसोपॉड का जीवाश्म रिकॉर्ड कम से कम 300 मिलियन वर्ष प्पोर्व कार्बोनिफेरस काल (पेंसिल्वेनियाई युग में) का है जब ये उथले समुद्र में रहते थे। 

वितरण एवं पर्यावास 

  • विश्वभर में ये पहाड़ों और रेगिस्तानों से लेकर गहरे समुद्र तक कई अलग-अलग प्रकार के आवासों में पाए जाते हैं।
  • आइसोपॉड की जलीय प्रजातियाँ अधिकतर समुद्र तल पर या मीठे जल निकायों के तल पर रहती हैं और स्थलीय प्रजातियाँ ठंडे व नम स्थानों में पाई जाती हैं। 
  • अधिकांश स्वतंत्र रूप से जीवित रहती हैं, लेकिन कई समुद्री प्रजातियाँ अन्य जीवों विशेषकर मछलियों पर परजीवी हैं।

विशेषताएँ 

  • ये कई विभिन्न आकार और सरंचना में और माइक्रोमीटर से लेकर आधा मीटर तक की लंबाई के होते हैं।
  • ये अक्सर एक जैसे नहीं दिखते, लेकिन इनमें कुछ सामान्य विशेषताएँ, जैसे- सभी आइसोपॉड में दो जोड़ी एंटीना, मिश्रित आँखें और जबड़े के चार सेट होते हैं।
  • इनके शरीर में सात खंड होते हैं जिनमें से प्रत्येक के चलने वाले पैरों की अपनी जोड़ी होती है।
  • इनमें छह खंडों से बना एक छोटा उदर खंड होता है जिसे ‘प्लीओन्स’ कहा जाता है और इनमें से एक या अधिक खंड एक पूँछ खंड से जुड़े होते हैं।

स्पाइनीजॉ ग्रीनआई (क्लोरोफथाल्मस कॉर्निगर)

    • यह क्लोरोफथाल्मिडे नामक एक छोटे परिवार की गहरे समुद्र (250-450 मीट) में रहने वाली समुद्री मछली की प्रजाति है। 
    • क्लोरोफथाल्मिडे नाम ग्रीक शब्द ‘क्लोरोस’ से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘हरा’ और ओफ्थाल्मोस जिसका अर्थ ‘आँख’ है।
    • वितरण : यह विश्वभर के उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण जल में पाई जाती है। 
  • महत्त्व : 
    • इसकी कुछ प्रजातियाँ वाणिज्यिक और निर्वाह मत्स्य पालन के लिए उपयोग की जाती हैं  
    • कुछ प्रजातियों को अन्य बड़ी मछली का भोजन बनाया जाता है या ताज़ा बेचा जाता है।
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