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वंदे भारत ट्रेनों का विकास

संदर्भ

वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिये प्रस्तुत किये गए केंद्रीय बजट में अगले तीन वर्षों में 400 नई वंदे भारत ट्रेनों के विकास और निर्माण का प्रस्ताव किया है। ये बेहतर ऊर्जा दक्षता और यात्री सवारी के अनुभवों के साथ ‘नई पीढ़ी’ की ट्रेनें होंगी। 

वंदे भारत ट्रेन 

  • वंदे भारत स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित अर्ध उच्च गति/सेमी हाई स्पीड की स्वचालित ट्रेन है, जिसे राजधानी ट्रेनों की शुरुआत के बाद से गति और यात्री सुविधा के मामले में भारतीय रेलवे के अगले बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • इन ट्रेनों को विकास के चरण के दौरान ‘ट्रेन 18’ के रूप में डब किया गया था। ये ट्रेनें बिना लोकोमोटिव के संचालित होती हैं। यह एक प्रणोदन प्रणाली पर आधारित है, जिसे वितरित कर्षण शक्ति प्रौद्योगिकी कहा जाता है, जिसके द्वारा ट्रेन सेट की प्रत्येक कार संचालित होती है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के हिस्से के रूप में पहली वंदे भारत ट्रेन का निर्माण ‘इंटीग्रल कोच फैक्ट्री’ (ICF), चेन्नई द्वारा किया गया था। 
  • इसकी यात्री क्षमता 1,100 से अधिक है। यह अधिकतम 160 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने में सक्षम है, जो यात्रा के समय को 25% से 45% तक कम करता है।
  • इसमें बेहतर ऊर्जा दक्षता के लिये पावर रीजनरेशन के साथ एक इंटेलिजेंट ब्रेकिंग सिस्टम का भी उपयोग किया गया है, जिससे यह लागत, ऊर्जा और पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल है। वंदे भारत, यात्री कोचों की पारंपरिक प्रणालियों में प्रयुक्त लोकोमोटिव की तुलना में ट्रेन सेट तकनीक के अनुकूलन के लिये भारत का पहला प्रयास था।
  • हालाँकि, भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेन सेट का विन्यास जटिल है, किंतु यह रखरखाव में आसान व कम ऊर्जा खपत के साथ ट्रेन संचालन में अधिक लचीला है। 

वर्तमान में संचालित की जा रही वंदे भारत ट्रेन

  • वर्तमान में दो वंदे भारत एक्सप्रेस को संचालित किया जा रहा है, एक नई दिल्ली से वाराणसी के मध्य तथा दूसरी नई दिल्ली से कटरा के मध्य। 
  • उल्लेखनीय है कि रेलवे ने 44 और ऐसी ट्रेनों के निर्माण के लिये 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध जारी किया था। यद्यपि पहली निविदा को रद्द कर इसे ‘मेक इन इंडिया’ नीति के साथ संरेखित करने के लिये पुनः जारी किया गया। पहली बार निविदा के लिये निविदा के कुल मूल्य की न्यूनतम 75% स्थानीय सामग्री की आवश्यकता थी।
  • अगस्त 2020 में हैदराबाद स्थित मेधा सर्वो ड्राइव्स लिमिटेड ने 44 ट्रेन सेट के निर्माण के लिये आवश्यक प्रणोदन, नियंत्रण और अन्य उपकरणों के डिज़ाइन और निर्माण हेतु अनुबंध प्राप्त किया। रेलवे ने जिन रेक या ट्रेन सेटों की घोषणा की थी, उनका निर्माण इसकी तीन उत्पादन इकाइयों में किया जाना था।

कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति

  • इन ट्रेनों के संस्करण 2.0 की डिज़ाइन का कार्य पूरा किया जा चुका है तथा अप्रैल से इसके परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है, जबकि इन रेक के लिये क्रमिक उत्पादन के सितंबर तक शुरू होने की संभावना है।
  • रेलवे को 400 नई ट्रेनों के लिये बेहतर संस्करण का लक्ष्य दिया गया है। आगामी ट्रेनों के डिज़ाइन में यात्रियों की सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखते हुए कम शोर एवं कंपन स्तर शामिल किया गया है।
  • कोचों के निर्माण में स्टील की बजाय एल्युमीनियम के उपयोग पर विचार किया जा रहा है, जिससे ट्रेनों के वजन में कमी के साथ ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा तथा इनकी गति को और तेज़ किया जा सकेगा।
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