संदर्भ
हाल ही में भारत सरकार ने घोषणा की कि 2025 में रिकॉर्ड 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। सरकार ने 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर अंगदान को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रत्यारोपण सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करने के उद्देश्य से कई नई पहल शुरू की हैं।
ई-प्रत्यारोपण पहल के बारे में
- ई-प्रत्यारोपण (e-Pratyaropan) एक एकीकृत और राष्ट्रीय स्तर का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- इसे भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की संपूर्ण व्यवस्था को डिजिटल बनाने तथा अधिक सुचारु एवं पारदर्शी बनाने के लिए विकसित किया गया है।
- यह एक केंद्रीय डिजिटल माध्यम के रूप में कार्य करता है, जो अस्पतालों, प्रत्यारोपण सर्जनों, अंगदाताओं, प्रतीक्षा सूची में शामिल अंग प्राप्तकर्ताओं तथा प्रशासनिक एवं नियामक संस्थाओं को एक ही तकनीकी ढाँचे से जोड़ता है।
- नोडल मंत्रालय: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार।
- कार्यान्वयन संस्था: राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (National Organ and Tissue Transplant Organisation - NOTTO)।
पहल के उद्देश्य:
ई-प्रत्यारोपण प्लेटफॉर्म का उद्देश्य एक ऐसा पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी अंगदान तंत्र स्थापित करना है, जो
- मैनुअल प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को समाप्त करे।
- अंगदान और प्रत्यारोपण से जुड़ी अनियमितताओं एवं गलत प्रथाओं को रोकने में सहायता करे।
- वास्तविक समय (Real-Time) में अंग पंजीकरण और रिकॉर्ड बनाए रखे।
- अंगों के मिलान (Matching) और आवंटन (Allocation) की प्रक्रिया को तेज करे।
- समय पर प्रत्यारोपण सुनिश्चित करके अधिक से अधिक जीवन बचाने में सहायता करे।
प्रमुख विशेषताएँ:
1. एकीकृत राष्ट्रीय रजिस्ट्री और प्रतीक्षा सूची प्रबंधन
- यह प्लेटफॉर्म अंग प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों, मृत एवं जीवित अंगदाताओं, ऊतक बैंकों तथा अंगदान संकल्पों (Donation Pledges) का वास्तविक समय (Real-Time) डिजिटल डेटाबेस तैयार करता है।
- इससे अंग उपलब्धता और जरूरतमंद मरीजों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहती है।
2. स्वचालित एवं पारदर्शी अंग आवंटन प्रणाली
- यह प्रणाली मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (Transplantation of Human Organs and Tissues Act - THOTA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रोटोकॉल आधारित एल्गोरिदम (Algorithm) का उपयोग करती है।
- प्राप्त अंगों का आवंटन चिकित्सा प्राथमिकता, भौगोलिक स्थिति तथा रोगी की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।
- इससे व्यक्तिगत हस्तक्षेप और पक्षपात की संभावनाएँ कम होती हैं।
3. अस्पतालों एवं हितधारकों का एकीकरण
- पंजीकृत अस्पताल, क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTOs) तथा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTOs) इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं, अंग प्राप्ति संबंधी सूचनाओं और मरीजों के अपडेट दर्ज कर सकते हैं।
- निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, जैसे प्रत्यारोपण प्रक्रिया के 48 घंटे के भीतर विवरण दर्ज करना।
4. डिजिटल पहचान सत्यापन
- यह मोबाइल और डिजिटल पहचान प्रणालियों के साथ एकीकृत होकर अंगदान संकल्प प्रक्रिया को सरल बनाता है।
- इसके माध्यम से वास्तविक डिजिटल अंगदान प्रमाण-पत्र जारी किए जा सकते हैं।
5. वास्तविक समय में अंगों की ट्रैकिंग
- यह प्लेटफॉर्म NOTTO मोबाइल ऐप के साथ जुड़ा हुआ है।
- इसके माध्यम से प्राप्त अंगों की आवाजाही, ग्रीन कॉरिडोर और परिवहन मार्गों की निगरानी की जा सकती है।
- इससे विशेष रूप से हृदय जैसे अत्यधिक समय-संवेदनशील अंगों को शीघ्र पहुँचाने में सहायता मिलती है।
महत्त्व:
- केंद्रीकृत और सुरक्षित (Encrypted) अंग आवंटन प्रणाली अवैध अंग व्यापार को नियंत्रित करने में सहायता करेगी तथा अंगों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी वितरण को सुनिश्चित करेगी।
- यह दाता और प्राप्तकर्ता के बीच स्वचालित मिलान (Automated Matching) की प्रक्रिया को तेज करेगी।
- इससे प्रतीक्षा समय कम होगा और समय पर प्रत्यारोपण की संभावना बढ़ेगी।
- विशेष रूप से हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों के लिए यह प्रणाली जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।