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मेघालय की गुफाओं में रहने वाले सूक्ष्म घोंघों की दो नई प्रजातियों की खोज

चर्चा में क्यों ?

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की चूना-पत्थर (Limestone) की गुफाओं में वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म घोंघों (Micro-snails) की दो नई प्रजातियों की खोज की है। यह खोज भारत के जैव विविधता संपन्न इंडो-बर्मा बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट में छिपी अनदेखी जीव विविधता को उजागर करती है। शोधकर्ताओं ने मेघालय की क्रेम पुरी और अरवाह गुफा प्रणालियों में दो नई प्रजातियों-जियोरिसा मेघालयेंसिस और एक्मेला बेन्सोनी की पहचान की।

जियोरिसा मेघालयेंसिस: मेघालय के नाम पर नई प्रजाति

  • पहली नई प्रजाति Georissa meghalayaensis क्रेम पुरी गुफा के प्रवेश द्वार के समीप पाई गई। 
  • यह अपने निकट संबंधी घोंघों से अपने नारंगी-लाल रंग और खोल पर मौजूद जालीनुमा उभरी हुई संरचना के कारण अलग दिखाई देती है।
  • वैज्ञानिकों ने इसका नाम "मेघालयेंसिस" राज्य मेघालय के सम्मान में रखा है, क्योंकि यह प्रजाति फिलहाल केवल इसी क्षेत्र में पाई गई है।

एक्मेला बेन्सोनी: भारतीय मालाकोलॉजी के अग्रदूत को सम्मान

  • दूसरी नई प्रजाति Acmella bensoni क्रेम पुरी और अरवाह गुफाओं के अंदरूनी भागों की दीवारों पर पाई गई। इसका खोल छोटा, हल्का पारदर्शी और सफेद रंग का होता है।
  • इस प्रजाति का नाम 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक विलियम एच. बेन्सन के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें भारत में मालाकोलॉजी (Molluscs के अध्ययन) का अग्रदूत माना जाता है।

सूक्ष्म आकार, लेकिन बड़ा वैज्ञानिक महत्व

  • ये दोनों घोंघे इतने छोटे हैं कि सामान्य आंखों से इन्हें देख पाना मुश्किल है। इनके विशिष्ट गुण केवल माइक्रोस्कोप की सहायता से स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकते हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रजातियों की संरचना और विकासक्रम का अध्ययन भूमिगत पारिस्थितिक तंत्रों (Subterranean Ecosystems) को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट की समृद्ध जैव विविधता

  • पूर्वोत्तर भारत विश्व के 36 प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक इंडो-बर्मा बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट का हिस्सा है। यह क्षेत्र दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन और भारतीय उपमहाद्वीप की जैव विविधताओं के संगम का प्रतिनिधित्व करता है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में 1,200 से अधिक चूना-पत्थर की गुफाएं मौजूद हैं, जो घोंघों जैसे खोलधारी जीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करती हैं। इसके बावजूद यहां की सूक्ष्म जीव विविधता पर अब तक सीमित अध्ययन ही किया गया है।

पर्यटन से बढ़ रहा खतरा

  • शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि गुफाओं में बढ़ती पर्यटन गतिविधियां इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों के लिए खतरा बन सकती हैं।
  • विशेष रूप से -
    • अत्यधिक पर्यटक आवाजाही
    • कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था
    • सीढ़ियों और अन्य संरचनाओं का निर्माण,
  • इन सूक्ष्म जीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों ने गुफा पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) की आवश्यकता पर बल दिया है।

जैव विविधता संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज ?

  • यह खोज दर्शाती है कि भारत के भूमिगत पारिस्थितिक तंत्रों में अभी भी अनेक ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी पहचान होना बाकी है। सूक्ष्म आकार के बावजूद ये जीव पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • नई प्रजातियों की खोज न केवल भारत की जैव विविधता को समृद्ध करती है, बल्कि संरक्षण विज्ञान, विकासक्रम अध्ययन और पारिस्थितिकी अनुसंधान को भी नई दिशा प्रदान करती है।
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