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डीप टेक: भारत की नवाचार यात्रा और भविष्य की संभावनाएँ

(प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास)

संदर्भ

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब तक बिजनेस मॉडल नवाचारों, जैसे- फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स और फिनटेक पर आधारित रहा है किंतु अब डीप टेक (Deep Tech) के माध्यम से वैज्ञानिक खोजों एवं इंजीनियरिंग उत्कृष्टता पर आधारित नवाचार की ओर बढ़ने का समय है। डीप टेक न केवल आर्थिक विकास को गति दे सकता है, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व प्रदान कर सकता है।

डीप टेक के बारे में 

  • परिभाषा : डीप टेक प्रौद्योगिकियाँ वैज्ञानिक खोजों, मौलिक अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित होती हैं, जैसे- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, सामग्री विज्ञान व आणविक दवा अनुसंधान।
  • विशेषताएँ :
    • मौलिक नवाचार : नई तकनीकों का निर्माण, न की मौजूदा तकनीकों का पुनर्जनन
    • दीर्घकालिक दृष्टिकोण : बार-बार असफलताओं एवं प्रयोगों के बाद सफलता
    • उच्च प्रभाव : ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं स्वचालन (ऑटोमेशन) जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन
  • उदाहरण :
    • सामग्री विज्ञान : ड्रोन्स को हल्का व टिकाऊ बनाने वाली तकनीक
    • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स : बैटरी प्रौद्योगिकी में प्रगति, जैसे- चीन की BYD कंपनी
    • स्वास्थ्य सेवा : अगली पीढ़ी की दवाएँ एवं सर्जिकल रोबोट्स
  • महत्त्व : डीप टेक भारत को वैश्विक मूल्य शृंखला में ऊपर ले जा सकता है, रोजगार सृजन कर सकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर सकता है।

डीप टेक निर्माण प्रक्रिया एवं बिजनेस मॉडल

  • निर्माण प्रक्रिया के पाँच स्तंभ
  1. उत्पाद मानसिकता: जटिल समस्याओं का समाधान करने के लिए तकनीकी गहराई एवं नवाचार पर जोर
  2. अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्कृति: प्रयोग एवं दीर्घकालिक सोच को बढ़ावा देना
  3. तकनीकी गहराई: संस्थापकों का गहन तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान की क्षमता
  4. शैक्षिक पारिस्थितिकी: मौलिक सिद्धांतों व अंतर्विषयी शिक्षा पर ध्यान देना 
  5. सरकारी नीतियाँ: साझा सुविधाएँ, वित्त पोषण व अनुसंधान के लिए प्रोत्साहन
  • आवश्यक बिजनेस मॉडल
  1. संस्थापक-केंद्रित मॉडल: स्वयं उत्पाद निर्माण में शामिल तकनीकी विशेषज्ञता वाले संस्थापक, जैसे- गूगल के लैरी पेज या टेस्ला के एलन मस्क
  2. अनुसंधान-आधारित मॉडल: दीर्घकालिक निवेश एवं असफलताओं को सहन करने की क्षमता, जैसा कि एनविडिया (NVIDIA) ने AI हार्डवेयर में किया।
  3. सहयोगात्मक मॉडल: उद्योग-अकादमिक साझेदारी, जैसे- अमेरिका में DARPA द्वारा रोबोटिक्स में नवाचार
  • चुनौतियाँ: उच्च लागत, लंबी समयावधि एवं जोखिम के कारण डीप टेक स्टार्टअप्स को पारंपरिक वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त करना कठिन होता है।

