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देश की पहली न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन 'न्यूमोसिल'

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ; मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2, स्वास्थ्य)

 संदर्भ

हाल ही में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने स्वास्थ्य संगठन ‘पथ’ एवं ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ के साथ मिलकर स्वदेशी रूप से विकसित देश की पहली न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन 'न्यूमोसिलविकसित की है

प्रमुख बिंदु

  • इस वैक्सीन का विकास देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल के लिये एक मील का पत्थर साबित होगा। न्यूमोकॉकल या निमोनिया/ न्यूमोनिया रोग विश्वभर में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिये अभी भी बड़ा खतरा है। यूनिसेफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में भारत में निमोनिया से 1,27,000 बच्चों की मृत्यु हुई थी।
  • वैश्विक रूप से पाँच वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु के सबसे बड़े दो कारण निमोनिया और डायरिया हैं।
  • न्यूमोसिल, कमज़ोर प्रतिजन के लिये मज़बूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के निर्माण में सहायक होगी। न्यूमोसिल, गावी की वैक्सीन के मुकाबले 30% सस्ती है और इसकी प्रति डोज़ में मात्र 2-3 डॉलर की लागत आएगी।
  • न्यूमोसिल को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (इंडिया) द्वारा जुलाई, 2020 में लाइसेंस दिया गया था।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2017 में, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन को भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत शामिल किया गया था।इसकी शुरुआत चरणबद्ध तरीके से हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में की गई है। 
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, डोज़/खुराक के हिसाब से विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है तथा वह कोविशील्ड का निर्माण भी कर रहा है, जो एस्ट्राज़ेनेका-ऑक्सफोर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीनका भारतीय संस्करण है । सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन का प्रयोग लगभग 170 देशों में किया जाता है और विश्व का प्रत्येक तीसरा बच्चा इस इंस्टिट्यूट द्वारा बनाई गई किसी न किसी वैक्सीन से प्रतिरक्षित है।

 न्यूमोकॉकल रोग

  • स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनियाजीवाणु, जिसे न्यूमोकॉकल जीवाणु, न्यूमोकॉक्सी (बहुवचन), और न्यूमोकॉकस (एकवचन) भी कहा जाता है, छोटे बच्चों में रुग्णता का एक प्रमुख कारण है।
  • अभी तक लगभग 90 प्रकार के न्यूमोकॉकल जीवाणुओं के बारे में जानकारी मिली है।
  • इन जीवाणुओं के कारण अन्य रुग्णताओं के साथ-साथ रक्तप्रवाह संक्रमण (बैक्टीरिमिया), मेनिंजाइटिस, साइनुसाइटिस तथा कुछ अन्य संक्रमण भी हो सकते हैं।
  • समग्र रूप से, स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनिया के कारण होने वाली विभिन्न रुग्णताओं को न्यूमोकॉकल रोग कहा जाता है। विकासशील देशों में इस रोग की स्थिति अधिक गंभीर है।
  • इसके घातक परिणामों को देखते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2018 में सभी देशों में नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों में न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (PCV) को शामिल करने की सिफारिश की।
  • न्यूमोकॉकल रोग से वयस्क भी बड़ी संख्या में प्रभावित होते हैं। इस रोग के लक्षण विभिन्न जीवाणुओं के कारण उत्पन्न रुग्णता के आधार पर अलग-अलग होते हैं। न्यूमोकॉकल न्यूमोनिया के सामान्य लक्षणों में बुखार, सीने में दर्द, कफ और साँस का फूलना शामिल हैं।
  • न्यूमोकॉकल रोग के टीके का निर्माण जीवाणु जनित सेरोटाइप से सुरक्षा के लिये किया जाता है, जो अधिकांश न्यूमोकॉकल रोगों के लिये उत्तरदायी होता है।
  • न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन/टीके (PCVs) के प्रचलित सेरोटाइप्स में 7 (PCV7), 10 (PCV10), और 13 (PCV13) आदि प्रमुख हैं। न्यूमोसिल को सेरोटाइप 6 ए और 19 ए के द्वारा निर्मित किया गया है।
  • इन सबके अतिरिक्त, एक अनकॉन्जुगेट टीका, जिसमें 23 सेरोटाइप्स (PPSV23) शामिल हैं, भी उपलब्ध है। अनकॉन्जुगेट टीका एक पॉलिसैकराइड टीका होता है और सभी पॉलीसेकराइड टीकों के तरह ही यह भी वयस्कों में अधिक प्रभावी होता है क्योंकि यह दो वर्ष से कम आयु वाले बच्चों में सतत् रूप से प्रतिरक्षा क्षमता का निर्माण नहीं करता है।
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