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नवीन जनगणना के लिए शहरी क्षेत्र की परिभाषा

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ 

  • भारत के महापंजीयक कार्यालय ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 की जनगणना में ‘शहरी क्षेत्र’ के लिए वर्ष 2011 की जनगणना की परिभाषा का ही उपयोग जारी रहेगा।
  • इसके अतिरिक्त पुरुष श्रमिकों के गैर-कृषि कार्यों की गणना करते समय कृषक, कृषि मजदूर और वृक्षारोपण, पशुपालन, वानिकी, मछली पकड़ने, शिकार व संबद्ध गतिविधियों में लगे लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

शहरी क्षेत्र की परिभाषा (2011 की जनगणना के अनुसार)

किसी बस्ती को ‘शहरी’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है यदि वह निम्न में से कोई एक हो:

  • वैधानिक नगर: किसी राज्य कानून (नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड, अधिसूचित नगर क्षेत्र) द्वारा शहरी घोषित
  • जनगणना नगर: तीनों मानदंडों को पूरा करना आवश्यक:
    • जनसंख्या ≥ 5,000
    • जनसंख्या घनत्व ≥ 400 व्यक्ति/वर्ग किमी.
    • मुख्य कार्यशील पुरुष जनसंख्या का कम-से-कम 75% गैर-कृषि गतिविधियों में संलग्न हो।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल 121 करोड़ की आबादी में से लगभग 83.3 करोड़ भारतीय (लगभग 68.8%)  लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। 
    • 37.7 करोड़ लोग या 31.2% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है।

निर्णय का प्रभाव

  • शहरी परिभाषा में संशोधन पर बहस के बावजूद मानदंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • यह विगत जनगणना के आंकड़ों से तुलना में मदद करेगा।
  • यह योजना, संसाधन आवंटन और शहरी नीतियों के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • अमृत, स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी जैसी योजनाओं को प्रभावित करेगा।

वर्तमान परिभाषा से संबंधित मुद्दे

  • शहरी विशेषताओं वाली कई तेज़ी से बढ़ती बस्तियाँ ग्रामीण (शहरीकरण का कम आकलन) के रूप में वर्गीकृत हैं।
  • मानदंड (जैसे- पुरुष कार्यबल हिस्सेदारी) वर्तमान सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में पुराने माने जाते हैं।
  • यह वित्तपोषण, शासन एवं बुनियादी ढाँचे की योजना को प्रभावित करता है।

इसे भी जानिए!

  • जनगणना- 2021 कोविड-19 महामारी के कारण विलंबित हुई थी। इसे अब जनगणना- 2027 के रूप में जान जाता है।
  • इस व्यापक प्रक्रिया का पहला चरण- मकान सूचीकरण और आवास जनगणना अप्रैल 2026 से शुरू होगा। 
  • जनसंख्या गणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। 
  • यह पहली बार होगा जब जनगणना के दौरान जाति गणना की जाएगी। 
    • इसी वर्ष 30 अप्रैल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगली जनगणना प्रक्रिया में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय लिया है।
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