भारत-आसियान संबंध: 2025 में व्यापारिक साझेदारी का पुनर्निर्माण

(प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार)

संदर्भ

भारत-आसियान (ASEAN) संबंध हाल के वर्षों में अधिक रणनीतिक होते जा रहे हैं। भारत-आसियान ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (AITIGA) की 2025 समीक्षा भारत के लिए व्यापार घाटे को कम करने और साझेदारी को संतुलित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

भारत-आसियान ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (AITIGA) 2025 समीक्षा 

  • भारत ने 10 से 14 अगस्त, 2025 के दौरान नई दिल्ली में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति की 10वीं बैठक की मेजबानी की थी।
  • समिति की अगली बैठक 6-7 अक्तूबर, 2025 को इंडोनेशिया के जकार्ता स्थित आसियान सचिवालय में निर्धारित है और इसकी मेजबानी मलेशिया करेगा।
  • अगस्त 2025 में फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनांड आर. मार्कोस जूनियर की भारत यात्रा ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को नई दिशा दी है।

भारत-आसियान संबंध : एक अवलोकन

  • आसियान (ASEAN) दक्षिण-पूर्व एशिया के 10 देशों का संगठन है जो भारत के लिए व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी व सुरक्षा का प्रमुख साझेदार है। 
  • भारत-आसियान व्यापार वर्तमान में 120 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का है और भारत के शीर्ष 5 व्यापारिक साझेदारों में आसियान भी एक है।
  • भारत के वैश्विक व्यापार के लगभग 11% हिस्से के लिए आसियान का योगदान होता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत-आसियान संवाद साझेदारी वर्ष 1992 में शुरू हुई थी। 
  • वर्ष 2009 में AITIGA समझौते पर हस्ताक्षर हुए और 2010 में इसे लागू किया गया।
  • 2022 में दोनों पक्षों ने साझेदारी को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया।

व्यापारिक असंतुलन की चुनौती

  • तेजी से बढ़ता व्यापार घाटा: वर्ष 2009 से 2023 के बीच भारत का आसियान से आयात 234% बढ़ा, जबकि निर्यात केवल 130% बढ़ा। 
    • भारत का व्यापार घाटा वर्ष 2011 के 7.5 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2023 में लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • सीमित बाजार पहुँच: भारत के निर्यात (पेट्रोलियम उत्पाद, ऑटोमोबाइल, फार्मा आदि) को आसियान देशों में गैर-शुल्कीय बाधाओं (NTBs), सख्त मानकों और कस्टम देरी का सामना करना पड़ता है।
  • SMEs की मुश्किलें: भारतीय छोटे-मझोले उद्योग आसियान की बेहतर लॉजिस्टिक्स और उत्पादन नेटवर्क के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं।

घरेलू उद्योग पर प्रभाव और नीति प्रतिक्रिया

  • भारतीय किसान, डेयरी, टेक्सटाइल एवं विनिर्माण क्षेत्र पर सस्ते आसियान आयात का दबाव बढ़ा है।
  • इसी कारण भारत ने वर्ष 2019 में RCEP समझौते से बाहर रहने का निर्णय लिया था।
  • भारत अब AITIGA के प्रावधानों की पुनर्समीक्षा चाहता है ताकि घरेलू उद्योग की सुरक्षा एवं निर्यात को बढ़ावा मिल सके।

आसियान का दृष्टिकोण

  • आसियान के लिए भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है किंतु व्यापारिक प्राथमिकताओं में अभी भी चीन, अमेरिका, जापान एवं EU शीर्ष पर हैं।
  • आसियान देश तभी समझौते में संशोधन के लिए तैयार होंगे जब उन्हें भी राजनीतिक एवं आर्थिक लाभ स्पष्ट दिखाई देंगे।

भारत के लिए अवसर

  • गैर-शुल्कीय बाधाओं (NTBs) का समाधान : भारतीय निर्यातकों के बाधारहित प्रवेश के लिए मानक एवं प्रमाणन को लेकर पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता 
  • रूल्स ऑफ ओरिजिन (RoO) में सुधार : चीन जैसे तीसरे देशों से माल को आसियान मार्ग से पुनः निर्यात करने की प्रवृत्ति को रोकना 
  • सेवाओं और निवेश पर जोर : IT, हेल्थकेयर, शिक्षा, फिनटेक एवं डिजिटल ट्रेड में भारत की विशेषता का लाभ लेना
  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस : इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर एवं महत्वपूर्ण खनिजों में संयुक्त निवेश से चीन पर निर्भरता कम करना
  • सतत विकास : ग्रीन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी व क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर में साझेदारी

भविष्य की दिशा

वर्ष 2025 की आगामी समीक्षा बैठक भारत के लिए केवल समझौते को संतुलित करने का मौका नहीं है बल्कि एक नए युग की शुरुआत करने का अवसर है। भारत-आसियान को केवल व्यापार पर नहीं, बल्कि डिजिटलाइजेशन, सतत विकास एवं हिंद-प्रशांत में रणनीतिक स्वायत्तता पर भी सहयोग बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत-आसियान संबंध वर्तमान में केवल आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग का प्रतीक बन चुके हैं। AITIGA की पुनर्समीक्षा से दोनों पक्षों को समान लाभ सुनिश्चित करना, गुणवत्ता आधारित व्यापार को बढ़ावा देना और 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना आवश्यक है। यदि दोनों पक्ष राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते हैं तो यह साझेदारी एक लेन-देन आधारित भागीदार से परिवर्तनकारी सहयोगी में बदल सकती है।

आसियान (ASEAN) के बारे में

  • पूरा नाम: एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस (Association of Southeast Asian Nations)
  • स्थापना: 8 अगस्त, 1967
  • मुख्यालय: जकार्ता, इंडोनेशिया
  • सदस्य देश (10) : इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया
  • कुल जनसंख्या: लगभग 68 करोड़ (विश्व की लगभग 8.5% जनसंख्या)
  • कुल क्षेत्रफल: लगभग 44.5 लाख वर्ग किमी. (विश्व के कुल क्षेत्रफल का करीब 3%)
  • कुल GDP (2025 अनुमान): लगभग 3.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 3.5%)
  • वैश्विक व्यापार में योगदान: विश्व व्यापार का लगभग 7% हिस्सा
  • मुख्य उद्देश्य:
    • आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना
    • क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं सहयोग को बनाए रखना
  • महत्वपूर्ण समझौते:
    • आसियान चार्टर (ASEAN Charter)
    • आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र (AFTA)
  • रणनीतिक महत्व:
    • हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख संगठन
    • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र
    • चीन-अमेरिका के बीच शक्ति संतुलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका
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