भारत में डीप टेक की स्थिति

  • प्रगति:
    • स्टार्टअप्स: भारत में 3,000 से अधिक डीप टेक स्टार्टअप्स में से कई AI, रोबोटिक्स एवं जैव प्रौद्योगिकी में कार्यरत हैं।
    • निवेश: 2024 में डीप टेक स्टार्टअप्स में $1.5 बिलियन का निवेश हुआ किंतु यह वैश्विक निवेश ($100 बिलियन) का केवल 1.5% है।
    • उदाहरण: Niramai (AI-आधारित कैंसर डिटेक्शन), Agnikul Cosmos (अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) और Tonbo Imaging (रक्षा इमेजिंग)
  • संस्थागत समर्थन:
    • IITs एवं IISc : उच्च-स्तरीय अनुसंधान किंतु सीमित उद्योग साझेदारी
    • नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NRDC): अनुसंधान को व्यावसायीकरण में सहायता
  • कमियाँ:
    • उत्पाद निर्माण की कमी: भारत ने वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त उत्पाद, जैसे- TensorFlow या SAP नहीं बनाए हैं।
    • सीमित R&D संस्कृति: स्टार्टअप्स में दीर्घकालिक अनुसंधान पर ध्यान न देकर त्वरित राजस्व पर ध्यान देना  

भारत में चुनौतियाँ

  • शैक्षिक सीमाएँ:
    • अधिकांश कॉलेज टूल-आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान देते हैं, न कि मौलिक सिद्धांतों पर
    • अंतर्विषयी शिक्षा एवं उद्योग-अकादमिक सहयोग की कमी
  • संस्थापकों की कमी: उत्पाद निर्माण में सक्रिय होने वाले तकनीकी गहनता वाले संस्थापक कम होना
  • बुनियादी ढांचा: स्टार्टअप्स के लिए फैब्रिकेशन लैब्स, पायलट सुविधाएँ और प्रमाणन केंद्रों की कमी
  • वित्त पोषण: डीप टेक की उच्च लागत व जोखिम के कारण वेंचर कैपिटल की कम रुचि
  • नीतिगत बाधाएँ: NRDC जैसे संस्थानों की कठिन पात्रता शर्तें, जैसे- केवल इनक्यूबेटर स्टार्टअप्स को फंडिंग
  • बाजार चुनौतियाँ: MSMEs में सटीकता की कमी और बड़े निगमों की अत्यधिक मात्रा में मांग

सरकार की भूमिका

  • साझा बुनियादी ढांचा:
    • फैब्रिकेशन लैब्स, टेस्टिंग सेंटर और प्रोटोटाइपिंग सुविधाएँ स्थापित करना
    • कम मात्रा, उच्च-सटीकता उत्पादन के लिए सस्ती सुविधाएँ
  • वित्त पोषण सुधार:
    • NRDC की पात्रता शर्तों को सरल करना और संस्थापकों की तकनीकी गहनता पर ध्यान देना
    • डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष अनुदान व ऋण योजनाएँ
  • शैक्षिक सुधार:
    • मौलिक सिद्धांतों व अंतर्विषयी शिक्षा को बढ़ावा देना
    • IITs व अन्य संस्थानों में उद्योग-अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहन
  • नीतिगत प्रोत्साहन:
    • डीप टेक उत्पादों के लिए कर छूट व निर्यात प्रोत्साहन
    • DARPA जैसे मॉडल पर आधारित चुनौती-आधारित फंडिंग
  • वैश्विक साझेदारी: अमेरिका, जापान और यूरोप के डीप टेक हब्स के साथ सहयोग

आगे की राह

  • संस्थापकों का विकास: तकनीकी विशेषज्ञता व उत्पाद मानसिकता वाले संस्थापकों को प्रशिक्षित करना
  • शैक्षिक परिवर्तन: MIT व Stanford जैसे मॉडल अपनाकर मौलिक एवं अंतर्विषयी शिक्षा पर जोर
  • उद्योग सहयोग: स्टार्टअप्स, MSMEs और बड़े निगमों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखला: भारत को डीप टेक उत्पादों के डिजाइन व निर्माण में अग्रणी बनाना
  • नवाचार संस्कृति: प्रयोग एवं असफलता को स्वीकार करने वाली संस्कृति को बढ़ावा देना
  • डिजिटल एवं भौतिक एकीकरण: AI, रोबोटिक्स एवं सामग्री विज्ञान को संयोजित कर नए उत्पाद बनाना

निष्कर्ष

डीप टेक भारत के लिए वैश्विक तकनीकी नेतृत्व और आर्थिक परिवर्तन का अवसर है। हालांकि, इसके लिए शैक्षिक सुधार, तकनीकी गहराई वाले संस्थापक, और मजबूत सरकारी समर्थन की आवश्यकता है।

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