संदर्भ
केंद्र सरकार तीन महीने का रिफॉर्म उत्सव (Reform Utsav) अभियान शुरू करने की योजना बना रही है, जिसके संभवतः 2 अक्टूबर, 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य व्यवस्थित तरीके से नागरिकों के सुझावों को प्राप्त करना और उन्हें ठोस एवं क्रियान्वित किए जा सकने वाले शासन सुधारों में बदलना है।
रिफॉर्म उत्सव के बारे में
- रिफॉर्म उत्सव नागरिक-प्रेरित शासन सुधार का एक प्रस्तावित अभियान है। इसका उद्देश्य ऐसी संस्थागत व्यवस्था बनाना है, जिसके माध्यम से नागरिकों की प्रतिक्रिया और सुझावों की पहचान, उन पर विचार-विमर्श तथा उन्हें लागू किए जा सकने वाले सुधारों में रूपांतरण किया जा सके।
- इसका लक्ष्य एक निरंतर प्रक्रिया विकसित करना है, जिसमें नागरिकों की आवाज़, ठोस सुधार, क्रियान्वयन अथवा प्रतिबद्ध कार्य-योजना के रूप में आगे बढ़े।
- यह अभियान तीन महीने तक चलने की संभावना है और इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर, 2026 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर होने की उम्मीद है।
संगठनात्मक व्यवस्था:
- समन्वय समिति: इसका नेतृत्व कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन करेंगे।
- राज्यों की भागीदारी: राज्यों के मुख्य सचिवों से राज्य-स्तरीय निकाय गठित करने और नोडल अधिकारियों को नामित करने के लिए परामर्श किया जा रहा है।
उद्देश्य
- इसका मुख्य उद्देश्य शासन में नागरिक भागीदारी को संस्थागत रूप देना तथा प्रशासनिक और संरचनात्मक सुधारों की पहचान, प्राथमिकता निर्धारण और क्रियान्वयन के लिए एक उत्तरदायी एवं प्रभावी तंत्र तैयार करना है।
प्रमुख विशेषताएँ
1. विमर्श – विचार-विमर्श (Deliberate):
- प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन किया जाएगा ताकि ‘त्वरित रूप से लागू किए जा सकने वाले सुधारों’ (Quick Wins) की पहचान की जा सके। साथ ही, अधिक जटिल और संरचनात्मक सुधारों के लिए विस्तृत कार्य-योजनाएँ एवं रोडमैप तैयार किए जाएंगे।
2. जन मंथन – खोज (Discover):
- नागरिक एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से सुधार संबंधी अपने सुझाव दे सकेंगे। इसके साथ सार्वजनिक बैठकों, वेबिनार और विभिन्न जन-जागरूकता एवं संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से भी सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।
3. समाधान एवं संकल्प सिद्धि – समाधान (Resolution):
- समन्वय समिति द्वारा हर दो सप्ताह में समीक्षा की जाएगी, ताकि चिन्हित सुधारों के क्रियान्वयन और उनकी प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
4. एआई-सहायित प्रतिक्रिया प्रसंस्करण:
- नागरिकों से प्राप्त सुझावों को वर्गीकृत और व्यवस्थित करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता ली जाएगी। पहुंच को अधिक व्यापक बनाने के लिए एक बहुभाषी कॉल सेंटर भी शुरू किए जाने की संभावना है।
महत्व
- यह व्यवस्था नागरिकों को केवल सरकारी सेवाओं के लाभार्थी या प्राप्तकर्ता होने के बजाय नीति-निर्माण और प्रशासनिक सुधारों में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर प्रदान करेगी।
- नागरिकों की प्रतिक्रियाओं और सुझावों को मापनीय एवं क्रियान्वित किए जा सकने वाले सुधारों में बदलने से जवाबदेही और पारदर्शिता मजबूत होगी।
- इससे नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) को बढ़ावा मिलेगा और शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, सहभागी एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।