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हरित स्थिति मूल्यांकन

(प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 पर्यावरण एवं पारिस्थिकी)
(मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : जैव विविधता, पर्यावरण, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ 

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा शेर (पेंथेरा लियो) के लिए पहला हरित स्थिति मूल्यांकन (Green Status Assessment) जारी किया गया है जोकि शेरों के गहन संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। 

हरित स्थिति मूल्यांकन (Green Status Assessment) के बारे में 

  • क्या है : यह मूल्यांकन पहल आई.यू.सी.एन. द्वारा जारी की जाने वाली रेड लिस्ट का एक पूरक उपकरण है जोकि विभिन्न प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति का आकलन करती है। 
  • आरंभ : वर्ष 2021 
  • उद्देश्य : 
    • प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति को मापने के लिए एक मानकीकृत ढांचा प्रदान करना
    • विभिन्न देशों द्वारा निरंतर संरक्षण उपलब्धियों को मान्यता देना 
    • संरक्षण के प्रभाव तथा निरंतर संरक्षण प्रयासों पर कई प्रजातियों की निर्भरता पर प्रकाश डालना 
  • शामिल प्रजातियाँ : वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में 100 से अधिक प्रजातियाँ हरित स्थिति मूल्यांकन में शामिल हैं।

शेरों के पहले हरित मूल्यांकन की स्थिति 

शेरों की संख्या में गिरावट और विलुप्ति 

मूल्यांकन के अनुसार इस प्रजाति की संख्या बड़े क्षेत्रों में कम हो गई है जिनमें उत्तरी अफ्रीका एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया ऐसे क्षेत्र हैं जहां से यह प्रजाति विलुप्त हो गई है।

पारिस्थितिक कार्यात्मकता 

मूल्यांकन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि विभिन्न मानवीय प्रभाव, जैसे कि आवास की हानि और विखंडन आदि के कारण वे अपने पारिस्थितिक तंत्र में पूरी तरह कार्यात्मक नहीं हैं।

IUCN रेड लिस्ट स्थिति

शेरों की संख्या काफी हद तक समाप्त हो चुकी है। हालाँकि, इस प्रजाति को आई.यू.सी.एन. रेड लिस्ट में अभी भी संकटग्रस्त (Vulnerable) सूची में रखा गया है। 

गहन संरक्षण की आवश्यकता

मूल्यांकन में शेरों के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने और उनके पुनरुद्धार एवं मौजूदा आबादी को बनाए रखने के लिए के लिए गहन संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

संरक्षण प्रयासों की सफलता 

विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भी मूल्यांकन ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि संरक्षण प्रयासों ने पश्चिम और दक्षिणी मध्य अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका एवं भारत से संभावित विलुप्ति को रोका है। 

क्या आप जानते हैं?

  • IUCN के हालिया आकलन के अनुसार आई.यू.सी.एन. रेड लिस्ट में अब 169,420 प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें से 47,187 विलुप्त होने के खतरे में हैं। 
  • संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट में 482 नई कवक प्रजातियों के शामिल होने से IUCN रेड लिस्ट में उनकी संख्या 1,300 हो गई है, जिनमें से कम से कम 411 विलुप्त होने के खतरे में हैं 
    • इससे यह पुष्टि होती है कि वनों की कटाई, कृषि विस्तार और शहरी विकास के कारण दुनिया भर में इन प्रजातियों की संख्या में गिरावट आ रही है।
  • इसके अलावा लोबान के पेड़ों पर विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। 
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