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ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (Green Credit Program: GCP)

चर्चा में क्यों ?

  • केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (GCP), 2023 के नियमों के अंतर्गत “वृक्षारोपण गतिविधि के लिए ग्रीन क्रेडिट की गणना” हेतु पद्धतियों को अधिसूचित किया है। 
  • यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने वाले बाजार-आधारित तंत्र के रूप में सामने आई है।


ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (GCP), 2023 क्या है ?

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम एक स्वैच्छिक और अभिनव तंत्र है, जो विभिन्न हितधारकों—जैसे उद्योग, राज्य सरकारें और परोपकारी संस्थाएं—को पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करता है।

पात्र गतिविधियां

  • संधारणीय कृषि पद्धतियां
  • अपशिष्ट प्रबंधन
  • वायु प्रदूषण में कमी
  • वृक्षारोपण

मुख्य विशेषताएं

  • स्वैच्छिक भागीदारी: इसमें शामिल होना पूरी तरह से वैकल्पिक है।
  • क्रेडिट का व्यापार: ग्रीन क्रेडिट का व्यापार घरेलू प्लेटफ़ॉर्म पर किया जा सकता है।
  • ESG डिस्क्लोज़र: कंपनियां इसे अपने ESG रिपोर्टिंग में शामिल कर सकती हैं।
  • प्रशासनिक निकाय: भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), देहरादून।

ग्रीन क्रेडिट (GC) क्या है ?

ग्रीन क्रेडिट एक प्रोत्साहन इकाई है, जो पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली गतिविधियों के लिए प्रदान की जाती है।

  • यह कार्बन क्रेडिट की तरह एक्सचेंज पर व्यापार योग्य है।
  • GCP के तहत इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत संचालित किया जाता है।
  • यह सीधे व्यक्तियों और समुदायों को लाभ पहुँचाता है।

ग्रीन क्रेडिट और कार्बन क्रेडिट का अंतर

विशेषता

ग्रीन क्रेडिट

कार्बन क्रेडिट

अधिनियम

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001

लाभार्थी

व्यक्ति, समुदाय

उद्योग और निगम

गतिविधियाँ

वृक्षारोपण, अपशिष्ट प्रबंधन, वायु प्रदूषण में कमी आदि

ऊर्जा बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी

ध्यान दें कि सभी ग्रीन क्रेडिट गतिविधियाँ कार्बन क्रेडिट के लिए पात्र हो सकती हैं, लेकिन कार्बन क्रेडिट गतिविधियाँ हमेशा ग्रीन क्रेडिट के लिए पात्र नहीं होतीं।

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से जुड़ी चिंताएं

  1. वन क्षेत्रों के गैर-वनीकरण को प्रोत्साहन: कंपनियां पुनर्वनीकरण के बजाय क्रेडिट खरीद सकती हैं, जिससे वास्तविक पर्यावरण संरक्षण प्रभावित हो सकता है।
  2. वन-आवरण में वास्तविक वृद्धि का अभाव: GCP में मौजूदा निम्नीकृत वन भूमि का ही उपयोग अधिक होता है, जिससे नई वन भूमि सृजन की संभावना कम रहती है।
  3. मूल्यांकन और दीर्घकालिक संधारणीयता: ग्रीन क्रेडिट में वृक्षारोपण की सफलता या पेड़ों के जीवित रहने की स्पष्ट मानक प्रणाली नहीं है, जिससे विफल परियोजनाओं को भी क्रेडिट मिल सकता है।

आगे की राह

  • ग्रीन क्रेडिट को कार्बन क्रेडिट की तरह कमोडिटी डेरिवेटिव के रूप में मान्यता देना आवश्यक है।
  • मात्रात्मक कार्य-पद्धति: जैसे कार्बन क्रेडिट के लिए ‘एक टन CO₂ समतुल्य उत्सर्जन में कमी’ मानदंड अपनाया जाता है, वैसे ही ग्रीन क्रेडिट के लिए भी स्पष्ट गणना मानदंड तय किए जाने चाहिए।
  • दोहरे प्रोत्साहन से बचाव: ग्रीन क्रेडिट और कार्बन क्रेडिट के लिए पात्र गतिविधियों की स्पष्ट परिभाषा होनी चाहिए।

निष्कर्ष

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम एक सकारात्मक और सार्थक पहल है, लेकिन इसकी सफलता क्रेडिट जारी करने और व्यापार संबंधी प्रक्रियाओं में स्पष्टता, पारदर्शिता और निगरानी पर निर्भर करेगी।

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