New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

यूरोपीय संघ का कार्बन कर तथा भारत

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार)

संदर्भ 

यूरोपीय संघ (EU) द्वारा अमेरिकी निर्माताओं को विवादास्पद जलवायु-संबंधी व्यापार नियमों, जैसे- कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) और वनों की कटाई के नियमन पर रियायतें देने की पेशकश के साथ भारतीय वार्ताकार सितंबर में ब्रुसेल्स में होने वाली वार्ता के दौरान इसी तरह की राहत के लिए दबाव बनाने की योजना बना रहे हैं।

यूरोपीय संघ का जलवायु व्यापार नियम

  • सी.बी.ए.एम. कार्बन-प्रधान वस्तुओं (जैसे- इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम, उर्वरक) के आयात पर कार्बन टैरिफ लगाता है।
  • यूरोपीय संघ के अनुसार सी.बी.ए.एम. कोई व्यापारिक उपाय नहीं है। यह व्यापार एवं भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं है। 
  • यह डीकार्बोनाइजेशन में तेज़ी लाने के लिए जलवायु एजेंडे के अनुपालन से संबंधित है।
  • इसका उद्देश्य ‘कार्बन रिसाव’ को रोकना और वैश्विक उत्पादकों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की ओर प्रेरित करना है।

यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार समझौता 

  • कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी ड्यू डिलिजेंस डायरेक्टिव (CSDDD) जैसे अन्य जलवायु-व्यापार उपायों पर यूरोपीय संघ ने अमेरिका के प्रति अपना रुख नरम कर दिया है।
    • CSDDD बड़ी कंपनियों को अपने संचालन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मानवाधिकारों तथा पर्यावरणीय जोखिमों की पहचान करने एवं उनका समाधान करने के लिए कानूनी रूप से ज़िम्मेदार बनाता है।   
  • यूरोपीय संघ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि ये उपाय अटलांटिक व्यापार पर अनुचित प्रतिबंध न लगाएँ।
  • यूरोपीय संघ गैर-यूरोपीय संघ देशों की कंपनियों पर प्रासंगिक उच्च गुणवत्ता वाले विनियमों के साथ सी.एस.डी.डी.डी. आवश्यकताओं को लागू करने के संबंध में अमेरिकी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

विभिन्न देशों के तर्क

  • जनवरी 2026 से ई.यू. कार्बन टैक्स यूरोपीय संघ में आयातित कार्बन-प्रधान वस्तुओं पर कार्बन लागत के रूप में लागू होगा। 
  • कई विकासशील देशों द्वारा इसे भेदभावपूर्ण एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के विरुद्ध माना जाता है। 
  • ब्राज़ील, चीन, भारत एवं दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंचों पर कार्बन-प्रधान कर (CBAM) को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई हैं और रूस ने इस साल 12 मई को एक औपचारिक आपत्ति दर्ज़ की है।

भारत की चिंताएँ

  • सी.बी.ए.एम. एक गैर-टैरिफ अवरोध के रूप में कार्य करता है जो भारतीय निर्यात (विशेषकर इस्पात एवं एल्युमीनियम) को प्रभावित करता है।
  • आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार यूरोपीय संघ को स्टील एवं एल्युमीनियम की आपूर्ति विगत वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2025 में 24.4% घटकर 7.71 अरब डॉलर से 5.82 अरब डॉलर रह गई है। 
    • यह चिंताजनक है क्योंकि भारतीय उत्पाद पहले से ही अमेरिकी बाजार में स्टील एवं एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ का सामना कर रहे हैं।
  • ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार यूरोपीय संघ की व्यापार बाधाएँ जटिल एवं अस्पष्ट हैं। 
    • ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ एक निष्पक्ष मुक्त व्यापार समझौते में कार्बन टैक्स जैसे उपायों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • CBAM के पूरी तरह से लागू होने पर भारतीय फर्म्स पर 20-35% आयात कर लगेगा और उद्योग को यूरोपीय संघ के साथ सभी संयंत्र व उत्पादन विवरण साझा करने होंगे। 
  • यूरोपीय संघ के सी.बी.ए.एम में वर्तमान में लोहा एवं इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, बिजली व हाइड्रोजन शामिल हैं।
    • हालाँकि, भविष्य में इसके अंतर्गत शामिल वस्तुओं की सूची का विस्तार किया जा सकता है जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। 
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सी.बी.ए.एम. को यू.एन.एफ.सी.सी.सी. के तहत साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के विरुद्ध बताया है।

भारत की रणनीति

  • अमेरिका के समान छूट/राहत की माँग करना
  • भारत के निम्न प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और विकास आवश्यकताओं को मान्यता देने के लिए दबाव बनाना
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X