संदर्भ
हाल ही में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (आरआरएसएल) में व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी पर आधारित भारतीय मानक समय (आईएसटी) प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क का उद्घाटन किया।
भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क के बारे में
- प्रदर्शन नेटवर्क उपभोक्ता मामलों के विभाग, सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर-एनपीएल) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- यह प्रदर्शन नेटवर्क प्रिसिजन टाइम प्रोटोकॉल (पीटीपी) पर आधारित व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी का उपयोग करके यूटीसी (एनपीएलआई)-ट्रेसेबल इंडियन स्टैण्डर्ड टाइम के सुरक्षित प्रसार को संभव बनाता है।
प्रदर्शन नेटवर्क की मुख्य विशेषताएं:
- यूटीसी (एनपीएलआई)-ट्रेसेबल इंडियन स्टैण्डर्ड टाइम के सुरक्षित प्रसार को संभव बनाता है।
- प्रिसिजन टाइम प्रोटोकॉल (पीटीपी)-आधारित व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है।
- बेहद सटीक, सुरक्षित और भरोसेमंद टाइम सिंक्रोनाइजेशन प्रदान करता है।
- यह नेटवर्क महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जैसे कि:
- बैंकिंग एवं वित्तीय बाज़ार
- दूरसंचार
- विद्युत प्रणाली
- परिवहन
- डिजिटल शासन
- अन्य रणनीतिक बुनियादी ढांचा
महत्त्व:
भारतीय मानक समय का सटीक एवं सुरक्षित प्रसार देश के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में उभर रहा है। वस्तुतः समय का एक विश्वसनीय राष्ट्रीय स्रोत:
- उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करेगा।
- निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करेगा।
- साइबर सुरक्षा की सुदृढ़ता को बढ़ाएगा।
- वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता को बेहतर बनाएगा।
- दूरसंचार और विद्युत प्रणालियों में सुधार करेगा।
- डिजिटल शासन को मजबूत करेगा।
व्हाइट रैबिट (White Rabbit – WR) तकनीक के बारे में
- व्हाइट रैबिट (White Rabbit – WR) CERN द्वारा, विभिन्न संस्थानों और कंपनियों के सहयोग से विकसित की गई एक ऐसी तकनीक है।
- इसका उद्देश्य एक्सेलेरेटरों (Accelerators) में उपकरणों को एक नैनोसेकंड (Sub-nanosecond) से भी कम स्तर की सटीकता के साथ समकालिक (Synchronize) करना और पूरे नेटवर्क में समय की एक समान अवधारणा (Common Notion of Time) स्थापित करने की चुनौती का समाधान करना है।
- वर्ष 2012 में पहली बार उपयोग किए जाने के बाद, इस पूर्णतः ओपन-सोर्स (Open Source) तकनीक का उपयोग कण भौतिकी (Particle Physics) के क्षेत्र से बाहर भी तेज़ी से बढ़ा।
- वर्ष 2020 में इसे वैश्विक औद्योगिक मानक प्रिसीजन टाइम प्रोटोकॉल (Precision Time Protocol – PTP) में शामिल किया गया, जिसका संचालन इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (IEEE) द्वारा किया जाता है।
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व्हाइट रैबिट कोलैबोरेशन (White Rabbit Collaboration):
- हाल ही में सीईआरएन (CERN) ने व्हाइट रैबिट कोलैबोरेशन (White Rabbit Collaboration) की स्थापना की है।
- यह सदस्यता-आधारित (Membership-Based) वैश्विक समुदाय है, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च-प्रदर्शन वाली ओपन-सोर्स तकनीक का रखरखाव करना तथा उद्योगों में इसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है।
- व्हाइट रैबिट कोलैबोरेशन अपने सदस्यों को विशेष तकनीकी सहायता (Dedicated Support) और प्रशिक्षण (Training) प्रदान करेगा, समान रुचियों और पूरक विशेषज्ञता (Complementary Expertise) रखने वाले संगठनों के बीच अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं को बढ़ावा देगा तथा ऐसा परीक्षण तंत्र (Testing Ecosystem) स्थापित करेगा जिससे इस ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित उत्पादों के प्रति विश्वास बढ़ सके।
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- व्हाइट रैबिट का उपयोग आज वित्तीय क्षेत्र (Finance Sector) के साथ-साथ अनेक अनुसंधान अवसंरचनाओं (Research Infrastructures) में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, भविष्य के क्वांटम इंटरनेट (Quantum Internet) में इसके संभावित उपयोग का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।
- यह तकनीक वैश्विक समय वितरण (Global Time Dissemination) प्रणाली के भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था मुख्य रूप से उपग्रहों (Satellites) पर निर्भर है।
- समय के सटीक वितरण की अवसंरचना (Infrastructure for Time Dissemination) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा अधिकांश महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचनाओं (Critical National Infrastructure) की आधारशिला भी है। इसी कारण विश्वभर की सरकारें और उद्योग, संदर्भ समय (Reference Time) के वितरण के लिए वैकल्पिक प्रणालियों की तलाश कर रहे हैं।