चर्चा में क्यों ?
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया कि घरेलू मांग मजबूत रहने और महंगाई दर नियंत्रित रहने के कारण आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.8% से 7.2% तक रहने का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 का अवलोकन:
- अप्रैल-दिसंबर अवधि में वस्तु और सेवा क्षेत्र में 5.9% का वास्तविक वृद्धि दर्ज हुई।
- अमेरिका द्वारा 50% शुल्क लगाने के बावजूद सर्विस सेक्टर निर्यात में तेजी बनी रही,
- इससे विकास दर 7.4% से अधिक रहने की संभावना है।
- मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार,
- यदि मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात पर फोकस बढ़ाया जाए तो विकास दर 7.5%-8% तक पहुंच सकती है।
वैश्विक और घरेलू चुनौतियां:
- वैश्विक व्यापार युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं।
- अमेरिकी शुल्क एवं वैश्विक अशांति से शुद्ध विदेशी निवेश में कमी की आशंका।
- रुपये की लगातार कमजोरी और AI आधारित निवेश जोखिम बाजार में नकदी प्रवाह पर असर डाल सकते हैं।
- राज्यों को भूमि उपलब्धता, नियम सरलीकरण और उद्योग-मित्र नीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
नीतिगत सुधार और स्थिरता:
- श्रम संहिता और GST सुधार ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को मजबूत किया।
- राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में GDP का 4.4% रहने का अनुमान है – पिछले पांच साल में सबसे कम।
- औसत महंगाई दर 2.9% – पांच साल के न्यूनतम स्तर पर।
- वैश्विक अनिश्चितता को अवसर में बदलते हुए भारत अपनी आर्थिक नीति से नई वैश्विक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संभावित विकास दर (IMF अनुमान, 2027)
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क्षेत्र/देश
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विकास दर (%)
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अमेरिका
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2.0
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लैटिन अमेरिका
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2.7
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यूरोपियन यूनियन
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1.4
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मध्य पूर्व व सेंट्रल एशिया
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4.0
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विकासशील एशिया
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4.8
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भारत
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6.4
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विकास रणनीति: विनिर्माण और निर्यात:
- स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर।
- आयात में कमी और निर्यात बढ़ाने के लिए क्लस्टर आधारित उत्पादन सुविधा और इंसेंटिव।
- लागत कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम वस्तुओं का निर्माण।
- कौशल आधारित वर्कफोर्स तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और गुणवत्ता पर ध्यान।
- छोटे उद्यमियों को संगठित सेक्टर में लाने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने की योजना।
- बजट में “दाम कम, दम ज्यादा” नारे के अनुरूप नीति निर्माण।
नीति और भविष्य की संभावनाएँ:
- भारत का उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भागीदार बनना।
- वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू आर्थिक स्थिरता और निर्यात बढ़ोतरी के जरिए वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पकड़ मजबूत होगी।
- राज्यों और केंद्र को मिलकर नियम सरलीकरण और निवेश अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक।
- तकनीकी सुधार और AI के माध्यम से निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान।
विकास दर (Growth Rate):
- विकास दर वह प्रतिशत है, जो किसी विशेष अवधि (सामान्यतः एक वित्त वर्ष या एक तिमाही) में देश की कुल आर्थिक उत्पादन क्षमता में वृद्धि को दर्शाती है।

महत्व:
- आर्थिक स्वास्थ्य का संकेत - उच्च विकास दर का मतलब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है।
- नीति निर्माण में मदद - सरकार नीतिगत फैसले और बजट इसी पर आधारित लेती है।
- रोजगार और निवेश - उच्च विकास दर से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ते हैं।
- वैश्विक तुलना - विकास दर देशों की आर्थिक गति और प्रतिस्पर्धा का माप है।
प्रकार :
- GDP विकास दर - कुल उत्पादन और सेवाओं की वृद्धि।
- उद्योग/वाणिज्य विकास दर - विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) की वृद्धि।
- वास्तविक और नाममात्र (Real vs Nominal Growth)
- Real Growth: महंगाई (Inflation) को समायोजित करके।
- Nominal Growth: मूल्य वृद्धि को समायोजित किए बिना।
आर्थिक सर्वेक्षण :
- एक वार्षिक रिपोर्ट होती है, जिसे भारत सरकार की वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किया जाता है।
- इसे आम तौर पर वित्त मंत्री संसद में पेश करती हैं और यह अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करने से पहले सार्वजनिक की जाती है।
उद्देश्य:
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्लेषण - पिछले साल की आर्थिक गतिविधियों का विवरण।
- विकास दर और आर्थिक संकेतकों की जानकारी - GDP वृद्धि, महंगाई, निर्यात-आयात, रोजगार आदि।
- नीतिगत सिफारिशें - सरकार को सुधार और निवेश के लिए सुझाव।
- राजकोषीय स्थिति का आकलन - सरकारी खर्च, राजस्व और घाटे का विवरण।
- भविष्य के लिए मार्गदर्शन - अगले वित्त वर्ष की आर्थिक नीतियों और बजट की दिशा तय करना।
मुख्य विशेषताएँ :
- वार्षिक रिपोर्ट: हर साल संसद में प्रस्तुत की जाती है।
- वित्तीय और सामाजिक संकेतक: GDP, महंगाई (CPI/WPI), राजकोषीय घाटा, रोजगार और निवेश का आंकलन।
- नीतिगत सुझाव: बजट निर्माण से पहले नीति निर्माता के लिए मार्गदर्शन।
- सटीक और तथ्यपरक: आंकड़ों और विश्लेषण पर आधारित।
- सार्वजनिक उपलब्धता: रिपोर्ट आम जनता, अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध।
संरचना :
- आर्थिक सर्वेक्षण सामान्यतः निम्न भागों में होता है:
- पूर्वार्द्ध - भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति।
- संबंधित आंकड़े - GDP, निवेश, निर्यात-आयात, महंगाई, रोजगार।
- विभिन्न क्षेत्रीय विश्लेषण - कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र।
- नीतिगत सुझाव और सुधार - बजट और नीति निर्माण के लिए।
- विशेष रिपोर्ट - कभी-कभी वित्त वर्ष की मुख्य चुनौतियों और अवसरों पर विश्लेषण।
महत्व:
- सरकार को नीति निर्माण और सुधार में मदद करता है।
- अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं को वास्तविक आंकड़े और विश्लेषण उपलब्ध कराता है।
- आम जनता को देश की आर्थिक स्थिति समझने में मदद करता है।
- आगामी बजट और वित्तीय निर्णयों का मार्गदर्शन करता है।
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प्रश्न. आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अनुमानित विकास दर (GDP Growth Rate) क्या रहने का अनुमान है ?
(a) 5.0% – 5.5%
(b) 6.8% – 7.2%
(c) 7.5% – 8.0%
(d) 4.5% – 5.0%
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