New
Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM

INS माहे

INS माहे को 24 नवंबर, 2025 को मुंबई में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह भारत का पहला माहे श्रेणी का एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है। पहली बार किसी थलसेना प्रमुख ने किसी नौसैनिक युद्धपोत के कमीशनिंग में नेतृत्व किया।

INS-Mahe

INS माहे के बारे में

  • ‘INS माहे’ एक अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन युद्ध पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय व उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
  • इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने डिज़ाइन एवं निर्मित किया है। यह अपनी श्रेणी के 8 पोतों में पहला है।
  • इसका ध्येय वाक्य ‘साइलेंट हंटर्स’ है जिसका अर्थ है कि यह युद्धपोत चुपचाप, सटीकता के साथ और बिना शोर किए दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की नौसेना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वदेशी युद्धपोतों के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही है।
  • ‘INS माहे’ में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक शामिल हैं।
  • इसे दो वर्षों तक कठोर समुद्री परीक्षणों से प्रमाणित किया गया है।
  • मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स और तीनों सेनाओं थल, जल एवं वायु के बीच बढ़ती सामरिक तालमेल के दौर में यह पोत नौसेना की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • उथले एवं तटीय जल क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन 
  • उन्नत हथियार प्रणाली, आधुनिक सेंसर और अत्याधुनिक संचार नेटवर्क से लैस
  • पनडुब्बियों, जैसे- उप-सतही (Sub-surface) खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और नष्ट करने में सक्षम
  • लंबे समय तक लगातार समुद्र में गश्त और संचालन की क्षमता
  • बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों एवं नौसैनिक विमानों के साथ सहज नेटवर्क-सेंट्रिक समेकन
  • तकनीकी रूप से अत्याधुनिक मशीनरी और नियंत्रण प्रणालियाँ
  • ‘बिल्डर्स नेवी’ यानी अपनी स्वयं की युद्धनौकाएँ डिज़ाइन करने और निर्माण करने की दिशा में भारत की प्रगति को मजबूत करना 

महत्व

  • भारत की तटीय सुरक्षा का प्रथम रक्षा कवच बनेगा।
  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी और प्रभुत्व को अधिक मजबूती मिलेगी।
  • एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी।
  • स्वदेशी रक्षा उद्योग, नौसैनिक इंजीनियरिंग और रणनीतिक क्षमता को बढ़ावा।
  • तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाकर मल्टी-डोमेन सुरक्षा ढांचे को अदिक मजबूत करेगा।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X