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ओडिशा में पिछड़े वर्गों को शैक्षिक आरक्षण

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में ओडिशा मंत्रिमंडल ने 14 मई, 2025 को राज्य के उच्चतर माध्यमिक और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के छात्रों को 11.25% आरक्षण प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

ओडिशा राज्य में वर्तमान आरक्षण स्थिति 

  • ओडिशा ने अब तक शिक्षा में एस.ई.बी.सी. छात्रों के लिए आरक्षण प्रदान नहीं किया था, जबकि 27% कोटा लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
  • यद्यपि, रोजगार के क्षेत्र में ओडिशा राज्य ने वर्ष 1994 में एस.ई.बी.सी. उम्मीदवारों के लिए 27% आरक्षण लागू किया था किंतु ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा वर्ष 1998 के फैसले के बाद इसे पलट दिया गया था। हालाँकि, इसे बाद में वर्ष 2007 में उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। 
  • तब से सार्वजनिक रोजगार में एस.ई.बी.सी. आरक्षण 11.25% पर बना हुआ है।

आरक्षण नीति में हालिया परिवर्तन

  • राज्य मंत्रिमंडल द्वारा उच्चतर माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में एस.ई.बी.सी. के छात्रों को 11.25% आरक्षण प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से लागू किया जाएगा। 
  • यह आरक्षण राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकारी और सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और विद्यालयों तथा जन शिक्षा, उच्च शिक्षा, ओडिया भाषा, साहित्य व संस्कृति तथा खेल एवं युवा सेवा विभागों के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों में लागू होगा।
  • इस कदम का उद्देश्य सभी श्रेणियों में आरक्षण का एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। 
  • नई नीति आरक्षण संरचना के अनुरूप है जिसमें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 22.5%, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16.25%, एस.ई.बी.सी. के लिए 11.25%, विकलांग व्यक्तियों (PwD) के लिए 5% और भूतपूर्व सैनिकों के लिए 1% शामिल है।

आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण

  • वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) के लिए 27% आरक्षण लागू किया था।
  • यह संविधान (93वां संशोधन) अधिनियम, 2005 के माध्यम से 20 जनवरी, 2006 को लागू किया गया था।
  • केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 ने आरक्षण नीति को अधिक औपचारिक बना दिया।
    • इस प्रावधान के अनुसार, संसद के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं को भी कमजोर वर्गों के लोगों की शैक्षिक उन्नति के लिए उचित कानून बनाने का अधिकार है।
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