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देश का पहला डायबिटीज बायोबैंक

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से चेन्नई में देश का पहला डायबिटीज बायोबैंक स्थापित किया है।

प्रमुख बिंदु:

  • बायोबैंक डायबिटीज के कारणों, भारतीयों को चपेट में लेने वाले विभिन्न प्रकार के डायबिटीज और इससे संबंधित विकारों पर शोध में मदद करेगा।
  • इस बायोबैंक में दो अध्ययनों से संबंधित रक्त के नमूने हैं-
    • 2008 से 2020 तक कई चरणों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित ICMR इंडिया डायबिटीज
    • रजिस्ट्री आफ पीपल विद डायबिटीज इन इंडिया एट ए यंग एज एट द आनसेट  
  • युवाओं में टाइप 1, टाइप 2 और गर्भकालीन डायबिटीज जैसे विभिन्न प्रकार के डायबिटीज के रक्त के ढेर सारे नमूने भविष्य के अध्ययन और अनुसंधान के लिए संग्रहीत किए गए हैं।
  • बायोबैंक स्थापित करने की प्रक्रिया करीब दो साल पहले शुरू हुई थी।
  • हाल ही में  इंडियन जर्नल आफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित लेख में बायोबैंक का विवरण और इसे स्थापित करने के उद्देश्य को विस्तार से बताया गया है।
  •  विश्व के विभिन्न बायोबैंक में से सबसे प्रसिद्ध ब्रिटेन का बायोबैंक है। 
    • इसमें पांच लाख लोगों की आनुवंशिक, जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी वाला बायोमेडिकल डाटा है।

यह बायोबैंक कैसे कार्य करता है?

  • इसमें डायबिटीज के रोगियों के रक्त, ऊतक और अन्य जैविक नमूने एकत्रित किए जाते हैं। 
  • इन नमूनों का उपयोग वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए किया जाता है। 
  • वैज्ञानिक इन नमूनों का विश्लेषण करके डायबिटीज के कारणों, जीनों और पर्यावरणीय कारकों के बारे में अधिक जान सकते हैं।

डायबिटीज बायोबैंक का महत्त्व:

  • यह प्रारंभिक निदान और व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों के विकास के लिए नए बायोमार्कर की पहचान करने में मदद कर सकता है। 
  • यह समय के साथ डायबिटीज और इसकी जटिलताओं की प्रगति को ट्रैक करने के लिए अनुदैर्ध्य अध्ययनों का भी समर्थन करेगा।
    • इससे बेहतर प्रबंधन और रोकथाम रणनीतियों की ओर बेहतर प्रयास संभव होंगे।

भारत में डायबिटीज:

  • अनुमान के अनुसार भारत में 11 करोड़ से अधिक लोग इससे पीड़ित हैं।
    • 13 करोड़ से ज्यादा लोगों को डायबिटीज होने की आशंका है। 

 डायबिटीज या मधुमेह:

  • आयुर्वेद में डायबिटीज को मधुमेह रोग कहा जाता है।
  • डायबिटीज रोग एक तरह का मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है।
  • शरीर में इंसुलिन की कमी से शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।
  • ये बीमारी अनुवाशिंक भी होती है और खराब जीवनशैली के कारण भी होती है।

अग्न्याशयी हार्मोन:

  • इंसुलिन:
    • इंसुलिन रक्त शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को अधिक होने से रोकता है। 
    • यह वसा, मांसपेशियों और यकृत में कोशिकाओं को ग्लूकोज को अवशोषित और संग्रहीत करने के लिए संकेत देता है।
  • ग्लूकागन:
    • ग्लूकागन रक्त शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को बहुत कम होने से रोकता है।

 

डायबिटीज या मधुमेह के प्रकार:

  1. टाइप 1 मधुमेह: 
    • यह एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया (शरीर गलती से खुद पर हमला करता है) के कारण होता है। 
    • यह प्रतिक्रिया आपके शरीर को इंसुलिन बनाने से रोकती है।
    • मधुमेह से पीड़ित लगभग 5-10% इससे ग्रसित होते हैं।
    • इससे ग्रसित व्यक्ति को जीवित रहने के लिए  इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।
    • इसे ‘किशोर-मधुमेह’ के रूप में भी जाना जाता है।
  2. टाइप 2 मधुमेह:
    • इससे पीड़ित व्यक्ति का शरीर इंसुलिन का अच्छी तरह से उपयोग नहीं करता है।
    • मधुमेह से पीड़ित लगभग 90-95% लोगों में टाइप 2 मधुमेह होता है।
    • स्वस्थ जीवनशैली में परिवर्तन करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. गर्भावस्थाजन्य मधुमेह:
    •  गर्भावस्था के दौरान विकसित मधुमेह, जिसमें पीड़ित महिला में इसकी पुष्टि पहली बार हुई हो।

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. इंसुलिन रक्त शर्करा के स्तर को अधिक होने से रोकता है।
  2. ग्लूकागन रक्त शर्करा के स्तर को बहुत कम होने से रोकता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न  तो 1 न  ही 2 

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