New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

रक्षा खरीद मैनुअल 2025

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: सरकारी नीतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ

भारत सरकार ने 14 सितंबर, 2025 को रक्षा खरीद मैनुअल (Defence Procurement Manual: DPM) 2025 जारी किया है। 

क्या है DPM 2025

  • DPM 2025 एक व्यापक मार्गदर्शिका है, जो रक्षा मंत्रालय एवं सशस्त्र बलों के लिए सभी राजस्व खरीद प्रक्रियाओं के सिद्धांतों व प्रावधानों को निर्धारित करती है। 
  • यह मैनुअल करीब 1 लाख करोड़ मूल्य की खरीद को नियंत्रित करेगा। 
  • पिछला DPM वर्ष 2009 में लागू हुआ था और रक्षा व तकनीकी परिदृश्य में बदलाव को देखते हुए इसे संशोधित किया गया है।   

उद्देश्य

  • सशस्त्र बलों को समय पर और उचित लागत पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना
  • तीनों सेनाओं में संयुक्तता (Jointness) बढ़ाना
  • खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना
  • रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना
  • निजी क्षेत्र, MSMEs, स्टार्टअप्स एवं शिक्षा संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना

मुख्य प्रावधान

  • आत्मनिर्भरता पर जोर : रक्षा वस्तुओं और स्पेयर पार्ट्स के स्थानीय डिज़ाइन व विकास को बढ़ावा
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग : ई-प्रोक्योरमेंट, पारदर्शी टेंडरिंग एवं त्वरित निर्णय
  • दंड प्रावधानों में रियायत :
    • विकास चरण में Liquidity Damages (LD) नहीं
    • प्रोटोटाइप के बाद न्यूनतम LD 0.1% और अधिकतम 5% (केवल अत्यधिक विलंब पर 10%)
  • निश्चित ऑर्डर गारंटी : 5 वर्षों तक और विशेष परिस्थितियों में 10 वर्षों तक गारंटीकृत ऑर्डर
  • सक्षम आर्थिक अथॉरिटी (CFAs) को सशक्त करना : फील्ड लेवल पर निर्णय क्षमता, फाइल मूवमेंट में कमी और समय पर भुगतान
  • ग्रोथ प्रोविजन : मरम्मत/रखरखाव के कार्य में 15% अतिरिक्त वृद्धि की स्वीकृति
  • लिमिटेड टेंडरिंग : 50 लाख तक की खरीद के लिए सीमित टेंडर की अनुमति
  • प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया : DPSUs से NOC की आवश्यकता समाप्त होने से सभी को समान अवसर

नए मैनुअल की आवश्यकता

  • पुरानी मैनुअल (2009) मौजूदा आधुनिक युद्ध और तकनीक की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी।
  • खरीद प्रक्रिया लंबी और जटिल थी, जिससे संसाधनों की उपलब्धता में देरी होती थी।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी और नवाचार को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा था।
  • व्यापार सुगमता और डिजिटल प्रक्रिया की बढ़ती आवश्यकता के अनुरूप बनाना।

प्रभाव 

  • यह खरीद प्रक्रिया को तेज कर सशस्त्र बलों को संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, जिससे सैन्य तैयारी मजबूत होगी। 
  • घरेलू उद्योग, विशेष रूप से एम.एस.एम.ई. एवं स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, जिससे रक्षा विनिर्माण में नवाचार और स्वदेशीकरण को गति मिलेगी।
  • कार्यशील पूंजी समस्याओं को कम करने और दंडों में छूट से उद्योगों को सहायता मिलेगी, जिससे रोजगार सृजन व आर्थिक विकास होगा। 
  • कुल मिलाकर, यह मैनुअल रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं दक्षता लाएगा, जो आधुनिक युद्ध की मांगों को पूरा करेगा।

चिंताएँ 

  • अत्यधिक विकेंद्रीकरण से वित्तीय अनियमितताओं का खतरा
  • निजी कंपनियों की क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण पर निगरानी आवश्यक
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म का सही उपयोग जरूरी

आगे की राह

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करना
  • गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध डिलीवरी पर सख्त निगरानी
  • उद्योग, अकादमिक संस्थानों एवं स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा
  • भारत को रक्षा निर्यातक राष्ट्र बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाना
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X