संदर्भ
दुनिया का नक्शा केवल भौगोलिक जानकारी नहीं देता, बल्कि यह भी तय करता है कि हम देशों और महाद्वीपों के आकार को किस तरह देखते हैं। लंबे समय से मर्केटर प्रोजेक्शन विश्व मानचित्र का प्रमुख स्वरूप रहा है। हालांकि नौवहन के लिए यह बेहद उपयोगी था, लेकिन इसमें क्षेत्रफल को लेकर काफी विकृति दिखाई देती है।
इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन (Equal Earth Projection) के बारे में
- Equal Earth Projection एक समान-क्षेत्रफल वाला विश्व मानचित्र प्रक्षेपण है, जिसे 2018 में कार्टोग्राफरों बोजन शाव्रिच, टॉम पैटरसन और बर्नहार्ड जेनी ने विकसित किया था।
- इसका उद्देश्य महाद्वीपों और देशों के वास्तविक क्षेत्रफल का अनुपात बनाए रखना तथा उनकी आकृतियों को भी यथासंभव प्राकृतिक दिखाना है।
- यह पुराने गैल-पीटर्स प्रोजेक्शन की एक प्रमुख कमी को दूर करने का प्रयास करता है। गैल-पीटर्स में क्षेत्रफल तो सही अनुपात में दिखता है, लेकिन महाद्वीपों की आकृतियाँ काफी विकृत नजर आती हैं।
मर्केटर प्रोजेक्शन की समस्या
- 1569 में जेरार्डस मर्केटर ने अपना प्रक्षेपण मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए विकसित किया था। इसमें कोण और दिशाएँ सुरक्षित रहती हैं, जिससे समुद्री यात्रियों के लिए मार्ग निर्धारित करना आसान होता था।
- लेकिन ध्रुवों की ओर बढ़ने पर इसमें क्षेत्रफल की विकृति बहुत बढ़ जाती है। इसका प्रसिद्ध उदाहरण ग्रीनलैंड और अफ्रीका हैं। मर्केटर मानचित्र पर दोनों लगभग समान आकार के दिखाई दे सकते हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका - ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।
मानचित्र का प्रभाव
- कक्षाओं, किताबों और मीडिया में मर्केटर के लंबे समय तक प्रयोग से दुनिया के आकार को लेकर हमारी धारणा प्रभावित हो सकती है। अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का वास्तविक विस्तार मानचित्र पर अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है।
- वास्तव में अफ्रीका इतना विशाल है कि उसके क्षेत्रफल में अमेरिका, चीन, भारत, जापान और यूरोप के बड़े हिस्से को समायोजित किया जा सकता है।
इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का महत्त्व
- इक्वल अर्थ में क्षेत्रफल सही अनुपात में रहते हैं, जबकि महाद्वीपों की आकृतियों को भी पहचानने योग्य और संतुलित रखने का प्रयास किया गया है।
- इसकी अक्षांश रेखाएँ सीधी रहती हैं और मानचित्र को अलग-अलग केंद्रीय देशांतरों के आधार पर भी तैयार किया जा सकता है।
- यह शिक्षा के संदर्भ में वैश्विक भूगोल की समझ को बेहतर करता है। यह विद्यार्थियों और आम लोगों को दुनिया के वास्तविक आकार, संसाधनों के वितरण तथा जलवायु संबंधी चुनौतियों को अधिक संतुलित दृष्टि से समझने में मदद कर सकता है।
वस्तुतः मर्केटर प्रोजेक्शन गलत नहीं है यद्यपि उसका उद्देश्य अलग था। नौवहन के लिए उसकी उपयोगिता ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है। लेकिन यदि उद्देश्य दुनिया के वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना करना है, तो इक्वल अर्थ जैसे समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र अधिक उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं। आखिरकार, मानचित्र केवल धरती का चित्र नहीं होते; वे यह भी प्रभावित करते हैं कि हम दुनिया को किस नजरिए से देखते हैं।